सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर मंडल में गन्ना किसानों के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मानसून के दौरान गन्ने की फसल को कीटों, बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी से बचाने के लिए मंडल में 36 ड्रोन तैनात किए गए हैं। इन ड्रोन की मदद से किसानों को खेतों में कीटनाशक, आवश्यक दवाओं और पोषक तत्वों का छिड़काव करने में सुविधा मिलेगी। खास बात यह है कि बारिश के मौसम में जब खेतों में पानी भर जाता है और किसान आसानी से खेत के अंदर नहीं जा पाते, तब ड्रोन तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। सहारनपुर मंडल में सहारनपुर के अलावा मुजफ्फरनगर और शामली जिले भी इस व्यवस्था के दायरे में हैं। गन्ना सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य सिर्फ छिड़काव को आसान बनाना नहीं, बल्कि सही समय पर फसल की देखभाल सुनिश्चित करना भी है। बारिश के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि खेत में जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। बारिश रुकने के बाद खेतों में पानी और कीचड़ के कारण पारंपरिक तरीके से छिड़काव करना मुश्किल हो जाता है
बारिश के बीच कम समय में पूरा होगा छिड़काव का काम ?
ड्रोन तकनीक की मदद से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। बारिश रुकने के बाद जब खेत में जाने की स्थिति नहीं होती, तब भी ड्रोन को खेत के ऊपर उड़ाकर निर्धारित क्षेत्र में दवा या पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों को मजदूरों के खेत में उतरने और फसल के बीच चलने की जरूरत कम होगी। साथ ही कम समय में बड़े क्षेत्र को कवर करने में भी मदद मिल सकती है। गन्ने की फसल लंबे समय तक खेत में रहती है और इस दौरान मौसम में होने वाले बदलाव का उस पर सीधा असर पड़ता है। मानसून के समय अत्यधिक नमी के कारण कई प्रकार के रोग और कीटों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में समय पर फसल की निगरानी और आवश्यक छिड़काव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ड्रोन के इस्तेमाल से इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की जा रही है।
किसानों के समय और मेहनत की हो सकती है बचत ?
पारंपरिक छिड़काव में किसानों को खेत में जाकर दवा का घोल तैयार करने और उसे मशीन या अन्य उपकरणों की मदद से फसल पर डालने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। बड़े खेतों में यह काम समय लेने वाला भी होता है। ड्रोन आधारित छिड़काव से किसानों की मेहनत कम करने और काम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा फसल पर दवा और पोषक तत्वों का समान रूप से छिड़काव करने में भी ड्रोन तकनीक उपयोगी हो सकती है। हालांकि इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ड्रोन का संचालन कितनी कुशलता से किया जाता है और फसल के लिए निर्धारित दवाओं एवं पोषक तत्वों का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किया जाता है।
गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में पहल ?
सहारनपुर मंडल में ड्रोन की तैनाती को खेती में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। गन्ना किसानों के लिए फसल की सुरक्षा और समय पर प्रबंधन बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी बीमारी या कीट का समय पर नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। 36 ड्रोन की तैनाती से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के गन्ना किसानों को मानसून के दौरान छिड़काव में व्यावहारिक मदद मिलने की उम्मीद है। बारिश के बीच खेतों में पहुंचने की चुनौती को देखते हुए यह तकनीक किसानों का समय और मेहनत बचाने के साथ फसल प्रबंधन को भी अधिक सुविधाजनक बना सकती है। आने वाले समय में यदि इस तरह की तकनीक का दायरा और बढ़ता है, तो उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।






