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मोबाइल असेंबलिंग से चिप मैन्युफैक्चरिंग तक भारत की बड़ी तैयारी, चीन पर निर्भरता होगी कम; Semicon 2.0 से बदलेगी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ?

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भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। अभी तक दुनिया में भारत को बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन असेंबल करने वाले देशों में गिना जाता रहा है, लेकिन सरकार का लक्ष्य अब इससे आगे बढ़ना है। आने वाले समय में भारत मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स, सेमीकंडक्टर चिप और जरूरी कच्चे माल का उत्पादन भी देश में बढ़ाना चाहता है।

इसी रणनीति के तहत केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक और कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को Semicon 2.0 वेब एप्लिकेशन पोर्टल लॉन्च किया। इस पहल को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है Semicon 2.0 और क्यों है महत्वपूर्ण?

Semicon 2.0 पहल का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, निवेश और विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देना है। सेमीकंडक्टर चिप आज लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, सर्वर, टेलीकॉम नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक मशीनों में इन चिप्स का इस्तेमाल होता है। ऐसे में सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। नए पोर्टल के माध्यम से इस क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों और योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी ?

वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में चीन की बड़ी भूमिका है। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई कंपोनेंट्स और कच्चे माल के लिए वैश्विक कंपनियां एशियाई सप्लाई नेटवर्क पर निर्भर हैं।

भारत इस निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना चाहता है। इसके लिए सरकार घरेलू स्तर पर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है। अगर देश में ही जरूरी पार्ट्स का उत्पादन बढ़ता है, तो विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे घरेलू कंपनियों को भी नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे। हालांकि, चीन पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े निवेश, आधुनिक तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करना जरूरी होगा।

ECMS योजना में SME और MSME की बड़ी भागीदारी

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू Electronics Components Manufacturing Scheme (ECMS) भी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस योजना के तहत मंजूर की गई आधी यूनिट्स छोटी और मझोली कंपनियों यानी SME और MSME से संबंधित हैं।

यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग केवल बड़ी कंपनियों के भरोसे विकसित नहीं हो सकता। इसके लिए छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं की भी अहम भूमिका होती है। MSME कंपनियां मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य तकनीकी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न कंपोनेंट्स का निर्माण कर सकती हैं। इससे देश में स्थानीय सप्लायर नेटवर्क मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

भारत के लिए खुलेंगे नए अवसर ?

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद कर सकता है। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होने, तकनीकी कौशल विकसित होने और घरेलू कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावनाएं हैं। इसके अलावा, चिप डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, मशीनरी, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।

क्या भारत बन पाएगा ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब?

भारत के सामने अभी कई चुनौतियां हैं। सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन के लिए भारी पूंजी निवेश, अत्याधुनिक मशीनें, कुशल इंजीनियर, विश्वसनीय बिजली और पानी की आपूर्ति तथा मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम की जरूरत होती है।

हालांकि, सरकार की विभिन्न योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी से इस दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। कुल मिलाकर, Semicon 2.0 और ECMS जैसी पहल भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। सरकार का लक्ष्य केवल मोबाइल फोन असेंबल करना नहीं, बल्कि चिप से लेकर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स तक पूरी विनिर्माण श्रृंखला को देश में विकसित करना है। यदि ये प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है।

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