उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सड़क संपर्क को नई मजबूती देने वाले गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे परियोजना पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल क्षेत्र सहित कई गांवों में अधिग्रहित होने वाली जमीन की पहचान के लिए पीले रंग के पिलर लगाए जा रहे हैं। यह कदम इस बात का संकेत है कि परियोजना अब जमीन पर तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में निर्माण कार्य भी गति पकड़ सकता है।
सरकारी अधिकारियों की टीमें राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ गांव-गांव पहुंचकर भूमि का सीमांकन कर रही हैं। जिन किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य है कि अधिग्रहण से जुड़ी सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कर ली जाएं ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।
एक्सप्रेसवे से क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई दिशा ?
गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से दोनों क्षेत्रों के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, कृषि और परिवहन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय बाजारों तक किसानों की पहुंच आसान होगी। इसके अलावा पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी नई गति मिलने की संभावना है। यही कारण है कि इस परियोजना को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रशासन किसानों से लगातार संवाद भी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित लोगों को सरकार की नीति के अनुसार उचित मुआवजा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि किसी किसान को सीमांकन या मुआवजे को लेकर कोई आपत्ति होती है तो उसके समाधान के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।
पीले पिलर लगाने का कार्य पूरा होने के बाद भूमि का अंतिम सत्यापन किया जाएगा। इसके पश्चात अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर निर्माण एजेंसियों को कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे परियोजना की गति और तेज होने की उम्मीद है।
गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और आसपास के राज्यों के बीच आवागमन पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। इसके साथ ही परिवहन लागत में कमी आएगी, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलेगी। यही वजह है कि इस परियोजना को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल किया जा रहा है और इसके प्रत्येक चरण पर तेजी से काम किया जा रहा है।






