नई दिल्ली। भारत में स्टील की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है। हालिया बाजार रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में घरेलू स्टील कीमतों में करीब ₹3,500 प्रति टन तक की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। कीमतों में संभावित तेजी के पीछे कच्चे माल की लागत, कोकिंग कोल के बढ़ते दाम, मानसून के बाद मांग में सुधार और घरेलू बाजार में सीमित आपूर्ति जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। हाल के महीनों में भारतीय स्टील बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जून और जुलाई में हॉट-रोल्ड कॉइल यानी HRC की कीमतों में कुछ नरमी आई थी, लेकिन अगस्त से सितंबर की शुरुआत के बीच कीमतों में करीब ₹4,000 प्रति टन की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद HRC की कीमतें लगभग चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। अब बाजार विशेषज्ञों को निकट अवधि में इसमें और लगभग ₹3,500 प्रति टन की बढ़ोतरी की संभावना नजर आ रही है।
कोकिंग कोल की बढ़ती लागत बनी बड़ी वजह ?
स्टील उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की लागत बढ़ने का सीधा असर कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में स्टील निर्माता बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा कुछ स्टील मिलों में रखरखाव के कारण उत्पादन प्रभावित होने से बाजार में उपलब्धता पर भी दबाव बना हुआ है। दूसरी तरफ, मानसून के बाद निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमोबाइल सेक्टर से स्टील की मांग में सुधार की उम्मीद है। मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने की स्थिति में कीमतों को आगे समर्थन मिल सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान भारत मात्रा के लिहाज से तैयार स्टील का शुद्ध आयातक रहा। इस अवधि में तैयार स्टील का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 36.6 प्रतिशत बढ़ा। जुलाई में भी भारत शुद्ध आयातक बना रहा और तैयार स्टील की घरेलू खपत में सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आयात में बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा चीन से आने वाले स्टील का है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल-जुलाई अवधि में तैयार स्टील आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत रही। बढ़ता आयात घरेलू स्टील कंपनियों के लिए चुनौती भी बन सकता है, क्योंकि इससे उनकी कीमत बढ़ाने की क्षमता सीमित हो सकती है।
घरेलू कंपनियों पर क्या होगा असर?
अगर आने वाले हफ्तों में स्टील की कीमतों में वास्तव में ₹3,500 प्रति टन तक की बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर निर्माण कंपनियों, ऑटोमोबाइल उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और स्टील का इस्तेमाल करने वाले अन्य कारोबारों की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि कीमतों में तेजी की राह पूरी तरह आसान नहीं है। बढ़ता विदेशी आयात, खासकर चीन से आने वाला स्टील, घरेलू कंपनियों की मूल्य निर्धारण क्षमता पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा वैश्विक कमोडिटी कीमतों और मांग में बदलाव भी भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल संकेत स्टील कीमतों के लिए सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं। महंगे कोकिंग कोल, मानसून के बाद संभावित मांग में सुधार और कुछ क्षेत्रों में सीमित आपूर्ति कीमतों को ऊपर ले जा सकती है। हालांकि आयात में तेज वृद्धि इस तेजी को सीमित कर सकती है। इसलिए आने वाले हफ्ते भारतीय स्टील बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि घरेलू मांग मजबूत होती है और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो ₹3,500 प्रति टन तक की संभावित तेजी का अनुमान बाजार में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।






