मुंबई: बीमा क्लेम को लेकर सामने आए एक मामले में मुंबई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने Victorinox India Private Limited से जुड़े मामले में कंपनी द्वारा बीमा क्लेम खारिज किए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मामले में आयोग ने रिकॉर्ड में मौजूद ई-मेल संवाद को भी अहम साक्ष्य माना।
ई-मेल रिकॉर्ड से सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी ?
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध ई-मेल रिकॉर्ड का परीक्षण किया। रिकॉर्ड के आधार पर आयोग ने पाया कि Victorinox India Private Limited ने सर्वेयर द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इसका मतलब यह था कि बीमा दावे की जांच के दौरान कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी और दस्तावेज देने की प्रक्रिया पूरी की गई थी उपभोक्ता विवादों में दस्तावेज और लिखित संवाद की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। खासकर बीमा क्लेम से जुड़े मामलों में यह देखा जाता है कि पॉलिसीधारक या बीमित कंपनी ने सर्वेयर अथवा बीमा कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध कराई थी या नहीं। इस मामले में ई-मेल रिकॉर्ड ने इसी पहलू को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्लेम रिजेक्ट करने पर उठे सवाल ?
बीमा पॉलिसी लेने के बाद नुकसान होने की स्थिति में पॉलिसीधारक को उम्मीद होती है कि निर्धारित शर्तों के अनुसार उसका क्लेम जांच के बाद निपटाया जाएगा। लेकिन जब किसी दावे को अस्वीकार किया जाता है, तो विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोग यह जांच सकता है कि बीमा कंपनी का निर्णय पॉलिसी की शर्तों और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुरूप था या नहीं। इस मामले में आयोग के सामने यह महत्वपूर्ण बिंदु रहा कि सर्वेयर द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। ई-मेल रिकॉर्ड से संबंधित तथ्य सामने आने के बाद आयोग ने मामले का मूल्यांकन किया और बीमा क्लेम को लेकर अपना फैसला सुनाया।
₹8.06 करोड़ की राशि से जुड़ा है मामला ?
आयोग के आदेश के अनुसार इंश्योरेंस कंपनी को ₹8.06 करोड़ की राशि का भुगतान करना होगा। इतनी बड़ी राशि का आदेश होने के कारण यह मामला बीमा क्षेत्र और बड़े कारोबारी बीमा क्लेम से जुड़े विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि बीमा क्लेम से जुड़े विवाद में केवल मौखिक दावों के बजाय लिखित दस्तावेज, ई-मेल, सर्वेयर के साथ हुआ संवाद और जमा किए गए कागजात काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
बीमा पॉलिसीधारकों के लिए क्या है सबक?
इस मामले से आम पॉलिसीधारकों और कंपनियों को भी महत्वपूर्ण सीख मिलती है। बीमा क्लेम करते समय सर्वेयर या इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मांगे गए दस्तावेजों को समय पर उपलब्ध कराना चाहिए। साथ ही दस्तावेज जमा करने का ई-मेल, रसीद या अन्य प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। यदि क्लेम से संबंधित कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो यही रिकॉर्ड यह साबित करने में मदद कर सकते हैं कि पॉलिसीधारक ने अपनी ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की थी।मुंबई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का यह आदेश बीमा क्लेम विवादों में दस्तावेजी प्रमाण की अहमियत को सामने लाता है। Victroinox India Private Limited द्वारा सर्वेयर को मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात ई-मेल रिकॉर्ड से सामने आने के बाद मामले में आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को ₹8.06 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया।






