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‘छात्रों पर बिना गृह मंत्री की मंजूरी के गोलियां नहीं चल सकतीं’-राहुल गांधी

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श्याम लाल शर्मा/चौथा अक्षर/नई दिल्ली/छाया – आशीष कार/आरबी यादव

       लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोल दिया और कहा कि ‘छात्रों पर बिना गृह मंत्री की मंजूरी के गोलियां नहीं चल सकतीं।’ अमित शाह लोकसभा में नहीं आए, क्योंकि वे ग़लत हैं। अगर ग़लत नहीं होते तो सदन में आकर जवाब दे देते। इसलिए हम कह रहे हैं कि इन्हें गृह मंत्री के पद से हटना होगा। पैलेट गन एक लीगल हथियार है और अगर इसे करीब से इस्तेमाल किया जाए तो ये जान भी ले सकती है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता को लेकर राहुल गांधी ने अमित शाह को जवाबदेह ठहराया है।”25 तारीख को मैंने गृह मंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें मैंने 2 सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि आपने पैलेट गन इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी हां या न। दूसरा सवाल था कि सादे कपड़ों में जो लोग बच्चों को लाठियों से मार रहे हैं ये लोग कौन है? ये पुलिसवाले हैं या फिर कोई और? सवालों का जवाब नहीं मिला है .”

दिल्ली में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट गन, लाठी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। मेरी मुलाकात 19 वर्षीय साहिल लोचाब से हुई। पेलेट गन से घायल होने के कारण उनकी एक आंख जा सकती है। उनका “अपराध” क्या था? पेपर लीक पर रोक लगाने और हमारे छात्रों के लिए एक बेहतर भविष्य की मांग करना।

राहुल गांधी ने कहा  मैं प्रेस के सामने एक ऐसे युवा को लेकर आया, जो पैलेट गन से पीड़ित है, उसके शरीर में छर्रे भरे हुए हैं  उस युवा की आंख में छर्रे हैं। AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट गन इंजरी की बात लिखी हुई है। पैलेट गन का पीड़ित कोई एक नहीं, बल्कि कई हैं  यानी- पूरे सबूत हैं कि पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, लेकिन मोदी सरकार मानने को तैयार नहीं है, तो क्या अब मैं वो रायफल उठाकर लाऊं? हमने सदन में पूछा कि छात्रों पर हमला किसने करवाया, ये किसके आदेश पर हुआ? छात्रों पर पैलेट गन और लीगल फोर्स का इस्तेमाल गृह मंत्री के आदेश के बिना नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी ने कहा -अमितशाह जी से मेरे दो सवाल हैं:

1. क्या आपने छात्रों के खिलाफ पेलेट गन सहित घातक बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी? यदि नहीं, तो किसने दी?

2. क्या सादे कपड़ों में लाठियों से छात्रों को पीटने वाले लोग पुलिसकर्मी थे या स्वयंसेवक? उनकी तैनाती किसने अधिकृत की थी?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण से सदन में जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन की बात करते हुए “स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त” जैसी तीन कैटेगरी की बात कही। जैसे ही उन्होंने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्द बोले, सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के शब्दों पर आपत्ति जताई और इन्हें सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक नोकझोंक होती रही और सदन में जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि तीन तरह के लोग होते हैं, स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त। वह एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान उनके मुंह से ‘इडियट’ शब्द निकला और सत्ता पक्ष ने तुरंत विरोध शुरू कर दिया। किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करने को कहा। उन्होंने स्पीकर से भी इस शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने की अपील की।

इसके बाद राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द भी बोला, जिसके बाद सदन में फिर हंगामा होने लगा। राहुल गांधी ने इस पर कहा कि जैसे ही वह बोलना शुरू करते हैं, सत्ता पक्ष की तरफ से शोर शुरू हो जाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में सिर्फ बीजेपी के लोग ही बोलेंगे। सत्ता पक्ष ने ‘अंधभक्त’ शब्द पर भी आपत्ति जताई। बाद में स्पीकर के निर्देश पर आपत्तिजनक माने गए शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने की बात कही गई।

ओम बिड़ला ने कहा -यदि आप अमित शाह पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगेंगे,  तभी आपको सदन में बोलने का अवसर दिया जाएगा। लेकिन राहुल गांधी अपने पुराने रुख़ पर अडिग रहे। उन्होंने पहले भी स्पष्ट कहा है  “मेरा नाम राहुल गांधी है, राहुल सावरकर नहीं। मैं सच्चाई के लिए कभी माफ़ी नहीं मांगूँगा। जो छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, उन पर पैलेट गन चलाई गई।मैं एक ऐसे युवा से मिला, जिसकी आंख पर छर्रा लगा है और शायद वो कभी देख भी न पाए। छात्रों को कील लगी लाठियों से पीटा गया और महिलाओं को भी मारा गया। मैं यही मुद्दे सदन में उठाना चाहता था, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया गया। कारण बताया गया कि मैंने अमित शाह के बारे में टिप्पणी की है। मुझसे कहा गया कि अगर मैं माफी मांग लूं तो बोलने दिया जाएगा, लेकिन मैंने भी कह दिया कि मैं सच बोलने के लिए माफी नहीं मांग सकता। आज सदन में जो हुआ है वैसा धमाका कभी कभी देखने को मिलता है जब पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे के ऊपर हमलावर रहा।

नेता विपक्ष ने कहा -अध्यक्ष ओम बिरला उनको लगातार बोलने से रोक रहे हैं। सदन में बोलने की अनुमति न मिलने का आरोप लगाते हुए शाम 6 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और पवन खेड़ा भी मौजूद रहे। राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने अपनी आंखों से अमित शाह को पुलिस अधिकारियों को फोन पर निर्देश देते देखा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को लगातार ब्रीफिंग दी जा रही थी। क्या उन्हें दिल्ली में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं थी?

राहुल गांधी ने मुख्य आरोपों के तहत, 2 संभावनाएं जताईं पहली: या तो गृह मंत्री को पता था कि छात्रों पर पैलेट गन चलाई जा रही है और उन्होंने मंजूरी दी। दूसरी: या फिर उन्हें पता नहीं था, इस स्थिति में सवाल उठता है कि गृह मंत्रालय कैसे चल रहा है? ‘जिन्होंने पैलेट गन चलाई, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए’ राहुल गांधी ने यह भी बताया कि 25 जुलाई को अमित शाह को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने पूछा था कि दिल्ली पुलिस और आरएएफ  मौके पर थे। पैलेट गन और घातक बल का इस्तेमाल बिना उच्च स्तर की अनुमति के कैसे हुआ? जिन्होंने पैलेट गन चलाई, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार समेत अन्य जगहों पर कील लगी लाठियों का इस्तेमाल हुआ।

राहुल गांधी ने कहा कि एक लड़के को पैलेट गन लगी है, जिसकी आंख जाने का खतरा है। मैंने एआईआईएमएस  का मेडिकल सर्टिफिकेट देखा है। शॉक बैटन का इस्तेमाल हुआ, सिर्फ सामान्य लाठियां नहीं बल्कि कील लगी लाठियां। पुलिस को यह आइडिया कहां से आया? उन्होंने आगे कहा कि मुझसे सदन में माफी मांगने को कहा गया। लेकिन मैं बीजेपी, आरएसएस या किसी से माफी नहीं मांगूंगा। नेता प्रतिपक्ष के रूप में देश के मुद्दे उठाना मेरा कर्तव्य है। आज मुझे बोलने नहीं दिया गया, जबकि किरण रिजिजू और राजनाथ सिंह जी को बोलने दिया गया। राहुल गांधी का तर्क है कि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय (MHA) को रिपोर्ट करती है। इसलिए कोई भी बड़ा बल प्रयोग गृह मंत्री या प्रधानमंत्री की अनुमति के बिना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के पास हिम्मत नहीं है कि सदन में आकर बैठें। सुरक्षाबलों को गृह मंत्री के आदेश की जरूरत होती है।

गौरतलब है कि राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फेंस से पहले, भाजपा ने शाम 4:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें, सांसद संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा में झूठ बोला। पात्रा का कहना था कि संसद मार्च में छात्रों परगोलीनहीं चलाई गई। गोली चली ही नहीं तो आदेश देने का सवाल कहां से उठता है? राहुल गांधी बिना सबूत के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने भी पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया औरफेक न्यूजबताया। पुलिस का दावा है कि उसके पास पैलेट गन नहीं हैं और वायरल वीडियो पुराने हैं।

“पैलेट गन चली है, आंसू गैस के गोले चले हैं, लाठी चली हैं, लोगों के चोट आई है। गृह विभाग के ही अंडर पुलिस आती है, अगर उनके ऑर्डर पर नहीं चला कुछ तो किसके ऑर्डर पर फैसला लिया गया है?”  राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी – अखिलेश यादव

आरजेडी सांसद मनोज झा ने संसद भवन परिसर में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा अगर कील लगी लाठियों, पेलेट गन और बिजली प्रवाहित (इलेक्ट्रिफाइड) बैरिकेड का इस्तेमाल हुआ, तो क्या यह सब दिल्ली पुलिस के निचले स्तर के अधिकारियों ने अपनी मर्जी से किया था?” 

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