वैश्विक हालात और आयात में आई रुकावटों के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ना शुरू हो गया है। सरकार और तेल कंपनियों ने हालात को देखते हुए कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति को सीमित करने का फैसला लिया है। फिलहाल यह सिलेंडर केवल जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थानों जैसे अस्पतालों और स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर दिए जा रहे हैं। दूसरी ओर होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के लिए कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्ष और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं के कारण एलपीजी के आयात पर दबाव बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए सप्लाई चेन में थोड़ी भी रुकावट का असर सीधे घरेलू बाजार पर देखने को मिलता है। इसी वजह से तेल कंपनियों ने आपूर्ति प्रबंधन के तहत प्राथमिकता तय की है।

सबसे पहले अस्पतालों को कमर्शियल गैस उपलब्ध कराई जा रही है, क्योंकि अस्पतालों में भोजन व्यवस्था, कैंटीन और कई अन्य जरूरी सेवाओं के लिए एलपीजी का उपयोग होता है। इसके बाद स्कूलों और छात्रावासों को गैस सिलेंडर दिए जा रहे हैं ताकि बच्चों के भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
वहीं होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और कैटरिंग से जुड़े कारोबारियों को फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडर की नियमित सप्लाई नहीं मिल रही है। इससे खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई छोटे रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उनके कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुछ व्यापारियों ने वैकल्पिक ईंधन जैसे इंडक्शन कुकिंग या अन्य गैस स्रोतों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इस बीच घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतर बढ़ा दिया है ताकि स्टॉक का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। पहले जहां उपभोक्ता कम समय के अंतराल में नया सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब उन्हें कुछ अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी।
ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि आवश्यक सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति स्थिति सामान्य होगी, कमर्शियल गैस की सप्लाई भी धीरे-धीरे सामान्य कर दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण कई देशों को इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए आपूर्ति संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए प्राथमिकता आधारित वितरण नीति अपनाई गई है। फिलहाल आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन गैस का उपयोग सोच-समझकर करने की सलाह दी जा रही है। सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत के मुताबिक आगे भी फैसले लिए जा सकते हैं।






