ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Schaeffler India ने कैलेंडर ईयर 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी ने रेवेन्यू और मुनाफे, दोनों में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की। कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों के मुताबिक, उसका परिचालन से शुद्ध राजस्व 27.4% बढ़कर ₹3,005.8 करोड़ पहुंच गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा बढ़कर करीब ₹370.4 करोड़ रहा।
रेवेन्यू में 27.4% की सालाना बढ़ोतरी ?
Schaeffler India का जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में परिचालन से राजस्व ₹3,005.8 करोड़ रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह लगभग ₹2,360.1 करोड़ था। इस तरह कंपनी ने सालाना आधार पर मजबूत वृद्धि दर्ज की। पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के मुकाबले भी राजस्व में 12.1% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक, घरेलू कारोबार और निर्यात दोनों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। ऑटोमोबाइल सेक्टर से मांग और औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती ने प्रदर्शन को सहारा दिया।
₹370 करोड़ के पार पहुंचा मुनाफा ?
कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा तीसरी तिमाही में करीब ₹370.4 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के लगभग ₹306.7 करोड़ से ज्यादा है। सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 20.8% की वृद्धि हुई। हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और रुपये में कमजोरी का असर कंपनी के मार्जिन पर पड़ा। सितंबर तिमाही में असाधारण मदों से पहले कर-पूर्व मुनाफा ₹497 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.4% अधिक है। लेकिन कर-पूर्व मुनाफे का मार्जिन घटकर 16.5% रह गया, जबकि एक साल पहले यह 17.5% था।
नौ महीने में भी मजबूत प्रदर्शन ?
जनवरी से सितंबर 2026 की नौ महीने की अवधि में कंपनी का स्टैंडअलोन परिचालन राजस्व 21.4% बढ़कर ₹8,194.2 करोड़ पहुंच गया। इस दौरान शुद्ध मुनाफा करीब ₹1,026.8 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह लगभग ₹868.3 करोड़ था। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने वर्ष के पहले नौ महीनों में भी कारोबार और कमाई में वृद्धि दर्ज की है।
कंपनी के कारोबार को किन क्षेत्रों से मिला सहारा?
Schaeffler India ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, बेयरिंग और औद्योगिक समाधान जैसे क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी के प्रबंधन के अनुसार, घरेलू बाजार में मांग और औद्योगिक उत्पादन में मजबूती के साथ-साथ समूह की अन्य कंपनियों को होने वाले निर्यात से भी कारोबार को समर्थन मिला। कंपनी भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च पर भी काम कर रही है। प्रबंधन ने कैलेंडर वर्ष 2026 में लगभग ₹500 करोड़ के पूंजीगत खर्च का लक्ष्य बताया है।
लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव ?
रेवेन्यू और मुनाफे में वृद्धि के बावजूद कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, ऊर्जा लागत और रुपये की कमजोरी ने मार्जिन पर दबाव बनाया है। कंपनी के प्रबंधन के अनुसार, बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों से कीमतों में संशोधन के जरिए वसूल किया जा चुका है, जबकि शेष हिस्से पर बातचीत जारी है। इसके अलावा, ई-मोबिलिटी कारोबार में उम्मीद से ज्यादा मांग को पूरा करने के लिए इन्वेंट्री बढ़ानी पड़ी। इससे कार्यशील पूंजी और नकदी प्रवाह पर भी असर पड़ा है।
क्या शेयर में आगे भी जारी रहेगी तेजी?
कंपनी के नतीजे मजबूत रहे हैं, लेकिन केवल अच्छे तिमाही परिणामों के आधार पर शेयर में आगे की तेजी की गारंटी नहीं दी जा सकती। निवेशकों को कंपनी के वैल्यूएशन, मार्जिन, नकदी प्रवाह, ऑर्डर बुक और भविष्य की मांग पर भी नजर रखनी चाहिए। Schaeffler India ने सितंबर 2026 तिमाही में रेवेन्यू और मुनाफे में अच्छी सालाना वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, बढ़ती लागत और मार्जिन पर दबाव ऐसे कारक हैं, जिन पर आने वाली तिमाहियों में नजर रखना जरूरी होगा। किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के आधिकारिक नतीजों और जोखिमों का आकलन करना चाहिए।






