सुधीर सिंह/ इलाहाबाद
आज दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार दूधनाथ सिंह के 90वें जन्मदिन के अवसर पर हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज में दूधनाथ सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत “हमारा समय और आंबेडकर” विषय पर व्याख्यान का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में आलोचक संजीव कुमार ने दूधनाथ सिंह को एक इतर निगाह का कहानीकार बताया। उन्होंने कहा कि हमारे समय का विद्रूप यह है कि जनता अपनी सरकार नहीं चुन रही बल्कि सरकार अपनी जनता चुन रही है। अंबेडकर ने स्पष्ट कहा था कि राजनीति में व्यक्ति पूजा तानाशाही का मार्ग प्रशस्त करती है। आज हम यह दौर देख रहे हैं। आज के समय के सामाजिक कष्टों का निवारण अंबेडकर के आर्थिक लोकतंत्र के विचार में है, जहां सामाजिक और आर्थिक बराबरी की परिकल्पना है जिसको अंबेडकर राजकीय समाजवाद की संकल्पना के रूप में प्रस्तुत करते हैं।


कार्यक्रम की अध्यक्ष अनीता भारती ने कहा कि जाति को अलग करके अंबेडकर के विचारों को नहीं समझा जा सकता। सामाजिक लोकतंत्र के अभाव में आर्थिक लोकतंत्र अधूरा है। हमारी पीढ़ी की असफलता यह रही कि हम मार्क्स, अंबेडकर और स्त्री विमर्श में समान धरातल नहीं ढूंढ पाए, जिनको अब तक ढूंढ लेना चाहिए था। यह हमारी चूक रही कि हमने केवल पढ़ा और सड़कों पर नहीं आए। उस कमी को आज की पीढ़ी पूरा कर रही है। आज का जो यह दौर आया है इसकी आशंका अंबेडकर को पहले से थी और आज के दौर में जो समस्याएं हैं उसका निराकरण भी अंबेडकर के यहां उपलब्ध है।


दूधनाथ सिंह के छोटे पुत्र अंशुमान सिंह ने इस अवसर पर दूधनाथ सिंह और इलाहाबाद से संबंधित अपनी स्मृतियों को साझा किया।आरम्भ में संयोजक सुधीर सिंह ने इस आयोजन के संबंध में बताया।कार्यक्रम के इस अवसर पर श्रीप्रकाश मिश्र, हरिश्चंद्र द्विवेदी, असरार गांधी, अनीता गोपेश, आनंद मालवीय, अनिल तिवारी ( दिल्ली) अशरफ अली बेग, अनिल रंजन भौमिक, संतोष भदौरिया, सूर्यनारायण, विवेक निराला, कुमार वीरेंद्र, अनुपमा ठाकुर, सुनील विक्रम सिंह, गायत्री गांगुली, प्रियदर्शन मालवीय, आलोक श्रीवास्तव , विश्वनाथ भट्टाचार्य, शैलेन्द्र सिंह, सीमा आजाद, मोहन लाल यादव, डॉ संतोष सिंह, विभु प्रकाश सिंह, विकास स्वरूप,केतन यादव प्रमुख रूप से उपस्थित थे।मंच का संचालन मयंक खरे ने और धन्यवाद धर्मेंद्र यादव ने किया।






