चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
कल दिल्ली पुलिस ने सारी हदे पर कर दी । पुलिस कमिश्नर बताएँ ये लोग कौन हैं जो पुलिस के साथ लाठी लेकर आए थे? इनको सिविल कपड़ो में लाठीचार्ज की अनुमति किसने दी। हमारे देश के बच्चों पर लाठियों, आसु गैस के गोलों चलवा युवाओं की आवाज़ नहीं दबाई जा सकती। ये छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिन्हें मारा-पीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है। नरेंद्र मोदी ने इसके लिए माफी तक नहीं मांगी है। ये युवा देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
वैसे यह बताया जा रहा है कि इसका नाम हनी डागर (जाट) है. दिल्ली पुलिस के इस अनऑफिशियल सिपाही का हेयर स्टाइल और दाढ़ी देखो. ये जंतर मंतर पर सादी वर्दी में युवाओं को डंडे मार रहा था। इसके हुलिए को ही देख लो कहीं से ये दिल्ली पुलिस का जवान नहीं लग रहा है ? पुलिस के अधिकारियों को भी ऐसी मोटी बुद्धि के फुकरे लोगों का इस्तेमाल करना बखूबी आता है, जो इन्हें बिना वर्दी पहने प्रोटेस्ट के बीच भेज दिया। जिस अकड़ अहंकार और बदतमीज भाषा के साथ उठकर ये युवक को डंडा मार रहा था उसके बाद ये जाटों के निशाने पर ही सबसे ज्यादा है।
जाटों का एक नियम होता है कि अगर वाहियात आदमी अपनी कम्युनिटी का हो तो भी वे उस का फेवर नहीं करते बल्कि उसे और भी ज्यादा बहिष्कृत करते दुत्कारते हैं और उसी का नतीजा है कि ट्रोल होने के बाद ये कायरों की तरह अपना इंस्टाग्राम अकाऊंट डिलीट करके भाग गया है। लेकिन iइंस्टाग्राम डिलीट होने से क्या होता है, इसकी ट्रोलिंग होती रहेगी और सारी उम्र होती रहेगी।

ये वहां ड्यूटी करने गया था या पिकनिक मनाने और गुंडागर्दी करने, इस अंदाज से डंडे मार रहा था जैसे अपने खेत से किसी पशु को निकाल रहा हो।अगर विभाग की ड्यूटी कर रहे हो तो नियमों में रहकर करो, ज्यादा बड़े ठेकेदार मत बनो।
इस प्रकरण से सीख लें कि अगर आपके अंदर गुण नहीं हैं तो सूखी हवाबाजी में अपनी गाड़ी के पीछे या इंस्टाग्राम की bio में खुद को जाट लिखना बंद करो। अगर आप डिजर्व नहीं करते तो जाट होने पर गर्व करने का आपको कोई हक नहीं है। इसके जाट होने पर ज्यादा फोकस इसलिए है, क्योंकि इसकी iइंस्टाग्राम के बायो में ‘जय जाट देवता’ और ‘जय बाबा की’ लिखा हुआ था। ऐसे लोगों को ही मनोहर लाल खट्टर ने कंधे से नीचे ताकतवर बताया था, मतलब ये कंधे से ऊपर मोटी बुध्दि के बैल होते हैं। इसीलिए ये अच्छी खासी नौकरी होने के बावजूद फुकराई कल्चर से बाहर नहीं निकल पाते।
वहीं दूसरी तरफ़ सुरेंद्र राजपूत कहते हैं आपको पता है कि देश के गृहमंत्री ने आंदोलन से निपटने के लिए एक MSF नाम की फोर्स बना रखी है ? यह फोर्स कैसे बनी,क्या करती है, इसके रंगरूट कहाँ भर्ती होते हैं, यह क्या करते हैं, जानने के लिए समझिये की यह है क्या!
MSF यानि Modi-Shah Force !
यह बिना वर्दी पहने या बहुत बार बिना नाम की वर्दी पहने गुंडे युवाओं की एक फोर्स है, जो शाह जी के एक इशारे पर अपने विरोधियों को लाठी डंडों से कुचलने निकल पड़ती है !
यह हमारी आधिकारिक पुलिस के साथ खड़ी होती है मगर काम अनाधिकारिक करती है । जो काम वर्दी अपनी संवैधानिक सीमाओं के चलते नही कर सकती,वह यह करती है, बेधड़क और पूरी बेहयाई से करती है!
आपको याद होगा कि RSS हर साल जगह जगह युवाओं को लाठियां चलाने की हिंसक ट्रेनिंग देता है । यहीं से यह रंगरूट भर्ती होते हैं । जिन्हें लाठी चलाने और दूसरी हिंसक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाता है । यह युवा किस दिन केलिए तैयार होते हैं, इन्ही दिनों केलिए,जब मोदी शाह घिरे,तो यह हिंसक रूप से लड़ाई झगड़ा,दंगा दमन कर सकें ?
आप एक पूरा पैटर्न देखिए,जब जब आंदोलन होते हैं । पुलिस के साथ एक पूरी टोली होती है, जिसके हाथ मे लाठियां और हिंसक सामान होता है । जो पुलिस के साथ मिलकर यह इस्तेमाल करते हैं । यह भीड़ पर हमला करते हैं । हिंसा करते हैं, इनके नाम और चेहरे गायब रहते हैं ।।यह बहुत बार मुँह पर रुमाल बांधकर विरोधियों पर हमला करते हैं । यह पूरी एक भूमिगत फोर्स है, जो हर उस जगह खड़ी होती है, जहां मोदी शाह की आलोचना होती है । यह आरएसएस के प्रशिक्षित लठैत हैं, वरना उनकी लाठी की ट्रेनिंग लिए लड़के और क्या करने के लिए तैयार किये जा रहे हैं?
युवाओं के आंदोलन पर भी इनके हिंसक हमले की तस्वीरें,वीडियो अब आम जनता देख रही है । जबकि यह शुरू से इनका ऐसा ही इस्तेमाल कर रहे हैं ।।यही लोग शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाते हैं । फिर आंदोलन को बदनाम करके उसका दमन करते हैं । युवाओं केकल के आंदोलन ने इनके सबके चेहरे पूरी तरह बेनकाब कर दिए हैं! आरएसएस के लाठी प्रशिक्षित युवाओं को अमित शाह हर जगह निजी तौर पर इस्तेमाल करते हैं ।यह इनकी गोपनीय भूमिगत MSF है ?
जो बेनकाब हो गई है । सारा देश बिना वर्दी के लाठी लिए इन गुंडों को देख रहा था, जो पुलिस के साथ मिलकर वह कर रहे थे,जो सँविधान की प्रतिज्ञा से बंधी पुलिस नही कर पा रही थी । देश को इस प्राइवेट फोर्स से भी सतर्क रहना होगा, क्योंकि यह कल आपके घरों तक आ धमकेंगे । MSF आपको बोलने नही देंगे,आपके विरोध पर वह हमला करेंगे!






