भारत में पिछले एक दशक के दौरान लोन लेने की प्रवृत्ति में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां लोग कर्ज लेने से बचते थे, वहीं अब शिक्षा, घर, वाहन, बिजनेस और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन लेना आम बात बन गई है। नई क्रेडिट रिपोर्ट के अनुसार देश में लोन लेने वाले वयस्कों की संख्या में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि भारत का क्रेडिट बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है।
बैंकों, एनबीएफसी और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स ने छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ाई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के लोग भी आसानी से लोन प्राप्त कर रहे हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। इन क्षेत्रों में रोजगार, छोटे कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के कारण भी क्रेडिट की आवश्यकता बढ़ी है।
युवा और महिलाएं बन रही हैं क्रेडिट बाजार की नई ताकत ?
रिपोर्ट के अनुसार युवाओं और महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां महिलाओं की क्रेडिट हिस्सेदारी सीमित थी, वहीं अब वे शिक्षा, व्यवसाय और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए सक्रिय रूप से लोन ले रही हैं। दूसरी ओर युवा वर्ग भी स्टार्टअप, उच्च शिक्षा, वाहन और डिजिटल कारोबार के लिए वित्तीय सहायता का अधिक उपयोग कर रहा है। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लोन प्रक्रिया ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है, क्योंकि अब दस्तावेज़ी प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सरल हो चुकी है।
लोन लेने के साथ-साथ लोगों में अपने क्रेडिट स्कोर को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। पहले जहां अधिकांश लोगों को क्रेडिट स्कोर का महत्व पता नहीं होता था, वहीं अब समय पर ईएमआई भुगतान और बेहतर क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अच्छा क्रेडिट स्कोर भविष्य में कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना को बढ़ाता है, इसलिए लोग अपनी वित्तीय अनुशासन पर पहले से अधिक ध्यान दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल लेंडिंग, फिनटेक कंपनियों और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के कारण भारत का क्रेडिट बाजार और तेजी से बढ़ेगा। हालांकि इसके साथ जिम्मेदार उधारी भी उतनी ही जरूरी है। जरूरत के अनुसार ही लोन लेना, समय पर किस्त चुकाना और अपनी आय के अनुसार वित्तीय योजना बनाना हर उधारकर्ता के लिए महत्वपूर्ण होगा। यदि लोन का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह आर्थिक प्रगति और व्यक्तिगत विकास का प्रभावी माध्यम बन सकता है, लेकिन अनावश्यक कर्ज वित्तीय दबाव भी बढ़ा सकता है। ऐसे में बढ़ते लोन कल्चर के साथ वित्तीय समझदारी और अनुशासन दोनों का संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।






