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धिक्कार है, इतनी बेशर्म हो गई पटना की पुलिस, 6 साल के मासूम बच्चे को ही गिरफ्तार कर लिया

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चौथा अक्षर संवाददाता/ पटना

पटना की सड़कों पर जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तब पहली कक्षा में पढ़ने वाले इस नन्हे बालक “आदित्य” ने जो बेबाकी और निडरता दिखाई, उसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है जहाँ इस उम्र में बच्चे खिलौनों और कार्टून की दुनिया में खोए रहते हैं, वहाँ यह नादान बच्चा तिरंगा हाथ में थामे, बस की छत पर चढ़कर व्यवस्था से सीधे सवाल कर रहा था उसके चेहरे की मासूमियत और उसकी ज़ुबान से निकले ‘सत्ता’, ‘भविष्य’ और ‘अधिकार’ जैसे भारी शब्द इस बात का सबूत हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती….लाठीचार्ज के खौफ के बीच पत्रकारों के कैमरों के सामने बिना डरे अपनी बात रखना और छात्रों के दर्द को महसूस करना उसकी गहरी संवेदना और नेक इरादों को दर्शाता है!

भले ही पुलिस ने उसे एक नादान बच्चा समझकर प्यार से गोद में उठाकर सुरक्षित जगह पहुँचाया हो, लेकिन इस छोटे से बच्चे ने अपनी तोतली आवाज़ में जो बड़ी और गंभीर बातें कह दी हैं, वे लंबे समय तक गूँजती रहेंगी इस नन्हे क्रांतिकारी की वाकपटुता, हिम्मत और जज़्बे को दिल से सलाम!  यह वाकई बिहार और देश की मिट्टी का वो हुनर है, जो आने वाले कल का एक सशक्त और जागरूक भविष्य बनने की पूरी काबिलियत रखता है।” उम्र महज़ 6 साल, लेकिन हौसला हिमालय जैसा!

जब किसी लोकतांत्रिक आंदोलन में असहमति की आवाज़ को बंद करने के लिए पुलिस एक छह साल के बच्चे को भी उठा ले जाती है तो कानून और प्रशासनिक व्यवस्था अपनी संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मर्यादा छोड़ते हुए अपनी ऐसी तस्वीर बनाती है। वह तस्वीर जो व्यवस्था के माथे पर एक बदनुमा दाग बन जाती है। वह तस्वीर जो सड़े गले सिस्टम की सच्चाई बयान करती है। वह तस्वीर जो बताती है कि जिस व्यवस्था में छह साल का बच्चा भी सत्ता के विरोध का चेहरा बन जाए और पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा बन जाए, वहाँ लोकतंत्र से पहले इंसानियत पर सवाल खड़ा होता है। वह तस्वीर जो हमे सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हर नागरिक का फ़र्ज़ नहीं बनता है कि इस तरह की गैर जिम्मेदाराना सिस्टम और सरकार से हर तरह का सवाल पूछे और जवाब मांगे कि क्यों एक छोटा बच्चा भी सरकार के लिए खतरा है जिसे पुलिस दोनों तरफ से पकड़ रखी है?

पटना में बी.पी.एस.सी. अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान इस छोटे बच्चे का जोशीला बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आंदोलन स्थल पर बच्चे ने छात्रों के समर्थन में कहा, “जेल भी जाना पड़ा तो जाएंगे, गोली भी खाना पड़ा तो खाएंगे।” बच्चे के इस जोशीले बयान को सुनकर मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं और उसका हौसला बढ़ाया।सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

जब हुकूमतें अपना विवेक खो देती हैं तो उन्हें अपने ही मुल्क से खतरा लगने लगता है..! पटना में  विरोध प्रदर्शन के दौरान इस 6 साल के बच्चे से भी स्टेट को खतरा महसूस होने लगा और इस तरह खाकी वर्दी उसे पकड़ कर ले गई..! ऐसी हुकूमतों को शायद आने वाले दिनों में गर्भस्थ शिशुओं से भी ख़तरा होगा..!

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