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निफ्टी में सोमवार को गैपडाउन ओपनिंग: जानिए किन स्तरों पर बन सकती है ट्रेडिंग रणनीति ?

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वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता के बीच सोमवार को निफ्टी में गैपडाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में ट्रेडर्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि शुरुआती मूवमेंट को देखकर जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी 23100-23120 के दायरे में खुलता है, तो शुरुआती कुछ मिनटों की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। गैपडाउन ओपनिंग के बाद अक्सर बाजार में तकनीकी पुलबैक देखने को मिलता है। कई बार शुरुआती गिरावट के बाद खरीदारी आने से पहली 5 मिनट की कैंडल हरी बन जाती है, लेकिन इसे तुरंत ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। कमजोर सेंटीमेंट और ऊंचे स्तरों पर बिकवाली के दबाव के कारण यह सिर्फ एक अस्थायी रिकवरी भी हो सकती है।

23000 का स्तर रहेगा बेहद महत्वपूर्ण ?

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार 23000 का मनोवैज्ञानिक स्तर आने वाले सत्र में बेहद अहम साबित हो सकता है। यदि निफ्टी इस स्तर के आसपास पहुंचता है, तो वहां पर बड़ी संख्या में बुल्स के स्टॉप लॉस ट्रिगर होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में बाजार में थोड़ी और कमजोरी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गैपडाउन ओपनिंग के बाद यदि पहली 5 मिनट की कैंडल ग्रीन बनती है, तो ट्रेडर्स को धैर्य रखना चाहिए और अगले कुछ कैंडल्स का इंतजार करना चाहिए। अगर इंडेक्स पुलबैक के बाद फिर से नीचे की ओर मुड़ता है और शुरुआती लो के नीचे ट्रेड करने लगता है, तो यह कमजोरी का संकेत हो सकता है। दूसरी ओर, यदि निफ्टी 23000 के स्तर के आसपास मजबूत सपोर्ट बनाता है और वहां से वॉल्यूम के साथ खरीदारी लौटती है, तो शॉर्ट कवरिंग की वजह से तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसलिए केवल शुरुआती हरियाली देखकर लॉन्ग पोजीशन बनाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

बाजार में इस समय भावनात्मक ट्रेडिंग से बचना सबसे जरूरी है। वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और तकनीकी स्तर, तीनों मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में ट्रेडर्स को स्पष्ट स्टॉप लॉस और उचित जोखिम प्रबंधन के साथ ही ट्रेड लेना चाहिए। सोमवार के कारोबार में 23100-23120 का ओपनिंग ज़ोन, 23000 का सपोर्ट और शुरुआती 5 से 15 मिनट की प्राइस एक्शन सबसे महत्वपूर्ण संकेत देंगे। यदि बाजार पुलबैक के बाद कमजोरी दिखाता है तो नीचे के स्तरों की ओर दबाव बढ़ सकता है, जबकि मजबूत खरीदारी लौटने पर राहत भरी रिकवरी भी संभव है। इसलिए जल्दबाजी की बजाय पुष्टि मिलने के बाद ही ट्रेडिंग निर्णय लेना अधिक सुरक्षित रणनीति मानी जाएगी।

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