पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। देश में घरेलू एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। यह न केवल सरकार की प्रभावी नीतियों का परिणाम है, बल्कि मजबूत सप्लाई चेन और डिजिटल सिस्टम की सफलता को भी दर्शाता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, देशभर में घरेलू गैस की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं आई है। खासकर छोटे आकार के 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलिंडरों की मांग में तेजी देखी जा रही है। सोमवार को इन छोटे सिलिंडरों की बिक्री 1.10 लाख तक पहुंच गई, जो इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अब छोटे और सुविधाजनक विकल्पों को अधिक पसंद कर रहे हैं। 23 मार्च से लेकर अब तक 5 किलो वाले सिलिंडरों की कुल बिक्री 14.30 लाख तक पहुंच चुकी है, जो एक उल्लेखनीय वृद्धि है।
डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता और नियंत्रण ?
सरकार ने गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग किया है। मंत्रालय के अनुसार, ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में 98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उपभोक्ताओं को घर बैठे गैस बुक करने में आसानी हुई है और लंबी कतारों से भी राहत मिली है।
इसके साथ ही, गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी के समय साझा करना अनिवार्य होता है। इस पहल का असर भी सकारात्मक रहा है और लगभग 92 प्रतिशत डिलीवरी अब इसी प्रमाणीकरण प्रणाली के तहत हो रही है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि गैस सही उपभोक्ता तक ही पहुंचे और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगे।
पीएनजी कनेक्शन में भी तेजी ?
एलपीजी के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन के विस्तार पर भी सरकार ने जोर दिया है। मार्च 2026 तक देश में लगभग 4.40 लाख नए पीएनजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा, 4.88 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। यह आंकड़े बताते हैं कि लोग अब सुरक्षित और सुविधाजनक गैस विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
पीएनजी कनेक्शन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें सिलिंडर बदलने की झंझट नहीं होती और गैस सप्लाई लगातार बनी रहती है। इसके अलावा, यह एलपीजी के मुकाबले अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है।
छोटे सिलिंडरों की बढ़ती लोकप्रियता ?
5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलिंडरों की मांग में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। ये सिलिंडर खासतौर पर निम्न आय वर्ग, छोटे परिवारों, छात्रों और किराए के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। कम कीमत, आसान हैंडलिंग और जरूरत के अनुसार उपयोग करने की सुविधा इन्हें लोकप्रिय बना रही है। इसके अलावा, छोटे व्यापारियों जैसे चाय की दुकान, ठेले वाले और छोटे फूड स्टॉल चलाने वाले भी इन सिलिंडरों को अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे उनका खर्च भी नियंत्रित रहता है और काम में भी आसानी होती है।
संकट के बावजूद मजबूत व्यवस्था ?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत में घरेलू गैस की सप्लाई का सामान्य बने रहना एक बड़ी उपलब्धि है। यह सरकार की दूरदर्शी नीतियों, रणनीतिक भंडारण और विविध स्रोतों से आयात की योजना का परिणाम है
कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि वैश्विक संकट के बीच भी भारत ने घरेलू गैस आपूर्ति को सुचारु बनाए रखकर एक मजबूत उदाहरण पेश किया है। डिजिटल तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए किए गए सुधारों ने इस क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया है। आने वाले समय में भी यदि इसी तरह की रणनीतियों पर काम किया जाता रहा, तो देश की ऊर्जा सुरक्षा और भी सुदृढ़ हो सकती है।






