श्याम लाल शर्मा/ चौथा अक्षर/ नई दिल्ली/ छाया -आशीष कार/ आरबी यादव
आख़िरकार छात्रों और युवाओं के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुटने टेक ही दिए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा।जिस तरह की दहशत और दमन का माहौल आम जनमानस में घर कर गया था आज छात्रों और युवाओं ने उससे आजाद होने का एहसास करा दिया। नरेंद्र मोदी और अमितशाह द्वारा संचालित भाजपा जिस तरह दमन के रास्ते पर चल पड़ी थी उससे पूरा विपक्ष दहशत में था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से कोई सवाल पूछने की हिम्मत नहीं कर सकता था. लेकिन भारत के मुख्य न्यायाधीश के एक बयान ने न केवल काकरोच जानता पार्टी को जन्म दिया बल्कि नीट पेपर लीक के मामले को लेकर जिस शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया लाठी, डंडे खाये सरकार ने बेशर्मी की हद पार करते हुए पुलिसिया दमन किया उससे इन छात्रों और युवाओं का डर खत्म हो गया. कभी किसी से सीधे मुंह बात ना करने वाले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को आधी रात को इन छात्रों और युवाओं जेन जी ने रील बना कर भेजने पर मजबूर कर दिया. छात्रों और युवाओं का यह आंदोलन धीरे धीरे पूरे देश में फैलने लगा, सरकार सहम गई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ गया. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की ख़बर मिलते ही हजारों की तादाद में जंतर मंतर पर मौजूद छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। और यह इस्तीफ़ा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं हैं, अगर आप लोग इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो हम किसी का भी इस्तीफ़ा ले सकते हैं। दिपके ने कहा कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना चाहिए।
दिपके ने कहा कि उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा। और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडों जैसा बर्ताव किया, उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। याद रखें, कॉकरोच से पंगा न लें। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद समर्थकों को उत्साहपूर्वक संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर नयी दिल्ली के जंतर मंतर समेत देशभर में जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा।
प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही जिम्मेदारी ली है और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।
प्रधान ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के दिल्ली में जारी आंदोलन के मद्देनजर इस्तीफा दिया है। कॉजपा परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शन कर रही है और प्रधान का इस्तीफा उसकी प्रमुख मांगों में शामिल था।
जंतर-मंतर ने आज लोकतंत्र की मुरझाती क्यारियों में खाद और पानी डाल दिया है। जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल है तो प्रयागराज और नागपुर में भी खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।



नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है। सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई। उन्होंने कहा 2 मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो। ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है – अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। अब इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। डरो मत! गौरतलब है कि छात्रों और युवाओं की मांगों को लेकर राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठ गए थे और पुलिस उनको घसीटते हुए उठा ले गई थी उनकी नाक से ख़ून आने लगा था.

नेहा बोरा जो 23 दिनों से भूख हड़ताल पर थी बोलीं कल भी हम जीते थे, आज भी हम जीते है! ये जीत 36 दिन के आंदोलन की जीत है, ये जीत 23 दिन की भूख हड़ताल की जीत है, ये जीत उन तमाम लोगों की है जो पुलिस की लाठी और टियर गैस झेलते हुए भी आगे बढ़ते रहे। ये जीत हम सब के उस हौसले की जीत है जो भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद टूटा नहीं।






