नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिए जाने के बीच दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इससे उनकी बाइक या स्कूटर के माइलेज पर कितना असर पड़ेगा। अब हीरो मोटोकॉर्प के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसको लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। कंपनी का कहना है कि एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल से दोपहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है। वाहन निर्माता लगातार ऐसी तकनीक और इंजन दक्षता पर काम कर रहे हैं, जिससे एथेनॉल के कम ऊष्मीय मान की भरपाई की जा सके। हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर-इंडिया आशुतोष वर्मा के मुताबिक, एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसका मतलब है कि समान मात्रा में एथेनॉल से पेट्रोल के मुकाबले कम ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में सामान्य तौर पर ईंधन की खपत बढ़ने की आशंका हो सकती है। लेकिन ऑटोमोबाइल कंपनियां इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और वाहन की ओवरऑल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही हैं।
कंपनियां बढ़ा रही हैं इंजन और फ्यूल एफिशिएंसी ?
दोपहिया वाहन निर्माता अब केवल इंजन की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कराने वाली तकनीक पर भी जोर दिया जा रहा है। इंजन की ट्यूनिंग, बेहतर फ्यूल मैनेजमेंट, हल्के वाहन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए ईंधन दक्षता को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण संभावित माइलेज प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।
भारत में वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की दिशा में एथेनॉल एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आया है। इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर उत्पादित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए वाहनों को बदलते ईंधन मिश्रण के अनुरूप तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। आशुतोष वर्मा ने दोपहिया वाहन उद्योग के सामने मौजूद दूसरी बड़ी चुनौती का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बाजार की मांग में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कोविड-19 महामारी सहित कई घटनाओं ने ऑटोमोबाइल बाजार को प्रभावित किया, जिससे कंपनियों के लिए भविष्य की मांग का अनुमान लगाना आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल और 2026 में उद्योग का माहौल सकारात्मक रहा है। ऐसे समय में कंपनियों के लिए बाजार की दिशा को समझना, सही समय पर निवेश करना और भविष्य की जरूरतों के लिए खुद को तैयार करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
डिजिटल बदलाव को अवसर मान रहा ऑटो सेक्टर ?
ऑटोमोबाइल उद्योग में तेजी से हो रहा डिजिटलीकरण भी कंपनियों के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है। ग्राहक अब वाहन खरीदने से पहले ऑनलाइन रिसर्च, कीमतों की तुलना और डिजिटल माध्यमों से जानकारी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में वाहन कंपनियों और डीलरों को भी अपनी बिक्री और ग्राहक सेवा व्यवस्था को डिजिटल जरूरतों के अनुरूप ढालना पड़ रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन को लेकर दोपहिया वाहन ग्राहकों की सबसे बड़ी चिंता माइलेज को लेकर है। हीरो मोटोकॉर्प के अधिकारी के बयान से संकेत मिलता है कि निर्माता तकनीकी सुधारों के जरिए इस चुनौती को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में बेहतर इंजन तकनीक, ईंधन दक्षता और डिजिटल सेवाओं का संयोजन भारतीय दोपहिया बाजार को एक नए दौर में ले जा सकता है।






