चौथा अक्षर संवाददाता/ इलाहाबाद
नोएडा में अप्रैल 2026 के श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया है और इस मामले में नोएडा पुलिस प्रशासन की कहानी को “मनगढ़ंत” बताया है. साथ ही अदालत ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। दिलचस्प और सबसे ज्यादा चर्चा कोर्ट के उस निर्देश की है, जिसमें मुआवजे की राशि गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से काटकर देने की बात कही गई है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद नोएडा और गौतमबुद्धनगर के प्रशासनिक हलकों में भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति की रासुका की हिरासत को रद्द कर दिया ।


पुलिस और प्रशासन मिलकर किसी भी आम इंसान को किस कदर फंसा देता है इसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली विश्वविद्यालय की 25 वर्षीय आकृति चौधरी के साथ देखने को मिला जब अप्रैल 2026 में नोएडा हुए मजदूर आंदोलन में शामिल छात्रा आकृति चौधरी पर फर्जी तरीके से रासुका लगाई गई थी । आकृति चौधरी 25 साल की स्टूडेंट एक्टिविस्ट हैं ओर मूल रूप से दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुकी हैं।नोएडा पुलिस ने आकृति चौधरी पर नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान वीडियो बनाने व हिंसा में शामिल होने के आरोप में हिंसा से दो दिन पहले गिरफ्तार किया था। डीएम के आदेश पर छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लगा कर जेल में डाल दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए नोएडा की डीएम व पुलिस को फटकार लगाई और छात्रा को रिहा करने के साथ ही डीएम मेधा रूपम के वेतन से छात्रा को 5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस आदेश को योगी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह आदेश ब्यूरोक्रेसी के लिए भी सबक है जो कानून को ताक पर रखकर राजनीतिक आकाओं को खुश करने लिए गैर कानूनी कार्रवाई करते हैं। नोएडा की डीएम मेधा रूपम भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) में फंसाई गई आकृति चौधरी के पिता अरुण चौधरी ने बताया कि आकृति की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने परिवार के साथ बहुत ही अभद्र व्यवहार किया और जमानत के लिए पहुंचे वकीलों को पुलिस घुमाती रही और आकृति को बदनाम करने के लिए पुलिस उनके कमरे तक गई ? उन्होंने सवाल किया कि गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) क्यों लगाया गया ? पिता का आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लगाने के बाद आकृति को करीब 60 घंटे तक टॉर्चर किया गया. एनएसए लगने के बाद भी जून में उनके खिलाफ 7 एफआईआर दर्ज हुईं. मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर कई तरह के सवाल उठाए ? आरोपों को लेकर कोर्ट ने सबूत मांगे और केस को मनगढ़ंत बताया ? उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है?






