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नेहा से सरकार कितनी डरी हुई है कि पूरी ताक़त झोंक दी उसको धमकाने में, हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर ले गई

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श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली

पुलिस ने आज जंतर मंतर के बजाय कनॉट प्लेस के सेंटर पार्क में आयोजित “लहरा दो तिरंगा “ को देखते हुए कनॉट प्लेस को छावनी में तब्दील कर दिया था और 2 दिनों के लिए सेंट्रल पार्क को बंद कर वहाँ बी.एन.एस. की धारा 163 लगा दी थी। अभिजीत दीपके को पुलिस ने उनके घर से निकलते ही हिरासत में ले लिया था जबकि आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा और वामपंथी छात्र संगठनों ने अपनी रणनीति बदली और मंडी हाउस पर तिरंगा फहराने की घोषणा की और  ठीक 5 बजे नेहा समेत सारे कार्यकर्ता मंडी हाउस पहुंचे और वहां जोरदार नारेबाज़ी की। कुछ ही देर में वहां पुलिस पहुंची और नेहा बोरा समेत सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक नेहा बोरा सहित क़रीब डेढ़ सौ लोगों को हिरासत में लिया गया है। एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ‘जो लोग कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन के दौरान क़रीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को उस समय हिरासत में लिया गया जब वह अपने ठहरने के स्थान से निकलकर कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस पर दिपके ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और अधिकारियों से हिरासत में लेने का कानूनी आधार पूछा। हिरासत में लिए जाने के दौरान दीपके और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। दिपके लगातार पुलिस से पूछते रहे कि जब वह अकेले जा रहे हैं तो उन्हें किस कानून के तहत रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह अकेले हैं और किसी भीड़ का नेतृत्व करते हुए नहीं जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस उन्हें किस आधार पर रोक रही है? दीपके ने पुलिस से पूछा, ‘मैं अकेला हूं। मैंने कौन-सा कानून तोड़ा है?’ उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय ध्वज लेकर जाना या तिरंगा फहराना गैरकानूनी है। उनका कहना था कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं और यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

वहीं नेहा बोरा ने आज फिर दिल्ली पुलिस को चकमा देते हुए अंतिम समय में योजना में बदलाव करते हुए मंडी हाउस में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का ऐलान करते हुए सैकड़ों लोगों के साथ मंडी हाउस पहुंच कर जैसे ही आगे बढ़ीं वैसे ही सैकड़ों की तादात में मौजूद महिला पुलिस ने उनको घेर कर बड़ी जद्दोजहद और धक्का मुक्की के बाद घसीटते हुए पास में खड़ी एक वैन में जबरदस्ती ठूँस दिया।

एक बेहद डरावनी ,फ़िक्र में डालने और हैरान करने वाली ख़बर जो सामने आ रही है वह यह कि नेहा बोरा और उनके कई साथियों ने मंडी हाउस इलाक़े से तिरंगा मार्च शुरू किया था ।जहाँ पर पुलिस ने नेहा बोरा के साथ ही आइसा और लेफ़्ट पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को काफ़ी जद्दोजहद के बाद हिरासत में ले लिया था । उसके बाद उनको कहाँ ले जाया गया इसका पता नहीं चल रहा है।नेहा बोरा के एक्स अकाउंट से एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज़ दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने नेहा को अकेले हिरासत में लिया है और उन्हें किसी अनजान जगह पर रखा गया है। ​सबसे ज़्यादा परेशानी की बात ये है कि उनका फ़ोन भी छीन लिया गया है, जिससे उनसे कोई राब्ता (संपर्क) नहीं हो पा रहा है। नेहा की टीम ने पुलिस पर बड़ा इल्ज़ाम लगाते हुए कहा है कि “ये कोई हिरासत नहीं, बल्कि सीधे-सीधे अगवा करना है।” अब हर तरफ़ से यही आवाज़ उठ रही है कि आख़िर दिल्ली पुलिस जवाब दे कि नेहा इस वक़्त कहां और किस हाल में हैं? नेहा बोरा और अभिजीत दीपके भारत देश के सच्चे देशभक्त लोग हैं ऐसे महान लोगों का भारत देश की जनता को साथ देना चाहिए अपने धर्म और जाति से ऊपर उठकर क्योंकि यह देशभक्त लोग भारत देश की जनता के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं उनके वोटो की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं महान भारतीय लोकतंत्र और महान भारतीय संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं ।

यही बात सी जे पी ने भी कहीं है कि दिल्ली पुलिस उसके संस्थापक, अभिजीत दीपके को किसी अज्ञात जगह ले गई है और पार्टी का उनसे संपर्क टूट गया है। एक्स पर एक पोस्ट में पार्टी ने आरोप लगाया कि दीपके को वकीलों से बात नहीं करने दी जा रही है। पार्टी ने पुलिस से पूछा है कि दीपके को कहाँ रखा गया है। साथ ही, यह सवाल भी उठाया कि युवाओं के साथ आतंकवादियों जैसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है, जबकि उन्हें भी संवैधानिक अधिकार और सुरक्षा पाने का हक है। पार्टी ने कहा, ‘अभिजीत अपने हाथ में तिरंगा लेकर बस अपने घर से बाहर ही निकल रहे थे! तिरंगा लेकर चलना भला अपराध कैसे हो सकता है?’ पार्टी ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि वह बताए कि दीपके को कहाँ ले जाया गया है।

दीपके दिल्ली के करोल बाग इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे के आवास पर ठहरे हुए थे। यह मकान रानी झांसी रोड पर स्थित है। शुक्रवार को जब दीपके वहां से निकले तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इससे लगभग एक घंटे पहले ही पुलिस ने उन्हें नोटिस दिया था, जिसमें कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित कार्यक्रम आयोजित नहीं करने की चेतावनी दी गई थी। हिरासत में लिए जाने के दौरान दिपके ने पुलिस से सवाल किया कि वह केवल तिरंगा फहराने जा रहे हैं, फिर उन्हें क्यों रोका जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जब पुलिस दीपके को अपने वाहन में लेकर जाने लगी तो वहां मौजूद कुछ समर्थकों ने पुलिस की गाड़ी रोकने की कोशिश की। हालांकि पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।

दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर एक पोस्ट में तिरंगे के प्रति सर्वोच्च सम्मान व्यक्त किया और लोगों से अपने हर हावभाव में देशभक्ति की भावना को दर्शाने का आग्रह किया। पुलिस ने कहा, “झंडे का सम्मान करें। गौरव को कायम रखें।” इस बीच राजस्थान से आए सीजेपी समर्थक का कहना है कि जंतर-मंतर पर तिरंगा मार्च में सैकड़ों लोग शामिल होंगे। बांसवाड़ा से आए 23 वर्षीय डेविड मीना ने मीडिया को बताया, “सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर झंडा लगाने के लिए जेल में डाल दिया गया है। अब हम सैकड़ों सीजेपी समर्थक तिरंगा मार्च निकालेंगे और अगर सरकार को इसमें कोई आपत्ति है, तो वे हम सभी को जेल में डाल दें।” दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नई दिल्ली स्थित घर जा पहुंची है। उन्हें नोटिस दिया और तिरंगा मार्च नहीं निकालने को कहा। दीपके ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिये हैं यानी उन्हें मिल गया है। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिखाया गया है कि दीपके, जिनके कंधे पर एक छोटा तिरंगा ध्वज लिपटा हुआ है और जो हल्के पीले रंग के सोफे पर बैठे हैं, अपने सामने खड़े पुलिसकर्मी से पूछते हुए सुनाई दे रहे हैं, “आपने मेरे ऊपर क्या आरोप लगाया है?” वीडियो में कांच की मेज पर रखे कागजों के बंडल को देखा जा सकता है, जिन पर दीपके नजर आ रहे हैं और कुछ अंश पढ़कर पुलिसकर्मियों से सवाल कर रहे हैं। 31 वर्षीय दिपके द्वारा पढ़कर सुनाए गए नोटिस में एक आरोप यह भी था कि “आप (दिपके) सोशल मीडिया पर आम जनता को उकसाते रहे हैं, जो गैरकानूनी है।”

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले सेंट्रल पार्क को बंद करने के एनडीएमसी के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि NDMC के पार्क बंद करने के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि यदि प्रशासन का प्रतिबंध जरूरत से ज्यादा कठोर पाया गया और उससे व्यापारियों को गैरकानूनी नुकसान हुआ, तो अदालत मुआवजा दिलाने के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने त्योहारों के मौसम में छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई। हालांकि, अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई करने के बजाय इसे दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

अभिजीत दीपके ने सेंट्रल पार्क को लेकर कनॉट प्लेस के व्यापारियों के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दीपके ने थोड़ी देर पहले सोशल मीडिया पर लिखा है- शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से व्यवसायों को नुकसान नहीं होता। नुकसान तब होता है जब सरकार पूरे शहर को बंद कर देती है, इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर देती है, अपने ही नागरिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा देती है और शहर को युद्धक्षेत्र में बदल देती है। अपनी स्थापना से ही, कॉकरोच जनता पार्टी ने यह संकल्प लिया है कि हम हमेशा गांधी जी के शांति और अहिंसा के मार्ग का अनुसरण करेंगे, और हम इस प्रतिबद्धता पर कायम रहे हैं। हमने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं, और उनमें से प्रत्येक शांतिपूर्ण रहा है। जयपुर में मुझ पर व्यक्तिगत रूप से हमला हुआ था, लेकिन तब भी मैंने जवाबी कार्रवाई नहीं की क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध है। हम शारीरिक बल का सहारा लेने के बजाय डॉ. बी. आर. अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करना पसंद करेंगे। हमारी शक्ति संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से आती है, और किसी भी प्रकार का उकसावा हमें उन्हें छोड़ने के लिए विवश नहीं करेगा।

उन्होंने कहा- इसके बावजूद, हमें अराजकतावादी के रूप में चित्रित करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, केवल इसलिए कि हम चुप रहने से इनकार करते हैं। लेकिन सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, सड़कों पर अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है, और सार्वजनिक पदों पर आसीन लोगों से सवाल करना निश्चित रूप से अराजकता नहीं है। ये लोकतंत्र की सबसे बुनियादी अभिव्यक्तियाँ हैं। आज सत्ता में मौजूद पार्टी ने दशकों तक विपक्ष में रहते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, सड़कों पर उतरी और तत्कालीन सरकारों से सवाल किए। अगर उनके खिलाफ भी वही प्रतिबंध, धमकियाँ और पुलिस की कार्रवाई की जाती, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग शायद कभी उस मुकाम तक नहीं पहुँच पाते। विपक्ष में रहते हुए विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में मनाना और सत्ता में आने पर उसी कार्य को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानना घोर पाखंड है।

दीपके ने कहा- हम विशेषाधिकार या विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। हम बस उन अधिकारों का प्रयोग करने की मांग कर रहे हैं जो इस गणतंत्र के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त हैं, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो। इसलिए आइए, इस देश के नागरिक के रूप में अपने कर्तव्य का पालन करें, जिन्हें हम चुनते हैं उनसे सवाल करें, जवाबदेही की मांग करें और जब भी हम अन्याय देखें तो आवाज उठाएं। जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता की बात सुनने के लिए बाध्य है, न कि उन्हें चुप कराने के लिए। मतदान के बाद लोकतंत्र समाप्त नहीं हो जाता।

आप ने निकाली तिरंगा यात्रा

आम आदमी पार्टी  के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राजधानी में चुनाव आयोग के खिलाफ कथित अनियमितताओं को लेकर ‘तिरंगा रैली’ निकाली। दिल्ली आप प्रमुख सौरभ भारद्वाज, जिन्होंने शुक्रवार को राष्ट्रीय ध्वज लेकर निकाली गई इस रैली में भाग लिया, ने राजधानी में भारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। भारद्वाज ने कहा, “यह सरासर पागलपन है कि वे कह रहे हैं कि हम भारत में तिरंगा नहीं फहरा सकते! हम इसे क्यों नहीं फहरा सकते? क्या हम कुछ गलत कर रहे हैं? और क्या यही वह संघर्ष नहीं था जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा गया था? अंग्रेजों ने कहा था कि ब्रिटिश ध्वज फहराया जाएगा; भारतीयों ने जोर देकर कहा कि हम अपना तिरंगा फहराएंगे। इसलिए आज हम इसे फहरा रहे हैं, और हम इसे राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने फहरा रहे हैं!”

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा प्रस्तावित “लहरा दो तिरंगा” विरोध प्रदर्शन से पहले, दिल्ली पुलिस शुक्रवार को कनॉट प्लेस और सेंट्रल दिल्ली के आसपास 6,000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया, जबकि अधिकारियों ने कहा कि “कुछ चुनिंदा लोगों” को “उचित स्थान” पर मार्च निकालने की अनुमति दी जा सकती है। स्थानीय पुलिस की तैनाती उन लगभग 26,000 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों के अतिरिक्त है, जिन्हें पिछले सप्ताह मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुख्य न्यायिक न्यायाधीश द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों के आह्वान के बाद राजधानी में तैनात किया गया है। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, शुक्रवार को मध्य दिल्ली में लगभग 32,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। जवानों ने सुबह से मोर्चा संभाल लिया है। धारा 163 पहले से ही लागू है।

संजय सिंह ने लिखा  “विनाश काले विपरीत बुद्धि. मोदी जी आप तिरंगे से इतना क्यों डरते हैं? अभिजीत दीपके को हिरासत में लेकर क्या हासिल करोगे आप? आंदोलन और बढ़ेगा तिरंगा और लहराएगा.” इससे पहले दिल्ली पुलिस की एक टीम ने अभिजीत दीपके को उसी जगह जाकर हिरासत में ले लिया, जहां वह ठहरे हुए थे. दीपके जैसे ही प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के लिए हाथ में तिरंगा लेकर बाहर निकले, वहां मौजूद पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा, ”हम आपको प्रिवेंटिव हिरासत में ले रहे हैं.” दीपके तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क जा रहे थे. सीजेपी ने शुक्रवार शाम को दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम के तहत प्रदर्शन का आवाह्न किया था. दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद सीजेपी के कई समर्थक तिरंगा लेकर दिल्ली की सड़कों पर मार्च निकालते हुए दिख रहे हैं. ये लोग सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाते हुए भी नज़र आए.

योगेंद्र यादव ने कहा “पहले 50 साल तिरंगे से ‘द्वेष’ फिर 25 साल तिरंगा ढोने का ‘ढोंग’ अब देशभक्त युवाओं के हाथ में तिरंगा देखकर ‘डर’. यह है आरएसएस और बीजेपी की तिरंगा यात्रा.” इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को उसी जगह जाकर हिरासत में ले लिया, जहां वो दिल्ली आकर ठहरे हुए थे. जबकि छात्र संगठन आइसा की प्रमुख नेहा बोरा को मंडी हाउस इलाक़े से हिरासत में लिया गया है.

केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है.

उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा “हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे? जिन्हें भारतीय तिरंगे से परेशानी है, वो पाकिस्तान चले जाएं.”

इससे पहले अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो शेयर करते हुए अरविंद केजरीवाल ने लिखा, “ये तो सरासर तानाशाही है. क्या तिरंगा लहराना जुर्म है? अभिजीत की गिरफ़्तारी दिखाती है कि मोदी जी इनसे कितने डरते हैं.”

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद एक्स पर एक पोस्ट में सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है.

ममता बनर्जी ने लिखा, “दिल्ली पुलिस आख़िर कर क्या रही है. अभिजीत दीपके को भारतीय राष्ट्रीय झंडा थामने के लिए हिरासत में लिया गया है. ज़रा इस बात पर गौर कीजिए. आज़ाद भारत में हमारे युवाओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल करने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है.”

उन्होंने लिखा, “यह किसी अघोषित आपातकाल से कम नहीं है. असहमति से डरने वाली सरकार अब पूरी एक पीढ़ी को डराकर खामोश करने की कोशिश कर रही है. यह एक फासीवादी शासन का आचरण है, जो उस आवाज़ को बर्दाश्त नहीं कर सकता, जिसे वह नियंत्रित नहीं कर सकता.”

आईएएस  डॉ. पुरुषोत्तम मेघवाल ने लिखा -आज शाम पाँच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कुछ लोग तिरंगा लहराना चाहते हैं और राष्ट्रगान गाना चाहते हैं। बस इतना।

इसके जवाब में दिल्ली में क्या-क्या हुआ, वह गिनिए। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने पार्क को दो दिन के लिए बंद कर दिया, कारण “प्रशासनिक”। पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन-स्थल नहीं है और वहाँ निषेधाज्ञा लागू है। व्यापारी संघों से “अनियंत्रित तत्वों” से सुरक्षा की अर्जी दिलवाई गई, त्योहार का मौसम है। और फिर पुलिस का सबसे अद्भुत वाक्य, “सीमित संख्या में लोगों को किसी उपयुक्त स्थान पर तिरंगा लहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति दी जा सकती है।”

इसे धीरे से पढ़िए। भारत में अब तिरंगा लहराने के लिए सीमित संख्या तय होगी। स्थान पुलिस बताएगी कि उपयुक्त है या नहीं। और राष्ट्रगान गाने की अनुमति दी “जा सकती है”।

यह वही देश है जिसने दो साल पहले “हर घर तिरंगा” का अभियान चलाया था, जहाँ सरकारी विज्ञापन कहते थे कि झंडा हर हाथ में हो। तब हाथ में झंडा देशभक्ति थी। आज वही झंडा कनॉट प्लेस में “अनियंत्रित तत्व” की पहचान है। झंडा नहीं बदला। उसे थामने वाले से राज्य का रिश्ता बदल गया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कल इस मार्च को रोकने से इनकार कर दिया। कहा, पुलिस का आश्वासन दर्ज है, आगे 3 नवंबर को देखेंगे। यानी किसी अदालत ने इस मार्च को गैरकानूनी नहीं कहा। एक पार्क को “प्रशासनिक कारणों” से बंद करके, व्यापारियों की अर्जी दिखाकर, और धारा 163 के पुराने आदेश को नया बताकर, जो कानूनी है उसे असंभव बनाया जा रहा है। यह प्रतिबंध नहीं है, इसे “घेरेबंदी से इनकार” कहते हैं। कागज़ पर अधिकार बचा रहता है, ज़मीन पर खत्म।

और जिस आदमी ने पाँच बजे का समय दिया है, वह लिख रहा है कि उसके ठिकाने को चारों तरफ से सादी वर्दी वालों ने घेर रखा है और एक सफेद स्कॉर्पियो हर जगह पीछे चलती है। यह आरोप है, पुलिस ने इस पर कुछ नहीं कहा। पर इतना याद रखिए कि यही आदमी छह दिन पहले हवाई जहाज़ के भीतर से उतारा गया था। आरोप पर संदेह करने की जगह कम बचती है।

कल इसी आदमी के साथ प्रेस के सामने प्रशांत भूषण, प्रकाश राज, अंजलि भारद्वाज और निखिल डे बैठे थे। और तीन छात्र संगठन। उसने एक वाक्य कहा जो किसी राजनीतिक दल ने अब तक नहीं कहा, “अगर वोट का अधिकार नहीं बचा तो लोकतंत्र नहीं बचेगा, इसलिए विचारधारा का झगड़ा बाद में।” एक सत्ताईस साल का लड़का, जिसे कीड़ा कहा गया था, आज इस देश के विपक्ष को एक साथ बैठने का रास्ता दिखा रहा है। इसे व्यंग्य समझिए या इतिहास, आपकी मर्जी।

उसने एक गणित भी रखा जो हर मतदाता को समझना चाहिए। तेरह करोड़ नाम हटे हैं, लगभग चौदह प्रतिशत। 2024 में दर्जनों सीटें कुछ हज़ार वोटों से तय हुई थीं। अगर किसी क्षेत्र में चौदह प्रतिशत नाम गायब हों और वे गलत हों, तो उस क्षेत्र का परिणाम किसने तय किया, जनता ने या सूची ने? यह प्रश्न न विपक्ष का है, न पक्ष का। यह उस आदमी का है जिसका नाम कटा है और उसे अभी पता भी नहीं।

आज सुप्रीम कोर्ट में भी फाइलें पड़ी हैं। कल अदालत ने पूछा था कि जंतर-मंतर हटाने का फैसला किस समिति ने, कब और क्यों लिया, और पिछले पंद्रह दिनों की हर निषेधाज्ञा माँगी थी। आज शाम पाँच बजे उसी निषेधाज्ञा के सहारे एक पार्क घेरा जाएगा जिसे अदालत अभी परख ही रही है। सरकार अदालत के फैसले का इंतज़ार नहीं कर रही, वह फैसले से पहले ज़मीन तय कर रही है।

राष्ट्र झंडे से नहीं, झंडा उठाने वाले हाथों के चरित्र से बनता है। आज वही हाथ “सीमित संख्या” में गिने जाएँगे। गांधी ने दांडी में नमक उठाया था, वह भी एक “निषिद्ध” वस्तु थी। अंग्रेज़ों को तब भी लगा था कि मुट्ठी भर नमक से क्या होगा।

शाम पाँच बजे तक एक प्रश्न अपने पास रखिए।

जिस देश में सरकार कहे कि तिरंगा लहराने के लिए संख्या, स्थान और अनुमति चाहिए, उस देश में तिरंगा किसका है, लहराने वाले का, या अनुमति देने वाले का?

— डॉ. पुरुषोत्तम मेघवाल

Meghwal’s IAS एवं Bhu-Gyan Consultancy Services, भोपाल

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