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जीतेंद्र की उस फिल्म ने रचा इतिहास, विवादों के बावजूद बनी सुपरहिट और कई शहरों में तोड़ा ‘शोले’ का रिकॉर्ड ?

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जो रिलीज से पहले विवादों में घिर गईं, लेकिन दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता कम होने के बजाय और बढ़ गई। साल 1981 में रिलीज हुई अभिनेता Jeetendra की फिल्म एक ही भूल ऐसी ही फिल्मों में शामिल है, जिसने तमाम मुश्किलों के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। उस दौर में फिल्म को लेकर इतना विवाद हुआ कि कुछ समय के लिए इसके प्रदर्शन पर रोक तक लग गई थी। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब यह सिनेमाघरों में पहुंची, तो दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया।

फिल्म की कहानी पारिवारिक रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक मूल्यों पर आधारित थी। इसमें एक ऐसे परिवार की कहानी दिखाई गई थी, जिसमें एक छोटी सी गलती जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। उस समय फिल्म की विषयवस्तु को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई थी। मामला बढ़ने पर निर्माताओं को कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ा और रिलीज में भी कई तरह की बाधाएं आईं।

विवाद से बढ़ी दर्शकों की उत्सुकता ?

फिल्म पर लगे प्रतिबंध और लगातार हो रही चर्चाओं ने लोगों के मन में इसे देखने की उत्सुकता पैदा कर दी। दर्शक यह जानना चाहते थे कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है, जिसे लेकर इतना विवाद हो रहा है। यही उत्सुकता बाद में फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गई। रिलीज के बाद कई शहरों में सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं। फिल्म ने कई स्थानों पर शानदार कमाई की और उस दौर की चर्चित फिल्मों के रिकॉर्ड को चुनौती दी। फिल्म में जीतेंद्र के अभिनय की भी खूब सराहना हुई। उन्होंने अपने किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से कहानी से जुड़ गए। फिल्म के गाने और संवाद भी काफी लोकप्रिय हुए। यही कारण रहा कि यह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिकी रही और बॉक्स ऑफिस पर लगातार सफलता हासिल करती रही।

1981 में रिलीज हुई इस फिल्म ने वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि फिल्म ने विवाद, प्रतिबंध और कानूनी अड़चनों का सामना करने के बाद यह मुकाम हासिल किया था। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि यदि किसी फिल्म की कहानी दमदार हो और दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर सके, तो उसके सामने कोई भी बाधा अधिक समय तक नहीं टिक सकती। आज भी यह फिल्म हिंदी सिनेमा के उन उदाहरणों में गिनी जाती है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता की नई मिसाल कायम की। जीतेंद्र की यह फिल्म इस बात का प्रमाण है कि कभी-कभी विवाद भी किसी फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा देते हैं और वही फिल्म इतिहास के पन्नों में अपनी अलग पहचान बना लेती है।

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