भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC आने वाले वर्षों में अपने एक्सप्लोरेशन और उत्पादन कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है। कंपनी का फोकस अब सिर्फ मौजूदा तेल-गैस क्षेत्रों पर नहीं, बल्कि समुद्र की गहराई में मौजूद संभावित भंडार और विदेशों में चल रही परियोजनाओं पर भी बढ़ रहा है। हालिया योजना के मुताबिक ONGC अगले पांच वर्षों में डीप-वॉटर और अल्ट्रा-डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन पर करीब ₹1 लाख करोड़ का निवेश करने की तैयारी में है। इस दौरान मार्च 2031 तक 87 डीप-वॉटर और अल्ट्रा-डीप-वॉटर कुओं की ड्रिलिंग का लक्ष्य बताया गया है।
मोजाम्बिक प्रोजेक्ट बनेगा बड़ा ग्रोथ इंजन ?
ONGC की विदेशी ऊर्जा रणनीति में मोजाम्बिक का गैस प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक परियोजना पर गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और उत्पादन 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट से ONGC को शुरुआती चरण में लगभग 3 मिलियन टन गैस का हिस्सा मिलने की संभावना बताई गई है। परियोजना के आगे के चरण भी विकसित किए जा सकते हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन क्षमता और बढ़ सकती है मोजाम्बिक में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं और देश को आने वाले वर्षों में LNG के बड़े निर्यातक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि क्षेत्र में सुरक्षा और निर्माण से जुड़ी चुनौतियां रही हैं, लेकिन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।
मैंगलोर में बनेगा रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार ?
घरेलू स्तर पर ONGC की एक और अहम योजना मैंगलोर में 1.75 मिलियन टन क्षमता वाला रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार करना है। कंपनी इस परियोजना में करीब ₹7,000 करोड़ निवेश करेगी। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव या सप्लाई में किसी तरह की बाधा आने पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
भारत अपनी बड़ी कच्चे तेल आयात जरूरतों के कारण वैश्विक बाजार की परिस्थितियों से प्रभावित होता है। ऐसे में अतिरिक्त रणनीतिक भंडारण क्षमता देश को आपात स्थिति में कुछ समय तक सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकती है।
ग्लोबल ट्रेडिंग कारोबार में भी उतरने की तैयारी ?
ONGC अपनी गतिविधियों को सिर्फ तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी विदेश में एक नई ट्रेडिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए दुबई या सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा केंद्रों पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित इकाई संयुक्त उद्यम के जरिए काम कर सकती है और ONGC समूह के अलावा तीसरे पक्ष के तेल, रिफाइंड उत्पादों और गैस की ट्रेडिंग भी कर सकती है। कुल मिलाकर ONGC की नई रणनीति तीन प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित दिखाई देती है—भारत में गहरे समुद्र में नई खोज, विदेशों में गैस उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक ऊर्जा कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना। अगर योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो इससे ONGC की उत्पादन क्षमता के साथ-साथ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।






