चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने आज देशव्यापी प्रदर्शन किया है। दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला, देहरादून, लखनऊ, पटना, कोलकाता और गुवाहाटी से विरोध की खबरें आई हैं। शिमला में उनका पुतला जलाया गया। पटना में प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ। दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रशासन ने बैरिकेड लगाए हैं। कुछ जगहों पर आज की जगह कल प्रदर्शन किया जाएगा। तिरुवनंतपुरम में शाम को प्रदर्शन होना है।
भारतीय युवक कांग्रेस ने आज शुक्रवार को पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर हलचल मचा दी।यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी कार्यक्रम का हिस्सा था. भारतीय युवक कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी में रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च किया. भारतीय युवक कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा, “हम आगे बढ़ेंगे और आगे बढ़ते रहेंगे, हमें कोई नहीं रोक सकता. ये ज्ञानेश, देश का गद्दार है! धोखा करने के बाद उसे लगता है कि वह बच जाएगा, लेकिन वह नहीं बचेगा. तिहाड़ जेल जाने का उसका रास्ता तय है. ज्ञानेश, बस हो गया भाई! तुम बच नहीं सकते. और अगर गलती से देश छोड़ने की कोशिश की, तो यूथ कांग्रेस के सदस्य हर एयरपोर्ट पर खड़े हैं. अगर हमने तुम्हें भागने की कोशिश करते देखा तो वहीं पकड़ लेंगे, ज्ञानेश. तुम बच नहीं सकते. तुम्हें जेल जाना तय है.” चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन कई राज्यों में तेज हो गए हैं.
उन्होंने आगे कहा, “तुमने 1.4 अरब देशवासियों के वोट देने के अधिकार को लूट लिया है. हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे. यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक की है. और जब तक यह ज्ञानेश जेल में नहीं जाता, जब तक उसे हथकड़ी नहीं लगती, हम पीछे नहीं हटेंगे. इस ज्ञानेश को जेल जाना ही होगा. यह गद्दार, अमित शाह और मोदी का मोहरा है, बच नहीं सकता. उन्हें सत्ता में बनाए रखने के लिए उसने देश और उसके लोकतंत्र को बर्बाद करने की कोशिश की. वह बच नहीं सकता. ज्ञानेश जेल जाएगा. हम इस ज्ञानेश को नहीं छोड़ेंगे.”
बिहार के पटना में बिहार के में पटना में भारतीय युवक कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया।पटना में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय युवक कांग्रेस ने ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.

पंजाब में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पानी की बौछारें कीं. कुछ प्रदर्शनकारी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गाड़ियों के ऊपर भी चढ़ गए. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन किए.
हिमाचल प्रदेश के शिमला में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर लगे आधिकारिक बोर्ड को काला कर दिया.
उत्तराखंड के देहरादून में कांग्रेस की राज्य प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य सचिवालय स्थित चुनाव कार्यालय की ओर मार्च किया.
मणिपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष ओक्रम इबोबी सिंह और कांग्रेस विधायक दल के नेता कीशम मेघचंद्र सिंह के नेतृत्व में लैंफेलपत स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च किया. प्रदर्शनकारियों ने कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की और CEC का पुतला जलाया. बाद में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई. इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए.
जम्मू में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया. वहीं, श्रीनगर में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के अंदर प्रदर्शन किया और कुमार के इस्तीफे की मांग वाले बैनर दिखाए. लखनऊ, गुवाहाटी और कोलकाता में भी प्रदर्शन हुए.
ये प्रदर्शन SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हो रहे हैं. यह विवाद एक इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और डेटाबेस तक पहुंच से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी.
इस आक्रोश की ताज़ा वजह इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट है जिसके मुताबिक़ दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फ़ैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की। इनमें SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल भी हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग राय आना सामान्य है और उसके आदेश वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी हुए हैं। लेकिन जब मामला करोड़ों नागरिकों के मतदान अधिकार का हो, तो केवल सफ़ाई देना काफ़ी नहीं; उठे हुए सवालों का बिंदुवार, दस्तावेज़ी जवाब चाहिए।
जंतर–मंतर पर आज प्रशासन ने बैरिकेडिंग की है। लेकिन उससे बड़ा दृश्य देश के कई शहरों में उठता अविश्वास है। बैरिकेड सड़क रोक सकते हैं; आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवालों का जवाब नहीं दे सकते। निष्पक्ष चुनाव के लिए ज़रूरी है कि आयोग दर्ज आपत्तियों, निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में हुए बदलावों का पूरा रिकॉर्ड सामने रखे।









