संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित हुआ और हर साल की तरह इस बार भी देशभर से कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। बिहार के छात्रों ने एक बार फिर इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसी कड़ी में बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर निवासी अभिषेक चौहान ने अपने दूसरे ही प्रयास में 102वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, मित्रों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। अभिषेक की सफलता की खबर मिलते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।
अभिषेक चौहान की शुरुआती शिक्षा झारखंड के पुरुलिया स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल से हुई। उन्होंने वहीं से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे हाजीपुर आ गए और अपनी 12वीं की पढ़ाई यहीं से पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही अभिषेक की मेधा और लगन साफ दिखाई देने लगी थी। 12वीं में पढ़ाई करते समय ही उन्होंने देश की सबसे कठिन तकनीकी प्रवेश परीक्षाओं में से एक आईआईटी को क्रैक कर लिया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक को एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई और उनका करियर तेजी से आगे बढ़ने लगा। लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा और समाज के लिए करने की इच्छा थी। इसी सोच ने उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। नौकरी के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया कि वे सिविल सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करना चाहते हैं। यही सोच उन्हें वापस अपने घर हाजीपुर ले आई, जहां से उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की।
घर से की तैयारी, माता-पिता का मिला पूरा सहयोग ?
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता, लेकिन अभिषेक ने यह साबित कर दिया कि सही रणनीति और मेहनत से घर बैठे भी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने अपनी पूरी तैयारी हाजीपुर के दिग्घी पश्चिमी इलाके में स्थित अपने घर से ही की। इस दौरान उनके माता-पिता ने उनका हर कदम पर साथ दिया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
अभिषेक के पिता अभय कुमार सिंह हाजीपुर के आरएन कॉलेज में फिलॉसफी के प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वे नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में कुल सचिव के पद पर भी पदस्थापित हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल होने का असर अभिषेक की सोच और पढ़ाई पर भी पड़ा। उनके पिता ने हमेशा उन्हें मेहनत और ईमानदारी से काम करने की सीख दी। वहीं उनकी मां ने भी हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया अभिषेक बताते हैं कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान कई बार मुश्किलें भी आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने नियमित पढ़ाई, सही टाइम मैनेजमेंट और लगातार अभ्यास को अपनी सफलता का मूल मंत्र बनाया। उनका कहना है कि इस परीक्षा में धैर्य और निरंतरता बहुत जरूरी होती है।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता, युवाओं के लिए बने प्रेरणा ?
अभिषेक चौहान ने यूपीएससी परीक्षा में अपने दूसरे ही प्रयास में 102वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है। अभिषेक का परिवार भी उनकी सफलता से बेहद खुश है। उनके पिता अभय कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्होंने बताया कि अभिषेक बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेहनती और अनुशासित रहे हैं। यही गुण उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है। अभिषेक चौहान का संबंध प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी से भी है। रिश्ते में अभिषेक, वैभव सूर्यवंशी के मामा लगते हैं। इस वजह से खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में परिवार की पहचान और भी मजबूत हुई है।

आज अभिषेक की सफलता कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। खासकर छोटे शहरों और कस्बों के उन छात्रों के लिए जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से घबराते हैं। अभिषेक की कहानी यह बताती है कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो तो छोटे शहर से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने के लिए सबसे जरूरी है दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और परिवार का सहयोग। यही तीनों चीजें किसी भी व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचा सकती हैं।






