back to top

UPI बना भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, दो विदेशी ऐप्स की हिस्सेदारी अब भी बड़ी ?

Must Read

नई दिल्ली: भारत का Unified Payments Interface यानी UPI देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की रीढ़ बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार और ऑनलाइन सेवाओं तक, QR कोड और UPI भुगतान रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन UPI की इस विशाल व्यवस्था में बाजार हिस्सेदारी को लेकर एक अलग चुनौती भी सामने आती रही है।

UPI ट्रांजैक्शन में PhonePe और Google Pay की संयुक्त हिस्सेदारी लंबे समय तक 80% से अधिक रही है। हालांकि 2026 में इसमें कुछ कमी आई है। मई 2026 के NPCI आंकड़ों के अनुसार दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 79% रही थी। PhonePe की हिस्सेदारी 46.3% और Google Pay की 32.7% थी।

एक ऐप की हिस्सेदारी 30% तक सीमित करने का नियम ?

UPI में किसी एक थर्ड-पार्टी ऐप के अत्यधिक प्रभाव को कम करने के लिए NPCI ने 30% मार्केट-शेयर कैप का प्रावधान किया था। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम में अत्यधिक एकाग्रता से जुड़े जोखिम को कम करना और सिस्टम को अधिक संतुलित बनाना था। NPCI के दस्तावेजों में इस व्यवस्था को concentration risk कम करने से जोड़ा गया है। हालांकि, इस नियम के लागू होने की समयसीमा कई बार आगे बढ़ाई गई है। वर्तमान समयसीमा 31 दिसंबर 2026 है।

PhonePe और Google Pay के सामने बड़ी चुनौती ?

30% सीमा लागू होने पर सबसे ज्यादा असर उन ऐप्स पर पड़ सकता है जिनकी मौजूदा हिस्सेदारी इस सीमा से ऊपर है। इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा उपयोगकर्ता अचानक इन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। नियम मुख्य रूप से बाजार हिस्सेदारी की सीमा और भविष्य की वृद्धि से संबंधित है। दूसरी ओर, छोटे UPI ऐप्स के लिए बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर बन सकता है। Paytm, Navi, Super.money, WhatsApp Pay और अन्य कंपनियां अलग-अलग ग्राहक वर्गों और ऑफर्स के जरिए अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

UPI का पैमाना लगातार बढ़ रहा है

UPI का कुल लेनदेन लगातार बड़े स्तर पर पहुंच रहा है। NPCI के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रहा। इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में किसी एक या दो ऐप पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर नियामकीय स्तर पर चिंता समझी जा सकती है। इसी वजह से बाजार हिस्सेदारी को संतुलित करने के लिए 30% कैप जैसी व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

क्या बदल सकता है 31 दिसंबर के बाद?

अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि 31 दिसंबर 2026 के बाद 30% मार्केट-शेयर नियम किस तरह लागू होता है और मौजूदा बड़े ऐप्स अपनी हिस्सेदारी को किस तरह समायोजित करते हैं। इसके साथ ही UPI के भुगतान मॉडल में भी बदलाव आया है। सरकार के नए ढांचे के तहत अधिकांश P2P भुगतान और ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार लगभग 96% P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। UPI अब सिर्फ एक पेमेंट विकल्प नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसके साथ बाजार में प्रतिस्पर्धा और concentration को लेकर नियामकीय चुनौतियां भी बनी हुई हैं। 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा के बाद 30% कैप का वास्तविक प्रभाव UPI ऐप्स के बाजार हिस्से और प्रतिस्पर्धा पर स्पष्ट हो सकता है।

- Advertisement -spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_img
Latest News

गांधी जयंती के दिन अमित शाह की दिल्ली पुलिस का सबसे ज़्यादा अभद्र और अशोभनीय काम- योगेंद्र यादव, संजय सिंह और नेहा वोरा सहित...

श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली/छाया -आशीष कर/आर बी यादव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े को लेकर पूरे देश...
- Advertisement -spot_imgspot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_imgspot_img