चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
क्या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछना अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि दिल्ली पुलिस महिला पत्रकार की बेरहमी से पिटाई करेगे ? आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ जो हुआ, वह बेहद गंभीर और डराने वाला है. शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई. उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.
अगर एक पत्रकार को सिर्फ इसलिए पीटा जाता है क्योंकि वह मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही है, तो यह मामला सिर्फ शाहीन या 4PM का नहीं है. यह देश की पूरी पत्रकारिता और प्रेस की आजादी का सवाल है. गौरतलब है कि पिछले दिनों 4पीएम ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े मामलों पर लगातार गंभीर सवाल उठाए और खबरें प्रकाशित की थीं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कार्रवाई का उन खबरों और सवालों से कोई संबंध है? और मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध कब से हो गया? पत्रकार का सवाल सत्ता के लिए इतना खतरनाक कब से हो गया? और किसी पत्रकार के नाम में ‘खान’ होना क्या उसके साथ मारपीट की वजह बन सकता है?
सवाल पूछने वाली एक पत्रकार को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जाए कि उसके नाम के आगे ‘खान’ लिखा है, तो यह केवल पुलिसिया ज्यादती नहीं, बल्कि हमारी सोच और समाज के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल है। वर्दी की ताकत किसी की पहचान देखकर नहीं बदलनी चाहिए।
कानून की नजर में इंसान की पहचान उसका धर्म नहीं, उसका अधिकार और संविधान होना चाहिए। जो लोग धर्म देखकर इंसान के साथ व्यवहार करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए भारत किसी एक धर्म का नहीं, हर नागरिक का देश है। शाहीन के साथ जो हुआ, उसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो. घटनास्थल और थाने के CCTV सहित उपलब्ध सभी वीडियो फुटेज तत्काल सुरक्षित किए जाएं. यदि किसी पुलिसकर्मी ने शाहीन के साथ मारपीट या उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर दुर्व्यवहार किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.
इस संदर्भ में 4 पीएम के संपादक संजय शर्मा ने कहा गुस्सा इसलिए कि हमारी पत्रकार शाहीन के आरोप के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की. शाहीन का आरोप है कि थाने में उनका नाम पूछा गया और ‘खान’ सुनने के बाद उनके साथ और बेरहमी की गई. अगर ये आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक पत्रकार के साथ मारपीट का मामला नहीं है. यह सत्ता से सवाल पूछने के संवैधानिक अधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के राज पर गंभीर सवाल है.
लेकिन मुझे अपनी पत्रकार शाहीन पर गर्व है. कथित मारपीट और डराने की कोशिश के बावजूद वह कैमरे के सामने खड़ी हुई और अपनी बात पूरी ताकत से कही.
उन्होंने कहा – शाबाश शाहीन! 4पीएम को तुम पर गर्व है. तुमने बता दिया कि असली पत्रकारिता सत्ता की चौखट पर सिर झुकाने का नहीं, उसकी आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछने का नाम है. और सत्ता से भी साफ कहना चाहता हूं—हमारे सवालों से परेशानी है तो जवाब दीजिए. हमारी खबर गलत है तो तथ्य रखकर उसे गलत साबित कीजिए. लेकिन पुलिस के जरिए पत्रकारों को डराकर सवालों को खामोश करने की कोशिश लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती.
एक शाहीन को डराओगे तो सौ शाहीन सवाल पूछने खड़ी होंगी. एक कैमरा बंद कराओगे तो हजार कैमरे सच रिकॉर्ड करेंगे. एक आवाज दबाओगे तो वही आवाज पूरे देश में गूंजेगी.
इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो. संबंधित CCTV और अन्य उपलब्ध वीडियो फुटेज तत्काल सुरक्षित किए जाएं. और जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो. उन्होंने कहा 4पी एम न झुका है, न बिकेगा, न डरेगा. कलम चलेगी. कैमरा चलेगा. सत्ता से सवाल होते रहेंगे.

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने इसकी तीखी भृत्सना की है । आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को “गुंडागर्दी” और “लोकतंत्र पर हमला” बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डिजिटल समाचार प्रकाशकों की संस्था ‘डिजीपब’ ने भी इस कथित हमले की निंदा की है और मांग की है कि घटना स्थल तथा साकेत पुलिस थाने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सुरक्षित रखा जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
साउथ दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल द्वारा जारी आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के कारण मारपीट के आरोपों को पूरी तरह से झूठा, भ्रामक और निराधार बताया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाओं ने वीवीआईपी (VVIP) रूट पर अपना स्कूटर पार्क करके रास्ते में बाधा खड़ी की थी। बार–बार अनुरोध करने के बाद भी जब उन्होंने वाहन नहीं हटाया, तो सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उन्हें पूछताछ के लिए स्थानीय थाने ले जाया गया था।






