राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों और भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में जारी युद्ध, तनाव और अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक मजबूती और विकास की रफ्तार को बनाए रखा है। राष्ट्रपति ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि कठिन अंतरराष्ट्रीय माहौल के बीच भी भारत आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। राष्ट्रपति के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वैश्विक औसत की तुलना में काफी मजबूत रहने का अनुमान है। उन्होंने इस प्रदर्शन को देश की आर्थिक नीतियों, बढ़ते घरेलू बाजार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास से जोड़कर देखा। उनका संदेश यह रहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत केवल परिस्थितियों का सामना ही नहीं कर रहा, बल्कि विकास के नए अवसर भी तैयार कर रहा है।
युद्ध और अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक मजबूती ?
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में दुनिया में बढ़ते संघर्षों को लेकर चिंता जताई। युद्ध का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे माहौल में किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास को बनाए रखना आसान नहीं होता। भारत ने इन चुनौतियों के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर रखने में सफलता हासिल की है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है और देश वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निवेश में बढ़ती गतिविधियों को आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने देश के युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। भारत की बड़ी युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक माना जाता है। नई तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने भी आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए कई सुविधाएं आसान की हैं। राष्ट्रपति का संबोधन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने देश की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों की जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। उनका संदेश था कि देश की प्रगति में सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। जब देश वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियों का सामना कर रहा हो, तब सामाजिक एकता और आपसी विश्वास की भूमिका और बढ़ जाती है। भारत के लिए आने वाला समय अवसरों से भरा हुआ माना जा रहा है। वैश्विक कंपनियां उत्पादन और निवेश के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं, ऐसे में भारत अपनी बड़ी अर्थव्यवस्था, युवा कार्यबल और बढ़ते बाजार के दम पर आकर्षक केंद्र बन सकता है। हालांकि, रोजगार, महंगाई, असमानता और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां भी बनी रहेंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन का प्रमुख संदेश यही रहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की आर्थिक यात्रा मजबूत बनी हुई है। उन्होंने देशवासियों के भरोसे, मेहनत और सामूहिक प्रयास को भारत की आगे की प्रगति का आधार बताया। बदलते वैश्विक माहौल में भारत की आर्थिक मजबूती न केवल देश के लिए उम्मीद का संकेत है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।






