चेन्नई। चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी का असर अब चेन्नई के खाद्य और पेय कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर की बेकरी, जूस की दुकानों और मिठाई कारोबार से जुड़े छोटे-बड़े व्यापारियों के सामने लागत बढ़ने की चुनौती खड़ी हो गई है। त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि इस दौरान मिठाइयों, केक, पेस्ट्री, जूस और अन्य मीठे उत्पादों की मांग आम दिनों की तुलना में अधिक रहती है। व्यापारियों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अलंदूर क्षेत्र के एक बेकरी संचालक ने बताया कि 25 किलो चीनी की बोरी, जो कुछ समय पहले करीब 1,000 रुपये में मिल रही थी, अब लगभग 1,500 रुपये तक पहुंच गई है। यानी एक बोरी पर करीब 500 रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी छोटी नहीं है, क्योंकि बेकरी और मिठाई उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चे माल में शामिल है।
केक और मिठाइयों के दाम बढ़ाने की तैयारी ?
बेकरी कारोबारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण आने वाले दिनों में केक और मिठाइयों की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं किया गया है कि अलग-अलग उत्पादों पर कितनी वृद्धि की जाएगी। कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ी हुई पूरी लागत ग्राहकों पर डालने से बिक्री प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, जूस और पेय पदार्थ बेचने वाले दुकानदार भी बढ़ी हुई चीनी कीमतों से प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में जहां पेय पदार्थों की मांग अधिक रहती है, वहीं त्योहारों के दौरान भी कई दुकानों पर मीठे पेय और अन्य उत्पादों की बिक्री बढ़ जाती है। ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ना सीधे तौर पर कारोबार के मुनाफे को प्रभावित कर रहा है। चाय की दुकानों और कुछ कैफे संचालकों ने फिलहाल कीमतें बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त लागत खुद वहन करने का निर्णय लिया है। कारोबारियों का मानना है कि त्योहारों से पहले चाय, कॉफी और अन्य लोकप्रिय पेय पदार्थों की कीमत बढ़ाने से ग्राहक दूसरी दुकानों का रुख कर सकते हैं। इसलिए कई दुकानदार कुछ समय तक अपने मार्जिन को कम करके कारोबार चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है चुनौती ?
त्योहारी सीजन बेकरी और मिठाई कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान केक, मिठाई और अन्य मीठे उत्पादों की मांग बढ़ती है। यदि चीनी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कारोबारियों के पास उत्पादों के दाम बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प रह जाएंगे। हालांकि, व्यापारियों के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा। एक तरफ उत्पादन लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ ग्राहकों की कीमत को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है। ऐसे में कारोबारी कीमतों में बहुत अधिक बढ़ोतरी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से संशोधन करने पर विचार कर सकते हैं।
फिलहाल चेन्नई के खाद्य और पेय कारोबार की नजर चीनी की कीमतों पर बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में कीमतों में राहत नहीं मिलती है, तो इसका असर बेकरी उत्पादों, मिठाइयों और पेय पदार्थों के खुदरा दाम पर दिखाई दे सकता है। त्योहारी मांग और बढ़ती लागत के बीच कारोबारियों के लिए सही संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।






