श्याम लाल शर्मा/चौथा अक्षर
भाजपा अब कोई भी चुनाव हारना नहीं चाहती भले ही उसके लिए कुछ भी करना पड़े।राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा में हराने के लिए जब भाजपा कांग्रेस विधायक नहीं खरीद पायी तो उनकी उम्मीदवारी ही यह कहकर रद्द करा दी कि इनके खिलाफ तेलंगाना में मामला है जिसका उन्होंने जिक्र नहीं किया। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ‘वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ‘सीट चोरी’ का मामला बन गया है।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंगलवार को मध्य प्रदेश से पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंचे और अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने पर मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश और सचिन पायलट तथा कुछ अन्य नेता आयोग के मुख्यालय पहुंचे। कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज किया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है।
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का हताशापूर्ण प्रयास है। जब उन्हें (भाजपा को) एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका (मीनाक्षी नटराजन का) नामांकन खारिज करवा दिया।
वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह “वोट चोरी” पर आमादा है। हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ कानूनी तथा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
वहीं, मीनाक्षी नटराजन का नमांकन रद्द होने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि यह लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा है कि हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। साथ ही कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ सड़क पर उतरेगी।
निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे समय पर आया जब ‘क्रॉस वोटिंग’ से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था। दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु जाना था। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है।सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख थी जबकि आज नामांकन पत्रों की जांच की गई।
भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है, लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया। गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।
राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि भाजपा ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। नटराजन ने इस आपराधिक मामले में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल किया है, लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया।उन्होंने कहा कि इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया है। एससी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथ पत्र में आपको यह जानकारी देनी होती है।
क्या है केस
- 11 मई 2025: शिकायतकर्ता ए. श्रीलता की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया।
- 20 अगस्त 2025: ए. श्रीलता ने हैदराबाद की ‘फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट’ की अदालत में मीनाक्षी नटराजन (अभियुक्त नंबर 4) और अन्य के खिलाफ मुख्य याचिका (Complaint No. of 2025) दायर की। इसमें नटराजन पर BNS Act की धारा 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
- 17 सितम्बर 2025: माननीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मीनाक्षी नटराजन को ‘नोटिस टू रेस्पोंडेंट’ जारी किया। इस समन में उन्हें निजी तौर पर अदालत में पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया गया था।
- 24 अक्टूबर 2025: मीनाक्षी नटराजन की ओर से उनके वकील ने अदालत में एक जवाबी हलफनामा (Counter) पेश किया। इस जवाब में उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए पूरी शिकायत को “राजनीतिक विद्वेष” से प्रेरित बताया और इसे खारिज करने की मांग की।
- 17 नवम्बर 2025: अदालत ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जो आज भी जारी है।






