भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष के दौरान इन बैंकों के कुल मुनाफे में करीब 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बेहतर वित्तीय स्थिति, एनपीए में कमी और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार ने इस प्रदर्शन को मजबूती दी है। वहीं, जनधन योजना के तहत लाखों नए खाते खुलने से ग्रामीण आबादी की औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंच भी बढ़ी है।
13.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कुल कारोबार ?
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का संयुक्त कारोबार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 13.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इन बैंकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। RRBs किसानों, छोटे कारोबारियों, ग्रामीण उद्यमियों और कम आय वाले परिवारों को बैंकिंग तथा ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। बैंकों के कारोबार में वृद्धि के पीछे जमा राशि में बढ़ोतरी, कर्ज वितरण में सुधार और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का विस्तार प्रमुख कारणों में शामिल रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ ग्राहकों की संख्या और लेनदेन दोनों में वृद्धि देखने को मिली है।
एनपीए में बड़ी गिरावट से मजबूत हुई वित्तीय स्थिति ?
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए सबसे सकारात्मक संकेत उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार है। वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रॉस एनपीए घटकर 5.3 प्रतिशत रह गया, जबकि नेट एनपीए 2.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। एनपीए में कमी का सीधा असर बैंकों की वित्तीय मजबूती पर पड़ता है, क्योंकि इससे फंसे हुए कर्ज का दबाव कम होता है और नए ऋण देने की क्षमता बेहतर होती है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में खराब ऋण को नियंत्रित करने, रिकवरी प्रक्रिया मजबूत करने और ऋण मूल्यांकन को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसका असर अब बैंकों के वित्तीय आंकड़ों में दिखाई देने लगा है।
जनधन योजना से बढ़ी ग्रामीण बैंकिंग की पहुंच ?
प्रधानमंत्री जनधन योजना ने भी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जनधन योजना के तहत करीब 55 लाख नए खाते खोले गए। इन खातों के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया, जो पहले औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर थे। जनधन खातों के माध्यम से लोगों को बचत, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलती है। इससे ग्रामीण परिवारों में बैंकिंग को लेकर भरोसा भी मजबूत हुआ है। आने वाले समय में RRBs के लिए डिजिटल बैंकिंग, कृषि ऋण, माइक्रोफाइनेंस और छोटे कारोबारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण क्षेत्र रहेंगे। अगर एनपीए को नियंत्रित रखते हुए कारोबार का विस्तार जारी रहता है, तो क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में और बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि RRBs अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ वित्तीय संस्थानों के रूप में भी उभर रहे हैं।






