भारत और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) केवल एक व्यापारिक करार नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और सामरिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक व्यापार मार्गों पर बढ़ते जोखिमों के बीच भारत ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहा है जो उसके व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकें। इसी संदर्भ में ओमान के साथ बढ़ता सहयोग विशेष महत्व रखता है। ओमान अरब सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण देश है, जो भारत के लिए पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बाजारों तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है। भारत और ओमान के बीच CEPA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, जिससे भारतीय उत्पादों को ओमानी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा। इसके अलावा भारतीय कंपनियों के लिए निवेश और कारोबार के नए अवसर भी खुलेंगे।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा फायदा ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने में मदद करेगा। भारतीय निर्यातकों को कई उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी में राहत मिलने की संभावना है, जिससे उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक किफायती बन सकेंगे। इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों को इसका विशेष लाभ मिल सकता है। ओमान के बंदरगाहों और लॉजिस्टिक नेटवर्क का उपयोग करके भारत अपने व्यापारिक मार्गों को और अधिक मजबूत बना सकता है। इससे पश्चिम एशिया और अफ्रीका के देशों तक भारतीय सामान की पहुंच तेज और आसान हो सकती है। साथ ही, व्यापारिक जोखिमों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
भारत और ओमान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। ओमान लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार रहा है। CEPA के माध्यम से दोनों देशों के बीच ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा, यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और गहरा करेगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए ओमान एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है। व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बढ़ते संबंध दोनों देशों के हितों को नई दिशा दे सकते हैं।
भारत-ओमान CEPA केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का भी हिस्सा है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को नए अवसर देने के साथ-साथ देश की व्यापारिक और सामरिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव भारत और ओमान दोनों की अर्थव्यवस्थाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकते हैं।






