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फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में प्रिंसिपल पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं और आरक्षित श्रेणी के पदों को न भरे जाने पर जाँच की मांग की

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चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली 

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) के महासचिव प्रोफेसर के.पी.सिंह ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, पिछड़ा वर्ग के कल्याणार्थ संसदीय समिति व दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में प्रिंसिपल पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं और आरक्षित श्रेणी के पदों को न भरे जाने पर जाँच की मांग की है। प्रोफेसर सिंह ने बताया है कि वर्ष 2021 में प्रिंसिपल के पदों के लिए आवेदन मांगें गए थे। इस पद के लिए आरक्षित श्रेणी में (एससी /एसटी व ओबीसी) अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया था लेकिन साक्षात्कार के पहले ही बहुत से अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने किसी भी एससी व ओबीसी अभ्यर्थी की नियुक्ति नहीं की। इसलिए इस विषय पर तुरन्त हस्तक्षेप करते हुए इसकी निष्पक्ष जाँच कराएँ जाने की मांग दोहराई है।

प्रोफेसर सिंह के अनुसार वर्ष 2021 में एससीईआरटी ने प्रिंसिपल के 8 पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापित रिक्तियों के अनुसार, छह पद अनारक्षित थे, एक पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित था और एक पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित था। उन्होंने बताया कि चयन समिति ने अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणियों के लिए आरक्षित पद खाली रखे गए, जबकि सामान्य श्रेणी के अंतर्गत नियुक्तियाँ कर दी गईं। आरक्षित वर्ग की सीटों पर नियुक्तियों की उपेक्षा पूरी तरह से निष्पक्ष प्रतिनिधित्व और आरक्षण प्रावधानों के कार्यान्वयन के संबंध में चिंताएँ उत्पन्न करती हैं। नियमतः आरक्षित वर्ग के पदों पर नियुक्ति का उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों से संबंधित उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

प्रोफेसर सिंह ने बताया है कि भरे गए पदों के संबंध में भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे। इस चयन प्रक्रिया पर कुछ अभ्यर्थियों द्वारा शिकायतें प्रस्तुत की गईं और मामले की जाँच के लिए एक तथ्य-खोज समिति (Fact-Finding Committee) का गठन किया गया। जानकारी के अनुसार, समिति ने नवंबर 2025 में अपनी निष्कर्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी लेकिन उसे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। इतना ही नहीं रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बावजूद, यह आरोप है कि अभी तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है और यह मामला संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभी भी लंबित है। परिणामस्वरूप, पारदर्शिता, जवाबदेही और भर्ती मानदंडों के पालन से संबंधित चिंताएँ अभी भी अनसुलझी बनी हुई हैं।

प्रोफेसर सिंह ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, दिल्ली के शिक्षा मंत्री से उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए जाने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि SCERT द्वारा 2021 के विज्ञापन के अंतर्गत प्रिंसिपल पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच करें। उन परिस्थितियों की भी समीक्षा करे जिनके कारण अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणियों के आरक्षित पद खाली रह गए। उन्होंने यह भी मांग की है कि नवंबर 2025 में प्रस्तुत तथ्य-खोज समिति के निष्कर्षों पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके। साथ ही इस भर्ती प्रक्रिया में जहाँ कहीं भी अनियमितताओं की पहचान हुई है, वहाँ चयनित उम्मीदवारों की पात्रता और सहायक दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दें। यदि भर्ती नियमों या पात्रता मानदंडों का कोई उल्लंघन सिद्ध होता है तो कृपया उचित सुधारात्मक उपायों की अनुशंसा करें—जिसमें नियुक्तियों की समीक्षा भी शामिल है। आपको बताना चाहते हैं कि यह नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और आरक्षण संबंधी प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़ा है। आपके हस्तक्षेप से सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं में विश्वास सुनिश्चित करने और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करने में सहायता मिलेगी।

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