श्याम लाल शर्मा/नई दिल्ली/ छाया – आशीष कर/ आर बी यादव
पूरे देश में वोट चोरी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। इंडिया गठबंधन ने लोकतंत्र बचाने, मुख्य चुनाव आयुक्त के त्याग पत्र को लेकर 6 अक्टूबर से अब तक लगातार विरोध प्रदर्शन किया। आज चौथे दिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों मे राष्ट्रपति भवन के लिए शुक्रवार की रात ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। इससे पहले इंडिया गठबंधन के सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए। यहां उन्होंने कथित “वोट चोरी” के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की। संसद भवन से मार्च निकाल रहे विपक्षी गठबंधन इंडिया के अन्य सांसदों को पुलिस ने विजय चौक पर रोक दिया था।
उसके बाद राष्ट्रपति भवन को प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम जो पहले ही भेज दिए गए थे 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल जिसमे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और वोट चोरी के मुद्दे पर ज्ञापन सौपा। राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी के अलावा प्रतिनिधिमंडल में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भाकपा के डी राजा भी शामिल थे।

विपक्ष की राष्ट्रपति को दी गई चार मांगे:
1. ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने वाला 2023 का कानून रद्द किया जाए.
2. एसआईआर पर तुरंत रोक लगे और मतदाता सूची से डिलीट किए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को वापस जोड़ा जाए.
3. चुनाव बैलट पेपर से कराए जाएँ.
4. पिछले 2 साल में हुये सभी विधानसभा चुनाव रद्द किये जायें – जिनके बारे में वोट चोरी के पक्के सबूत दिये गये हैं.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्ष से सबूत मांगे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के सामने भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में वोट चोरी हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताएं गंभीर हैं और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट जाएगा और वहां भी अपनी शिकायत रखेगा।उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को अदालत के सामने रखेगा। हालांकि, अदालत में किस तरह की याचिका या ज्ञापन दाखिल किया जाएगा, इसका विस्तृत विवरण सामने आने के बाद ही कानूनी कार्रवाई का दायरा स्पष्ट होगा।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने उन जगहों के बारे में जानकारी दी, जहां विपक्ष के मुताबिक वोट चोरी हुई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने इन आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे हैं और विपक्ष उन्हें जुटा रहा है। राहुल गांधी ने भी बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं को सुना। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने इस मामले पर विचार करने और कार्रवाई करने की बात कही है। हम विशेष रूप से चार दिन पहले शुरू किए गए वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन के बारे में राष्ट्रपति को जानकारी देने गए थे। हमने उनके सामने अपनी बात विस्तार से रखी।हमने वोट चोरी के मुद्दे और ज्ञानेश कुमार की ओर से की गई गंभीर गलती को प्रमुखता से उठाया। हमने मांग की कि ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाएं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, राष्ट्रपति ने वोट चोरी की घटनाओं से जुड़े सबूत मांगे। हम फिलहाल इन सबूतों को एकत्र कर रहे हैं और उन्हें सौंपेंगे। हम अन्य सभी प्रासंगिक जानकारियां भी उपलब्ध कराएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने राष्ट्रपति के सामने यह मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह देश के लोकतंत्र को नष्ट करने पर आमादा हैं और इस दिशा में सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं।” खरगे ने कहा, “राष्ट्रपति ने हमारी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की गहनता से जांच करेंगी, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करेंगी और उचित कदम उठाने के बारे में निर्णय लेंगी।”
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होना भी चर्चा में रहा। वह इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च में शामिल हुईं।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “हमने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप दिया है। हमने इस मुलाकात को सकारात्मक नजरिये से देखा है। उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच करेंगी और पूरे विवरण को देखेंगी। इसके लिए उन्हें सबूतों की जरूरत है। उन्होंने हमसे सबूत भेजने को कहा है, जिस पर हमने सहमति जताई है।” उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता आपस में चर्चा करने के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा, “हम सभी एक साथ बैठेंगे और फिर आपको आगे की रणनीति के बारे में बताएंगे।” ममता बनर्जी ने कोलकाता से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रद्द होने पर कहा, “ट्रेनों को रद्द किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोलकाता से भी राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। छात्र और युवा वास्तव में संकट का सामना कर रहे हैं।”
विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार को दिल्ली में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाया। संसद पहुंचे कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।वेणुगोपाल ने कहा, “हम जो भी कदम उठाने का फैसला करेंगे, उसके बारे में आपको बताएंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हम आंदोलन जारी रखेंगे। परसों तक हम अपने फैसले पर कायम रहेंगे।” राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “दिल्ली में अघोषित आपातकाल लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है।”

उन्होंने कहा, “पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। संविधान के संरक्षक के रूप में आपको उचित ध्यान देना चाहिए, ताकि देश में लोकतंत्र कायम रहे। राष्ट्रपति का रुख काफी सकारात्मक रहा। उन्होंने हमारी बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मामले की जांच करेंगी।”

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “10 सदस्य ज्ञापन सौंपने के लिए अंदर जा रहे हैं। हमारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। हमारा आंदोलन चलता रहेगा और जब तक हम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते, तब तक नहीं रुकेगा। हमारा लक्ष्य ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर पर रोक लगाना, 13.8 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची में बहाल करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना है। इसके अलावा, संसद में पारित उस प्रावधान को भी रद्द किया जाना चाहिए, जिसके तहत ज्ञानेश कुमार को आजीवन कानूनी संरक्षण दिया गया है।”
गौरतलब है कि पिछले 4 दिनों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों ‘लोकतंत्र बचाओ‘ मार्च लगातार जारी है।6 अक्टूबर को विपक्ष ने लोकतंत्र बचाने के मुद्दे पर मार्च निकाला। 7 अक्टूबर को सांसदों ने जंतर–मंतर की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। 8 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने कनॉट प्लेस से राजघाट तक मार्च किया। और आज 9 अक्टूबर को संसद में बैठक के बाद इंडिया गठबंधन के सांसदों ने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च किया और राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की। इन प्रदर्शनों के जरिए विपक्ष निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है।






