रेल यात्रा के दौरान टिकट कन्फर्म होने की उम्मीद लेकर स्टेशन पहुंचने के बाद अगर यात्री को पता चले कि उसका टिकट वेटिंग में चला गया है, तो परेशानी बढ़ना तय है। ऐसा ही एक मामला दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के सामने आया, जिसमें यात्री को टिकट की स्थिति बदलने की जानकारी समय पर नहीं दी गई। मामले में लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आयोग ने रेलवे की जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए यात्री को मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा है।
RAC से वेटिंग में बदल गया टिकट ?
मामला उस समय का है जब यात्री ने ट्रेन में सफर के लिए टिकट बुक कराया था। बुकिंग के समय उसका टिकट RAC-43 था। यानी यात्री को ट्रेन में यात्रा करने का अधिकार था और उसे सीट/बर्थ साझा करनी पड़ सकती थी। लेकिन यात्रा के दिन जब वह स्टेशन पहुंचा, तो टिकट का स्टेटस बदलकर WL-44 हो चुका था।
सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यात्री को इस बदलाव की जानकारी समय पर नहीं मिली। इसके चलते वह ऐसी स्थिति में पहुंच गया जहां उसे यात्रा के दौरान बैठने की उचित सुविधा नहीं मिल सकी। मामले में रेलवे की ओर से बताया गया कि संबंधित ट्रेन से एक कोच हटाए जाने के कारण टिकटों की स्थिति प्रभावित हुई थी। कोच कम होने की वजह से कुछ यात्रियों की बुकिंग व्यवस्था बदल गई और इसी क्रम में यात्री का RAC टिकट भी वेटिंग लिस्ट में चला गया। हालांकि, उपभोक्ता आयोग के सामने सवाल केवल कोच हटाए जाने का नहीं था। अहम मुद्दा यह था कि क्या रेलवे ने यात्री को टिकट की स्थिति में हुए बदलाव की जानकारी समय पर दी थी?
यात्री का आरोप था कि उसे इस बदलाव की सूचना नहीं दी गई। परिणामस्वरूप उसे यात्रा के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ी और पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी। यह मामला जल्द खत्म नहीं हुआ। यात्री ने अपनी शिकायत को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और करीब 14 वर्षों तक मामला चला। इतने लंबे समय के बाद दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने पुराने आदेश में रेलवे को यात्री को मुआवजा देने की जिम्मेदारी को बरकरार रखा। इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि यात्रियों को केवल टिकट उपलब्ध कराना ही रेलवे की जिम्मेदारी नहीं है। अगर परिचालन कारणों से टिकट की स्थिति बदलती है, तो यात्री को उचित और समय पर सूचना देना भी महत्वपूर्ण है।
यात्री के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला रेलवे यात्रियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि ट्रेन का टिकट बुक करने के बाद उसकी स्थिति में बदलाव होने पर यात्री को इसकी जानकारी मिलना जरूरी है। खासकर RAC या कन्फर्म टिकट के मामले में अंतिम समय पर स्थिति बदलने से यात्री की पूरी यात्रा प्रभावित हो सकती है।
इस घटना से यात्रियों को यह सीख भी मिलती है कि यात्रा से पहले टिकट का PNR स्टेटस दोबारा जांचना बेहतर होता है। अगर टिकट की स्थिति में कोई बदलाव दिखाई दे, तो रेलवे से समय रहते जानकारी लेना चाहिए। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का यह फैसला यात्रियों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। यह बताता है कि रेलवे की परिचालन संबंधी परिस्थितियां अपनी जगह हैं, लेकिन यात्री को जरूरी जानकारी न देना और उसके कारण होने वाली परेशानी भी उपभोक्ता सेवा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकती है।






