बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के ग्राहकों के लिए ब्याज दरों से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। दोनों सरकारी बैंकों ने कुछ चुनिंदा अवधि के लिए अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 से 10 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की है। बैंक द्वारा जारी नई दरें 12 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं। इस बदलाव का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके लोन की ब्याज दर MCLR से जुड़ी हुई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने बढ़ाया MCLR
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिसके नीचे बैंक आमतौर पर कुछ प्रकार के फ्लोटिंग रेट लोन पर ब्याज नहीं दे सकते। इसमें बदलाव होने पर होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन या अन्य ऋणों की ब्याज लागत प्रभावित हो सकती है, हालांकि वास्तविक असर ग्राहक के लोन के रीसेट नियम और संबंधित अवधि पर निर्भर करता है। बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने सभी अवधि की दरों में एक समान वृद्धि नहीं की है। कुछ खास टेन्योर में MCLR को बढ़ाया गया है। इसका मतलब है कि हर ग्राहक की EMI तुरंत और समान रूप से बढ़ेगी, ऐसा जरूरी नहीं है।
MCLR बढ़ने से EMI पर क्या असर होगा?
अगर किसी ग्राहक का लोन MCLR आधारित है और उसकी ब्याज दर रीसेट डेट पर नई MCLR के अनुसार तय होती है, तो ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक के होम लोन की ब्याज दर MCLR में बदलाव के साथ रीसेट होती है, तो नई दर लागू होने के बाद उसकी मासिक किस्त में कुछ वृद्धि संभव है। हालांकि वास्तविक बदलाव लोन की बकाया राशि, शेष अवधि, ब्याज दर और बैंक के स्प्रेड पर निर्भर करेगा।
10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कितनी होती है?
ब्याज दरों में 1 बेसिस पॉइंट यानी 0.01 प्रतिशत के बराबर होता है। इस हिसाब से 10 बेसिस पॉइंट की वृद्धि 0.10 प्रतिशत होती है। पहली नजर में यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन बड़े लोन और लंबी अवधि में ब्याज लागत पर इसका असर दिखाई दे सकता है। उदाहरण के लिए, 0.10 प्रतिशत की मामूली दर वृद्धि भी लाखों रुपये के लंबे समय के लोन में अतिरिक्त ब्याज का कारण बन सकती है। इसलिए MCLR आधारित लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए नई दरों पर नजर रखना जरूरी है।
पुराने ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
MCLR में बदलाव के बाद मौजूदा लोन ग्राहकों को सबसे पहले अपने लोन की ब्याज दर और अगली रीसेट डेट की जांच करनी चाहिए। बैंक के लोन स्टेटमेंट या इंटरनेट बैंकिंग में इसकी जानकारी मिल सकती है। अगर ब्याज दर बढ़ने से EMI पर दबाव पड़ता है, तो ग्राहक बैंक से रीपेमेंट विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त भुगतान करके मूलधन कम करना भी ब्याज के बोझ को घटाने में मदद कर सकता है।
नए लोन लेने वालों के लिए जरूरी बात ?
नया लोन लेने वाले ग्राहकों को केवल मौजूदा ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। बैंक का स्प्रेड, रीसेट फ्रीक्वेंसी, प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट नियम और भविष्य में ब्याज दर बदलने की संभावना जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है। MCLR में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग सेक्टर में फंडिंग लागत और ब्याज दरों से जुड़े बदलाव पर ग्राहकों की नजर बनी हुई है। इसलिए लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों की प्रभावी ब्याज दर और शर्तों की तुलना करना समझदारी होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक द्वारा MCLR में 5 से 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से MCLR आधारित लोन ग्राहकों की भविष्य की ब्याज लागत प्रभावित हो सकती है। हालांकि हर ग्राहक पर असर अलग होगा। इसलिए अपनी लोन रीसेट डेट, लागू MCLR और बैंक द्वारा लगाए गए स्प्रेड की जानकारी लेना सबसे जरूरी है।






