श्याम लाल शर्मा/नई दिल्ली/ छाया – आशीष कर
आख़िरकार आज लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने गुजरात लाबी को घुटनों पर ला दिया । जिस मामले को लेकर सदन के अंदर और बाहर विपक्ष का हंगामा होता रहा ,गृहमंत्री अमित शाह पूरे सत्र सदन में नहीं आए, सरकार ने नहीं माना कि पैलट गन चली जबकि आर.ए.एफ. के कमांडेंट ने अपनी नोट में लिखा कि पैलेट गन चली।पर राहुल गांधी के मैदान में आने के बाद गृह मंत्रालय की सहमति लेकर दिल्ली पुलिस को न न करते करते अंततः पैलेट गन के मामले में प्राथमिकी (एफ.आई.आर) करनी पड़ी।
जंतर-मंतर आंदोलन के युवाओं पर पिछले 20 जुलाई को जिस तरह का जुल्मो-सितम ढाया गया उसका मामला आज फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया. उस दिन बेहद खतरनाक ‘पैलेट गन’ से कई युवा घायल हुए थे. उन युवाओं में एक थे-20 साल के साहिल लोचब! जो पिछले कई दिनों से प्राथमिकी (एफ.आई.आर) दर्ज कराना चाह रहे थे लेकिन पुलिस प्राथमिकी (एफ.आई.आर) नहीं दर्ज कर रही थी, लेकिन आज जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी साहिल लोचब को लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुँचे तो उनसे भी पुलिस ने प्राथमिकी (एफ.आई.आर) दर्ज करने से मना कर दिया तो राहुल गांधी पार्लियामेंट थाना परिसर में धरने पर बैठ गये जिसे देखकर पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। अगर राहुल गांधी इस मामले में दख़लंदाज़ी ना करते तो पुलिस साहिल लोचब का एफ.आई.आर हरगिज नहीं लिखती! पर राहुल गांधी के मैदान में आने के बाद गृह मंत्रालय की सहमति लेकर दिल्ली पुलिस ने अंतत: एफ आई आर दर्ज करना पड़ा ! राहुल गांधी का कहना था कि साहिल के शरीर में 200 छर्रे हैं. एक आंख चली गई है. पुलिस कह रही है कि उसने पैलेट गन नहीं चलाये तो क्या किसी और ने चलाये! फिर किसने चलाये? उनके शरीर में पैलेट गन के छर्रे तो हैं. ऐसी स्थिति में ‘आपराधिक कर्म’ तो हुआ है. ऐसी स्थिति में यह जांच-पड़ताल का विषय है. राहुल गांधी का कहना है: ‘अपराध हुआ है तो इसकी पड़ताल के लिए साहिल एफआईआर दर्ज कराने की बार-बार कोशिश कर चुके हैं. पर पुलिस ने अब तक ऐसा नहीं किया. इसीलिए हम सब साहिल को लेकर यहां आये हैं!’
राहुल गांधी के साहसिक नेतृत्व के खाते में यह एक और उपलब्धि है. गृह मंत्रालय को इस मुद्दे पर पीछे हटना पड़ा और दिल्ली पुलिस को एफ आई आर दर्ज करने का निर्देश दिया गया. एफ आई आर की मांग को लेकर राहुल गांधी आज साहिल लोचब की मां और उनके वकील के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर पहुँचे लेकिन पुलिस ने जब एफ आई आर लिखने से मना कर दिया तो राहुल गांधी वहीं पार्लियामेंट थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गये ।जैसे ही यह जानकारी मिली बवाल मच गया. प्रियंका गाँधी, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सुप्रिया श्रीनेत्र कुछ ही देर के अंदर वहां पहुँच गए और उस इलाके में चारों तरफ कांग्रेस के कार्यकर्ता आ गये जिससे धरना बहुत विशाल हो गया. ऐसा लगता है हालात को देखते हुए शासन ने अपना रवैया बदला.
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 118 और 125 लगाई हैं। BNS की धारा 118: खतरनाक हथियार या साधन का इस्तेमाल कर जानबूझकर किसी व्यक्ति को चोट या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है। BNS की धारा 125: ऐसा लापरवाही या उतावलेपन वाला कृत्य, जिससे किसी व्यक्ति की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ती हो, इस प्रावधान के दायरे में आता है। हालांकि, FIR में किसी पुलिसकर्मी या किसी अन्य व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। FIR अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई है। इसका मतलब है कि जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाएगी कि साहिल को चोट कैसे लगी, कथित पैलेट गन का इस्तेमाल किसने किया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।









