श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली/छाया -आशीष कर/आर.बी.यादव

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एस.आई.आर.और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सर्वोच्च न्यायाधीश से मिलने के लिए एक आवाज दी “ चलो दिल्ली” तो दिल्ली में एक विशाल जन समूह उमड़ पड़ा।यह भीड़ नही है, वह जन सैलाब था जो वोट चोरों की नींद उड़ाने के लिए काफ़ी था।यह जन सैलाब, जिसमें देश का हर रंग शामिल है , जिसमें सबकी आवाज़ें शामिल हैं, जिन्हें देश की फिक्र है और यही हमारा असली देश है।सर्वोच्च न्यायालय तक यह मार्च, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, और इंडिया गठबंधन के नेताओं की अगुवाई में बस में सवार होकर, जिसमे नेहा बोरा योगेंद्र यादव जैसे लोग भी मौजूद थे ! जब यह काफिला मंडी हाउस की ओर आगे बढ़ा तो बाराखंभा रोड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हजारों की भीड़, उमड़ पड़ी। अपने वोट के अधिकार को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन देने के लिए उमड़ा यह जन सैलाब विपक्षी इंडिया गठबंधन का ही नहीं आम जन सैलाब था ..! जो सत्ता को बहा ले जाने के लिए काफ़ी था।
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालने से पहले कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी हमारे संपर्क में हैं जो हमे लगातार सूचनाएं दे रहे हैं। वे सी.बी.आई.,ई.डी. इनकम टैक्स, चुनाव कार्यालय हर जगह से हैं, सरकार डरी हुई है।राहुल ने कहा कि एक दिन हमें पुलिस ने रोका, जंतर-मंतर पर पुलिस ने रोका, आज भी रोकेगी। क्या आपको लगता है कि यह एक दिन की बात है? ये मत सोचिए कि 5 दिन पहले शुरू हुआ था। सालों से हमें रोका जा रहा है, अब दिख रहा है। उन्होंने कहा कि आप सोच रहे हो कि हमारे लिए मुश्किल है। पुलिस हमें मार रही है। जितना आप थक रहे हैं, उतनी पुलिस थक रही है। पुलिस कह रही है कि हम ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रहे हैं। पेशेंस और पर्सीवरेंस, लगे रहना है। हम करेंगे, वे रोकेंगे, हमें लगे रहना है। जितने दिन लगेंगे, एक महीने, दो महीने, साल…हम पीछे नहीं हटेंगे।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने से पहले राहुल गांधी ने 40 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। संवाददातों को संबोधित करते हुए कहा सरकार ने दिल्ली को जेल बना दिया गया है। ये पुलिस वाले डिस्टर्ब हैं। ये कह रहे हैं कि हमसे युवाओं को क्यों पिटवाया जा रहा है। वे कह रहे हैं कि युवाओं को रोकने को कहा जा रहा है। आर.एस.एस. के गुंडे महिलाओं को मार रहे हैं। एक तरफ हमसे कहा जा रहा है कि पैलेट गन चलाइए।उन्होंने यह भी कहा, “50 फीसदी पुलिसकर्मी हमें बता रहे हैं कि हम जो कर रहे हैं वह सही है और हमें इसे जारी रखना चाहिए। पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, भारत की जनता एक तरफ हैं और नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोवाल, ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के 4-5 सदस्य जो ‘वोट चोरी’ में मदद कर रहे हैं और देश को हाईजैक कर रहे हैं, दूसरी तरफ हैं। हम इस विभाजन को और बढ़ा रहे हैं…।”
राहुल ने कहा- ये हिंदुस्तान की जनता महत्वपूर्ण हैं। देश के हर युवा से कह रहा हूं कि ये आपके फ्यूचर, आपकी इज्जत की लड़ाई है। अगर आप नहीं आ सकते तो शाम को जब सुप्रीम कोर्ट के सामने होंगे, तब हमें सॉलिडेरिटी दिखाइए। जिस भी तरीके से ये कर सकते हैं, अपना एक्सप्रेशन करिए। बताइए कि जो हो रहा है, हम उसके खिलाफ हैं। हम ये नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मार्च शिवजी की बारात की तरह है, इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। जिसको भी आना हो जिसको लग रहा है संविधान को कुचला जा रहा है जो संविधान बचाना चाहता है आ सकता है। अगर आप नहीं आ सकते तो 3 बजे आप जैसे चाहते हों देश को बताइए। देश को बचाइए। डरने की कोई जरूरत नहीं। इनका पूरा ढांचा चरमरा रहा है।
एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि लोग चुनाव आयोग की बात करते हैं, आप सीधा ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हैं। क्या कभी उन्होंने आपसे बात करने की कोशिश की? इस पर राहुल ने कहा- हां उनके मैसेज आते हैं , मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे बात करने की कई बार कोशिश की है। ज्ञानेश कुमार यह प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं आप अपराधी नहीं है, आपसे बस करवाया गया है। सबसे आसान रास्ता है कि आप इस्तीफा दें और रास्ते से हट जाएँ।
रविवार को विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखा था और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। लेकिन हमें समय नहीं मिला.
अखिलेश यादव ने कहा- आंदोलन और धरना जारी रहेंगे। लोकतंत्र को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। BJP, चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। वह हमेशा सत्ता में बने रहना चाहती है। वे फर्जी वोटर लिस्ट बनाते हैं, फर्जी वोट डालते हैं और चुनाव के नतीजे तैयार करते हैं।
सरकार प्रदर्शन की जगह बदलकर खुद को नहीं बचा सकती और न ही प्रदर्शन स्थल बदलने से कथित गड़बड़ियां छिप सकती हैं। हम लोकतंत्र के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। संघर्ष जारी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर हमला करते हुए दावा किया कि उन्हें उनसे संदेश मिल रहे हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से सरकारी पक्ष का साथ छोड़कर ‘अप्रूवर’ बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को सामने आकर सच्चाई बतानी चाहिए।
इसी बीच, राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है। विपक्ष की योजना सोमवार दोपहर 3 बजे के आसपास शीर्ष अदालत में अपनी मांगें रखने की है। गठबंधन की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) पर रोक शामिल हैं।
राहुल गांधी ने अपने बयान में संकेत दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पास चुनावी प्रक्रिया से जुड़े ऐसे तथ्य हो सकते हैं, जिनका खुलासा होना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ज्ञानेश कुमार की ओर से संदेश मिल रहे हैं और उनसे कहा कि अगर उन्हें पूरी जानकारी है, तो उन्हें सामने आकर सच बताना चाहिए। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से ‘अप्रूवर’ बनने का आग्रह किया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में हैं और हमे जानकारी दे रहे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहता हूं कि आपकी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में हैं; वे हमें जानकारी दे रहे हैं।” राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग से हमें बराबर सूचनायें मिल रही हैं। ईडी, सीबीआई, विदेश मंत्रालय के अधिकारी हमारे संपर्क में हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का संरक्षण कर रही है और दावा किया कि विपक्ष के पास मुख्य चुनाव आयुक्त के आचरण के बारे में जानकारी है। राहुल ने आरोप लगाया कि कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और उद्योगपति गौतम अडानी के दबाव में काम किया। उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि आप पर प्रधानमंत्री, अमित शाह, डोवाल और अडानी का दबाव है। हम यह जानते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष कुमार पर पड़ रहे दबाव को समझता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जाता, चुनावी प्रणाली में सुधार नहीं किया जाता और न्याय नहीं मिलता। राहुल ने कहा, “हम रुकने वाले नहीं हैं,” और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की अपनी मांग को दोहराया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कानूनी टीम ने भारतीय चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल की । याचिका को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज कर लिया गया है और इसका डायरी नंबर 64196/2026 है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह याचिका 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4:37 बजे फाइल की गई। फिलहाल इसकी स्थिति लंबित दिख रही है और इसका केस नंबर डब्ल्यू है.पी.(सी) नंबर के तहत दर्ज हुआ है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
यह याचिका अकेले राहुल गांधी की नहीं, बल्कि विपक्षी इंडिया गठबंधन के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए. बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना एस. – 2919 इस मामले में पैरवी कर रहे हैं। याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) है, जबकि अन्य तीन प्रतिवादी चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।
सूत्रों के अनुसार, याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि याचिका की पूरी कॉपी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें हाल के चुनावों में हुई कथित अनियमितताओं, वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण इसे अर्जेंट हियरिंग के तौर पर मंगलवार को सुनवाई के लिए लगाया जा सकता है। बता दें कि राहुल गांधी पहले भी चुनाव आयोग पर कथित ‘वोट चोरी’ और पक्षपात के आरोप लगाते रहे हैं। अब इस कानूनी लड़ाई के जरिए विपक्ष ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे इस मामले पर सबकी नजरें टिकी हैं।
राहुल गांधी — कांग्रेस (INC)
मल्लिकार्जुन खड़गे — कांग्रेस (INC)
सौगत राय — तृणमूल कांग्रेस (TMC)
अखिलेश यादव — समाजवादी पार्टी (SP)
तेजस्वी प्रसाद यादव — राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
संजय राउत — (शिवसेना UBT)
एम. ए. बेबी — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M)
डी. राजा — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)
महुआ माझी — झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
सुप्रिया सुले — राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (NCP-SP)
ई. टी. मोहम्मद बशीर — इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)







