चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
ना जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि आज रात जंतर मंतर पर कुछ बड़ी अनहोनी होने जा रही हैं. सरकार ने सेना की बख्तरबंद गाड़ियों के साथ जंतर मंतर पर छात्रों का शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे नीट परीक्षा लीक के आंदोलन को बल पूर्वक कुचलने का मन बना लिया हैं । इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं , कनाटप्लेस दिल्ली के व्यापार मंडल ने तमाम होटलों और दुकानों को एडवाइज़री जारी करते हुए चेताया है कि…आज शाम 6:30 बजे अपने अपने कारोबार बंद कर दें। यही नहीं आसपास के इलाकों को भी एक तरह से बंद करा दिया गया है. सड़कों पर अपने हक़ और बेहतर भविष्य की आवाज़ उठा रहे युवाओं को सरकार अब ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ बता रही है।पूरा इलाका छावनी में तब्दील करदिया गया है.
गौरतलब है कि जंतर मंतर के आस पास इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं ताकि बिना नेटवर्क और इंटरनेट के जंतर मंतर आंदोलन में आए छात्र युवा एक दूसरे से बात ना कर सकें. यही नहीं कनाटप्लेस दिल्ली के व्यापार मंडल ने तमाम होटलों और दुकानों को एडवाइज़री जारी करते हुए चेताया है कि आज शाम 6:30 बजे अपने अपने कारोबार बंद कर दें। 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस कमिश्नर को NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत बिना ट्रायल लोगों को हिरासत में लेने का फरमान जारी कर दिया गया है। आंदोलनकारियों की जिस तरह 3 स्तर पर घेरा बंदी की गई है जिसमे पहले स्तर पर दिल्ली पुलिस, दूसरे में रैपिड एक्सन फोर्स है और तीसरे स्तर पर शादी वर्दी में पुलिस फोर्स तैनात है ये वही लोग जो 20 जुलाई के दिन छात्रों पर अंधाधुंध लाठियां बरसाई हैं जिन पर पुलिस होने पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने बीती 15 जुलाई को चुपचाप एक राजपत्र जारी किया है। इसके माध्यम से 19 जुलाई से 18 अक्टूबर 2026 की अवधि के दौरान दिल्ली पुलिस कमिश्नर अब निरोध प्राधिकारी (Detaining Authority) की शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।
इसका सीधा अर्थ है कि पुलिस कमिश्नर को किसी को भी नज़रबंद करने का विशेष अधिकार मिल गया है। मसलन वह बिना मुक़दमे/ट्रायल के किसी को भी हिरासत (ग़ैर ज़मानती) में ले सकते हैं और एक बार के आदेश में अधिकतम एक वर्ष के लिए जेल में ले रख सकते हैं।
हालाँकि, हिरासत में लेने के आदेश पर पुलिस को गृह विभाग/उपराज्यपाल से 12 दिनों के भीतर मंजूरी मिलना आवश्यक होगा, जो कि हमने अब तक जैसे हालात देखे हैं, यह औपचारिकता भर होगी!
इसके अलावा निरुद्ध किए गए व्यक्ति का मामला हाईकोर्ट के जजों वाले एक ‘एडवाइजरी बोर्ड’ के सामने भी रखा जा सकता है, जो यह तय करेगा कि नज़रबंदी सही है या नहीं। इसकी भी वस्तु स्थिति आप यूँ समझ सकते हैं जब हाईकोर्ट ने हाल ही में 20 जुलाई की घटना पर टिप्पणी के बाबत यह कहा था कि हमें बीच में न घसीटो।
बहरहाल, मेरे हिसाब से सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन आज के हालातों के मद्देनज़र व्यावहारिक तौर पर यह ‘रोलेट एक्ट:1919’ की तरह है, जिसे बिना अपील, बिना वकील, बिना दलील वाला काला क़ानून कहा गया था। कमिश्नर को यह अधिकार एक बार में अधिकतम तीन माह के लिए ही दिया जा सकता है। लिहाज़ा, बहुत संभावना है कि उनको यह शक्तियाँ आगे भी निरंतर जारी रहे। घटनाक्रम: 15 जुलाई को राजपत्र आया, 17 जुलाई को नया पुलिस कमिश्नर और 19 जुलाई से उसे ये विशेषाधिकार दिया गया।
स्वतंत्रता सेनानी बनने का मौक़ा आ गया है। एनएसए में बंद होंगे आंदोलनकारी। बिना किसी मुक़दमे, बिना किसी आरोप के, साल भर तक जेल में बंद रखने का अधिकार दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को गृह मंत्रालय द्वारा दे दिया गया है।
इन लोगों को पता नहीं है, अबकी जेन्युइन छात्र मैदान में हैं। ये असीमित हैं। कितनों को जेलों में भरोगे? जेलें कम पड़ जाएँगी। वैसे भी साल भर तक मुफ़्त भोजन तोड़ने का यह ऑफ़र ख़राब नहीं है। लड़कों को नौकरी नहीं मिली तो क्या, सरकार साल भर तक मुफ़्त भोजन, चिकित्सा, निवास, योग, लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स की व्यवस्था तो करने ही जा रही है। भले जेल में ही सही!
यह जेनजी है। इन्हें हर मुश्किल मौके को मस्ती की पाठशाला में कन्वर्ट करना खूब आता है। मोदी–शाह ने अबकी ग़लत पंगा ले लिया है। जैसे किसानों से लिया था और फिर झुकना पड़ा। ये छात्र–छात्राएँ दमन से नहीं, प्यार और तर्क से मानेंगे। जितनी देर करोगे, उतनी क्रेडिबिलिटी लूज़ करोगे।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के खिलाफ कार्रवाई की कोई योजना नहीं है। पुलिस ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावों को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख ने दावा किया था कि सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
पुलिस ने ‘आप’ नेता के दावे के जवाब में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘जैसा कि बताया जा रहा है, आज रात विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई करने की दिल्ली पुलिस की कोई योजना नहीं है। आपको (केजरीवाल) सलाह दी जाती है कि किसी भी भ्रामक/असत्यापित जानकारी को फैलाने या प्रसारित करने से बचें।’
इससे पहले दिन में, केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘आज शाम 6:30 बजे तक कनॉट प्लेस में सभी दुकानें बंद करने का आदेश और कड़ी सुरक्षा ! एम्बुलेंस की कतारें ! क्या केंद्र सरकार आज एक बार फिर जंतर-मंतर पर अपने छात्रों पर हमला कराएगी?’
अगर देश का पढ़ने-लिखने वाला युवा ही “एंटी-नेशनल” और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है, तो यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है कि देश में इतने ‘खतरे’ पैदा कैसे हो गए? उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए!
बिना वकील, बिना दलील 1 साल जेल में सड़ाने की यह बेलगाम ताकत देश की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि तानाशाही के दम पर छात्रों के आंदोलन और उनकी बुलंद आवाज़ को कुचलने के लिए दी गई है!
अजीत अंजुम और श्याम मीरा सिंह की रिपोर्ट्स बता रही हैं कि बहुत सारे ऐसे लोग आंदोलन में आ गए हैं जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं है। काक्रोच जनता पार्टी से ख़ुद का कोई संबंध न बताने वाले ढेर सारे लोग संसद मार्ग पर जमा हो चुके हैं जिसे भिन्न भिन्न सुरक्षा बलों के कई लेयर घेरे हुए है। कॉक्रोच जनता पार्टी का कहना है कि उनके लोग जंतर मंतर पर हैं। संसद मार्ग पर जो लोग हैं उनसे उनका वास्ता नहीं है। कुल मिलाकर स्थिति चिंताजनक है और छोटी सी लापरवाही या चिंगारी एक बड़े कांड का रूप ले सकती है। इससे देश का नुक़सान होगा। छात्र आंदोलन के असली मुद्दे और मक़सद का नुक़सान होगा। अब सख़्त नज़र रखने की ज़रूरत है और पुलिस प्रशासन को उकसावे में आने की बजाय स्थिति को कूटनीतिक तरीक़े से टैकल करना चाहिए। हमें देश को अराजकता की तरफ़ बढ़ने से रोकना ही होगा। यही हर सच्चे हिंदुस्तानी की भावना है। जेनजी के लोग भी नज़र रखें। उनके आंदोलन को असामाजिक और देश विरोधी लोग न हाईजैक कर लें जिनका मकसद अशांति फैलाकर सबका नुक़सान करना और देश को अस्थिर करना है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं सरकार को जल्द सदबुद्धि आए और आंदोलन की जेन्युइन माँगो को मानकर इसे सकारात्मक तरीक़े से ख़त्म कराये






