भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े कारोबार तक, आज UPI भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। इसी बीच UPI से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर IIT बॉम्बे की एक स्टडी चर्चा में है। इस अध्ययन में डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत और उससे होने वाली कमाई को बांटने के लिए एक नए फॉर्मूले पर विचार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, MDR की दर 0.40 प्रतिशत से घटाकर 0.08 प्रतिशत किए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इसे अभी अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है MDR और क्यों हो रही है चर्चा?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो कुछ डिजिटल भुगतान लेनदेन के बदले व्यापारी से लिया जाता है। यह शुल्क भुगतान स्वीकार करने, तकनीकी व्यवस्था चलाने और संबंधित वित्तीय सेवाओं की लागत को पूरा करने में मदद करता है।
UPI के मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आम तौर पर व्यक्तिगत UPI भुगतान और पात्र छोटे व्यापारियों के कम मूल्य वाले भुगतानों पर MDR शून्य रहता है। इसलिए 0.40 प्रतिशत से 0.08 प्रतिशत तक की चर्चा को सभी UPI लेनदेन पर लागू होने वाला नया नियम समझना सही नहीं होगा। किसी भी प्रस्ताव का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किन लेनदेन, व्यापारियों और भुगतान सेवाओं पर लागू होता है।
IIT बॉम्बे के नए फॉर्मूले में क्या है खास?
IIT बॉम्बे के प्रोफेसर आशीष दास और भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अधिकारी प्रज्ञा दास की स्टडी ‘UPI at a Crossroads: Reintroducing the MDR – Impact Analysis and the Way Forward’ में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए वैकल्पिक मॉडल सुझाया गया है। इसका उद्देश्य व्यापारियों पर शुल्क का बोझ कम करने के साथ भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए भी उचित व्यवस्था तैयार करना है।
इस अध्ययन की प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित हैं:
- MDR में कटौती: प्रस्तावित दर 0.40 प्रतिशत से घटाकर 0.08 प्रतिशत करने की सिफारिश।
- पेमेंट ऐप्स का हिस्सा: PhonePe और Google Pay जैसे थर्ड-पार्टी ऐप प्रदाताओं के लिए 0.06 प्रतिशत हिस्सेदारी का सुझाव।
- बैंकों की भूमिका: बैंकों को MDR से बड़ा हिस्सा देने के बजाय जमा खातों से होने वाली कमाई का कुछ भाग डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर खर्च करने की सलाह।
- बड़े कारोबारियों की भागीदारी: सालाना 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की व्यवस्था और ऑनलाइन मर्चेंट भुगतान पर उचित फीस लगाने का प्रस्ताव।
कारोबारियों को कितना फायदा हो सकता है?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। यदि किसी पात्र लेनदेन पर 10,000 रुपये की राशि का 0.40 प्रतिशत MDR लागू होता है, तो शुल्क 40 रुपये होगा। वहीं 0.08 प्रतिशत की दर पर यह रकम केवल 8 रुपये होगी। इस तरह, समान आधार पर गणना करने पर शुल्क में 80 प्रतिशत की कमी होगी। हालांकि, यह केवल उदाहरण है। वास्तविक शुल्क और बचत संबंधित नियमों, लेनदेन की श्रेणी तथा लागू छूट पर निर्भर करेगी। छोटे व्यापारियों के लिए कम भुगतान लागत डिजिटल लेनदेन को अपनाना आसान बना सकती है। वहीं भुगतान ऐप कंपनियों को भी अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए टिकाऊ आय मॉडल की जरूरत होगी।
क्या आम UPI यूजर्स को देना होगा चार्ज?
स्टडी का उद्देश्य UPI सिस्टम की फंडिंग व्यवस्था में बदलाव सुझाना है। यह अपने आप कोई नया नियम लागू नहीं करती। ग्राहकों के व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर और पात्र लेनदेन पर लागू छूट को इस प्रस्ताव से अलग समझना जरूरी है।
इसके अलावा, 0.40 प्रतिशत MDR की प्रस्तावित व्यवस्था लागू करने की तारीख में बदलाव की संभावना पर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। इसलिए कारोबारियों और ग्राहकों को अंतिम सरकारी तथा नियामकीय दिशानिर्देशों का इंतजार करना चाहिए। IIT बॉम्बे का यह फॉर्मूला डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत, बैंकों की कमाई और व्यापारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। यदि सरकार और संबंधित नियामक इन सुझावों को स्वीकार करते हैं, तो UPI शुल्क की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, 0.08 प्रतिशत MDR एक सिफारिश है, अंतिम रूप से लागू किया गया नया नियम नहीं।






