श्याम लाल शर्मा/इंदौर
भाजपा सरकार इंदौर में भी राहुल गांधी की छात्रों की गूंज कार्यक्रम को नहीं रोक पायी और भारी भरकम शर्तों के साथ कार्यक्रम करने की अनुमति के साथ आज रीजनल पार्क के सामने इंदौर विकास प्राधिकरण के मैदान में यह कार्यक्रम छतों के हुजूम के साथ पूरा हो गया । राहुल गांधी ने इंदौर में अपने स्वागत के लिए पहुंचे लोगों का आभार जताते हुए कहा कि आपने मेरा जिस तरह स्वागत किया, उसके लिए धन्यवाद। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।” उन्होंने कहा कि कोटा, देहरादून प्रयागराज और पुणे के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इंदौर में आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि हर शहर में कार्यक्रम के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और उनके भविष्य को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। इनमें पेपर लीक, संस्थागत विफलता, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षा की बढ़ती लागत और निजीकरण जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर में हमने तय किया है कि आज का विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ होगा। छात्र बताएंगे कि सिस्टम क्या है, वह छात्रों को किस तरह प्रभावित कर रहा है और उनके भविष्य के सामने किस तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
उन्होंने कहा ”देश पर सिस्टम का कब्जा है, जिसके टॉप पर 6 लोग बैठे हैं 1. नरेंद्र मोदी: पूरे सिस्टम को चलाते हैं 2. अमित शाह: देश को भड़काते हैं, स्टूडेंट्स को पिटवाते हैं 3. अजीत डोभाल: मोदी-शाह को इन्फॉर्मेशन देते हैं 4. मोहन भागवत: विचारधारा की बातें करते हैं 5. अडानी-अंबानी: पूरे सिस्टम को फाइनेंस करते हैं
राहुल ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई। इसके बाद बोले- तीन फ्रेंड ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, सिस्टम में कई लेयर हैं, टॉप लेवल पर 6 लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं। धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह करते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यक्रम में कई युवा मंच पर आकर खुलकर अपनी बात रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की शुरुआत की।
राहुल गांधी ने कहा, “अगर आज हम स्टूडेंट्स से बात करें तो वे खुश नहीं हैं। स्टूडेंट्स असहज हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा और वे दबाव में हैं।” उन्होंने कहा, “आइए, स्टूडेंट्स की आवाज सुनते हैं। आप सिस्टम के बारे में क्या कह रहे हैं, उसे सुनते हैं। छात्रों के मन में यह सवाल है कि परीक्षा पर भरोसा कैसे किया जाए? कैसे भरोसा करें कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ हो रही है? कैसे पता चले कि किसी परीक्षा में सही तरीके से चयन हुआ है या नहीं?”
राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की भी गलती हुई है, लेकिन कहीं न कहीं उनका सिस्टम पर भरोसा खत्म हो गया है। इसके बाद छात्रों की ओर से आवाज आई, “सर, हम सिस्टम से हार गए।” राहुल ने कहा कि सिस्टम के अंदर बैठे कुछ लोग भ्रष्ट हो जाते हैं। पैसे के चक्कर में पेपर लीक कर देते हैं और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्ट लोग परीक्षा व्यवस्था में रहेंगे और परीक्षा प्रणाली ही भ्रष्ट होगी, तो इसका नुकसान बच्चों को उठाना पड़ेगा। इस लेयर के नीचे हर संस्था को कैप्चार करके रखा है। इसमें मीडिया, एंटरनटेनमेंट, न्याय सभी में एक-एक आदमी बिठा रखा है। जैसे देश में कई क्रिकेटर्स है लेकिन सिस्टम ने शाह के बेटे को क्रिकेट का ठेका दे दिया है। यहां डेमोक्रेसी की बात होती है लेकिन सिस्टम अपने आदमी को बिठा देता है।
राहुल गांधी ने एक छात्रा से पूछा कि जो सिस्टम यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को प्रोटेक्ट करने के लिए बना है, वही सिस्टम स्टूडेंट्स पर आक्रमण कर रहा है। इसके बारे में वह क्या सोचती हैं? इस पर छात्रा ने कहा कि यूनिवर्सिटीज बिल्कुल कोऑपरेट नहीं कर पा रही हैं। हर तरफ फर्जीवाड़ा चल रहा है। कहीं भी ट्रांसपेरेंसी नहीं है। हम चाहते हैं कि जो समस्याएं आपके सामने लेकर आए हैं, उनका अच्छा समाधान मिले और हमारी सारी समस्याएं दूर हों।
राहुल गांधी के कार्यक्रम में एक एमबीबीएस छात्र ने मध्य प्रदेश में भर्तियों से जुड़ी समस्या बताते हुए कहा, “पिछले 8 वर्षों से जितनी भी भर्तियां होती हैं, सब पर 13% होल्ड कर दिया जाता है। प्रीलिम्स हो जाती है, मेंस परीक्षा हो जाती है, इंटरव्यू भी हो जाता है, लेकिन सिलेक्शन के लिए 13% रोक देते हैं।” छात्र ने कहा, “मेरे जैसे युवा कम से कम 4 लाख हैं और डायरेक्ट 87 हजार बच्चे होल्ड हैं। एमबीबीएस, व्यापम और जितनी भी परीक्षाएं होती हैं, सब पर 13% रोक लग जाती है। कोर्ट का बहाना देकर सरकार हर बार रोकती है। कोर्ट ने कई बार कमेंट किया कि आप अपना रिजल्ट क्यों नहीं देते? अपना ही कानून क्यों लागू नहीं करते?” छात्र ने कहा, “हम लोग 8 साल से ओवरएज हो गए हैं। पूरे प्रदेश में इतने सारे स्टूडेंट हैं कि सबकी स्थिति खराब है। मानसिक स्थिति खराब हो गई है। हम इंतजार कर रहे हैं कि हमारा रिजल्ट कब आएगा, नियुक्ति कब होगी। युवा एसडीएम और डीएम बन सकते हैं, लेकिन आज बेरोजगार बैठे हैं। मैं खुद यहां इंदौर में पार्ट-टाइम जॉब करता हूं।”
राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम को चलाने वालों के बच्चों को देखिए, वे इंदौर में पढ़ रहे हैं या विदेश में। ये देश के युवाओं को अंधभक्त बनाना चाहते हैं। अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि हमने शुरुआत में ही कहा था कि स्टूडेंट देश को बनाता है और शिक्षा देश की नींव है। शिक्षा हर स्टूडेंट का हक है। स्कूल में मिड-डे मील से लेकर कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी ने एक छात्र से पूछा कि आपको लगता है कि हिंदुस्तान के एवरेज स्टूडेंट को रोजगार मिल सकता है? इसपर छात्र ने जवाब दिया, “बिल्कुल सर, मिल सकता है। मिलना चाहिए। बहुत सारी भर्तियां खाली हैं, भर्तियां नहीं होती हैं।” राहुल ने पूछा, “तो फिर क्यों नहीं मिलता? इसपर छात्र ने कहा, “यहां पर सिस्टम ऐसा है। हम लोग आंदोलन करते हैं कि भर्तियां निकालिए, रिजल्ट रोक दिए जाते हैं। बहुत सारे पद निकलते ही नहीं हैं। संविदा से भर दिए जाते हैं। प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं। जो मेन पद हैं, वो भरे नहीं जा रहे। आज भी डेटा बता रहा है कि आधे पद खाली हैं।”

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की और कहा, ‘मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार और समूची मशीनरी, पूरी तरह से गैर राजनीतिक एवं शिक्षा के सुदृढ़ीकरण पर आधारित, छात्रों की गूंज कार्यक्रम को विफल करने में जुटी हुई है। हर दिन, नित-नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। राहुल गांधी को ले जाने वाले मार्ग को लेकर राजनीति की जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस, शांत है। आयोजन को सफल बनाने में जुटी हुई है। जैसा सरकार चाह रही है, हम वो सब कर रहे हैं। आईडीए ने ग्राउंड के लिए पहले 10 लाख 8 हजार रुपये लिए और बाद में 4 लाख 3 हजार की डिमांड का नया नोट दे दिया। हमने नई डिमांड वाली राशि भी चुका दी है।’ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अब एमपी सरकार द्वारा कोचिंग संचालकों को जारी किए गए ‘एक स्वघोषणा पत्र’ को एक्स पर पोस्ट कर बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना की है।

पटवारी ने कहा, ‘सरकार कितने भी सितम कर ले, आयोजन को विफल नहीं कर सकेगी।’
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ के इस आयोजन के लिए कांग्रेस ने इसी महीने की 12 तारीख़ सुनिश्चित की थी। इंदौर का नेहरू स्टेडियम, कांग्रेस को नहीं दिया गया। दलील दी गई थी, स्टेडियम को खेल गतिविधियों के अलावा अन्य आयोजनों को देने संबंधी रोक कोर्ट ने लगाई हुई है। कांग्रेस कोर्ट का आदेश मांगती रही। मुहैया नहीं कराया गया। कार्यक्रम टाला गया। नए स्थल का चयन हुआ। आईडीए के आधिपत्य वाले मैदान के लिए लीज रेंट मांगा गया। वो भरा गया। दो दिन पहले पांच शर्तों का पत्र आईडीए ने दिया। पत्र के अगले दिन 4 लाख 3 हजार लीज और मांगी गई। कांग्रेस ने ये जमा की। गुरुवार शाम पुलिस ने नया पत्र पकड़ा दिया। राहुल गांधी के छात्रों की गूंज के पूर्व के कार्यक्रमों में भी यही दृश्य रहा। कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी पेंच फंसाए गए। जितने पेंच फंसाए, उससे कार्यक्रम बाधित होने की बजाय अत्यधिक सफल रहा।
राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में पूर्व के चार कार्यक्रमों की तुलना में अब तक सबसे ज़्यादा पेंचबाजी, इंदौर में हुई है। ज़्यादा विवाद के हालात बने हैं। टकराव की नौबत पैदा हुई है। सरकार जितने व्यवधान पैदा कर रही है, कांग्रेस के दावों के अनुसार कार्यक्रम में युवाओं का जुड़ाव उतना ही ज्यादा बढ़ रहा है। दावों के अनुसार शुक्रवार तक स्टूडेंट के पंजीयन का आंकड़ा 11 लाख क्रॉस कर गया है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने 31 पाइंट वाला का एक पत्र कांग्रेस को जारी किया है। सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश वाले इस पत्र में राजीव गांधी हत्याकांड की जाँच से जुड़े, वर्मा आयोग की रिपोर्ट के अंशों का विशेष उल्लेख है। पुलिस ने कहा है, ‘21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की हत्या के पीछे आयोजकों का गैरजिम्मेदाराना रवैया, सुरक्षा में व्यवधान एवं असहयोग, कार्यक्रम स्थल के चयन में लापरवाही, बैरिकेडिंग और एक्सेस कंट्रोल की विफलता जैसी चूक सामने आयी थी”। वर्मा आयोग रिपोर्ट के उपरोक्त तथ्यों का हवाला देते हुए जिन 31 प्वाइंट का उल्लेख इस लेटर में किया गया है, उनमें खास ये हैं:-
- भीड़ को ऐसे सेक्टरों में बांटना होगा। हर सेक्टर में दो हजार से ज्यादा लोग नहीं हों। आयोजन स्थल पर रास्ते और छह मीटर चौड़ा आपातकालीन कॉरिडोर खुला रहना चाहिए।
- मंच के सामने 25-30 फीट का क्लियर जोन डबल बैरिकेडिंग के साथ रखना होगा। गेस्ट, छात्रों, वालंटियर्स और मीडियाकर्मियों के लिए अलग व्यवस्था करनी होगी।
- पंडाल फायर प्रूफ और कम से कम 20 फीट ऊंचा रखना जरूरी है। मंच तक पहुंच नियंत्रित होनी चाहिए और बाहर निकलने का अलग रास्ता होना चाहिए, साथ ही अस्थायी ढांचों के लिए सुरक्षा प्रमाण-पत्र ज़रूरी हैं।
- वेन्यू में कम से कम छह एंट्री गेट और आठ एग्जिट गेट होने चाहिए। हर गेट कम से कम छह मीटर चौड़ा होना चाहिए। स्क्रीनिंग के लिए कम से कम 20 डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर और 30-40 हैंडहेल्ड डिटेक्टर रखने की शर्त भी रखी गई है।
- महिलाओं के लिए तलाशी की अलग व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही उनके लिए बैठने की अलग जगह, एंट्री-एग्जिट की सुविधा और टॉयलेट भी होने चाहिए। सामान रखने के लिए क्लॉक-रूम की सुविधा होनी चाहिए।
- स्टेज शेयर करने वाले लोगों के नाम और पहचान की जानकारी 24 घंटे पहले जमा करनी होगी। आखिरी समय में कोई नया नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। पास कलर-कोडेड होने चाहिए और उन पर QR कोड या होलोग्राम होने चाहिए।
- आयोजकों को कम से कम 1,500 वॉलंटियर तैनात करने होंगे, जिनमें 500 महिलाएं शामिल हों। कम से कम 40 सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए और उनकी रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
- बैकअप पब्लिक-एड्रेस सिस्टम और 30 मेगाफोन उपलब्ध होने चाहिए, साथ ही पर्याप्त लाइटिंग और इमरजेंसी लाइट भी होनी चाहिए।
- पार्किंग के लिए लिखित प्लान और अलग-अलग तरह की गाड़ियों के लिए अलग-अलग जगह होनी चाहिए। मुख्य सड़कों पर पार्किंग मना है। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, साउंड की इजाज़त, फायर क्लीयरेंस और ड्रेनेज से जुड़े सर्टिफ़िकेट भी जरूरी हैं।
- मेडिकल व्यवस्था में कम से कम दो डॉक्टर, चार पैरामेडिक और चार एम्बुलेंस होनी चाहिए। पीने का पानी, ओआरएस और पर्याप्त मोबाइल टॉयलेट की सुविधा होनी चाहिए।
- चेकलिस्ट में बिना इजाज़त ड्रोन उड़ाने पर रोक है और लाउडस्पीकर रात 10 बजे तक बंद करने का नियम है।
- शर्तों में आपत्तिजनक या भड़काने वाली तस्वीरें, बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाने पर रोक भी शामिल है।साथ ही ऐसी बातें कहने पर भी रोक है जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
- LED स्क्रीन पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की समरी 24 घंटे पहले जमा करनी होगी और प्रोग्राम की रिकॉर्डिंग पुलिस को देनी होगी।
- आयोजकों को खराब मौसम के लिए तैयारी करनी होगी, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्लान बनाना होगा और मॉक ड्रिल करनी होगी।
• • सभी कंस्ट्रक्शन और इंस्टॉलेशन का काम पिछले दिन शाम 6 बजे तक पूरा हो जाना चाहिए, जिसके बाद सिक्योरिटी चेक और वेन्यू को सील करने का काम होगा।






