देश में एथेनॉल उत्पादन और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अनाज आधारित एथेनॉल निर्माताओं ने केंद्र सरकार से वित्त वर्ष 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए खरीद कीमतों और आपूर्ति नियमों में बदलाव करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से मक्का आधारित एथेनॉल प्लांट्स की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। इसका असर मक्का उत्पादक किसानों की आय पर भी पड़ने की आशंका है। यह मांग ऐसे समय में आई है, जब सरकार ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के आपूर्ति वर्ष में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को गन्ने के रस, चीनी सिरप और B-हेवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं करने का निर्देश दिया है। हालांकि, C-हेवी शीरे से बने एथेनॉल को खरीद के लिए अनुमति दी गई है।
मक्का आधारित एथेनॉल की कीमत में कटौती से नाराजगी ?
ग्रेन एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) ने मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत में कमी को लेकर चिंता जताई है। एसोसिएशन के अनुसार, मक्का से बने एथेनॉल की प्रभावी खरीद कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि एक तरफ मक्का की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ एथेनॉल की खरीद कीमत कम कर दी गई है। इससे उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर कम हो सकता है और कई प्लांट्स के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है।
मक्का की कीमत बढ़ने से किसानों पर भी असर ?
उद्योग के मुताबिक, मक्का की कीमत लगभग 27 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि एक साल पहले यह करीब 18 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
एथेनॉल उत्पादन में मक्का की मांग बढ़ने से किसानों को पहले एक बड़ा बाजार मिला था। अब यदि मक्का आधारित एथेनॉल प्लांट्स को कम ऑर्डर मिलते हैं या उन्हें खरीद कीमत घटानी पड़ती है, तो इसका असर किसानों को मिलने वाले दाम पर भी पड़ सकता है। GEMA का कहना है कि खरीद व्यवस्था में मक्का आधारित एथेनॉल को पर्याप्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, ताकि किसानों और उद्योग दोनों को स्थिर बाजार मिल सके।
चावल आधारित एथेनॉल से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा ?
उद्योग की एक बड़ी चिंता चावल आधारित एथेनॉल की खरीद कीमतों और आपूर्ति को लेकर भी है। मौजूदा टेंडर में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की कीमत 60.32 रुपये प्रति लीटर और खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल की कीमत 64 रुपये प्रति लीटर तय की गई है।
उत्पादकों का मानना है कि कम कीमत पर उपलब्ध चावल आधारित एथेनॉल को अधिक ऑर्डर मिलने से मक्का आधारित उत्पादकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। उद्योग के अनुसार, 2024-25 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में करीब 1.311 करोड़ टन मक्का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ था। इसके मुकाबले लगभग 50 लाख टन टूटे चावल और FCI के अतिरिक्त चावल का इस्तेमाल किया गया था।
सरकार का लक्ष्य 20% एथेनॉल मिश्रण ?
भारत सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से तेल विपणन कंपनियों ने 2026-27 आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। इस टेंडर में मक्का, टूटे चावल, FCI के अतिरिक्त चावल और C-हेवी शीरे से बने एथेनॉल को शामिल किया गया है। वहीं, गन्ने के रस, चीनी सिरप और B-हेवी शीरे से बने एथेनॉल को खरीद से बाहर रखा गया है। सरकार के इस फैसले के पीछे घरेलू चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और चीनी उत्पादन पर दबाव कम करने की चिंता बताई जा रही है।
सरकार से क्या चाहते हैं उत्पादक?
अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादक चाहते हैं कि सरकार मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत की समीक्षा करे और अलग-अलग कच्चे माल से बनने वाले एथेनॉल के लिए संतुलित आपूर्ति नियम तैयार करे।
उनका तर्क है कि यदि मक्का आधारित प्लांट्स को उचित कीमत और पर्याप्त खरीद ऑर्डर नहीं मिलते हैं, तो उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। इससे किसानों के लिए भी मक्का की मांग और बाजार मूल्य प्रभावित हो सकते हैं। एथेनॉल नीति में बदलाव का असर केवल ईंधन उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध किसानों, खाद्यान्न बाजार और चीनी उद्योग से भी है। आने वाले समय में सरकार कीमतों और खरीद नियमों में क्या संशोधन करती है, इस पर एथेनॉल उत्पादकों और मक्का किसानों की नजर रहेगी।






