पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई चिंताओं के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि तेल, गैस और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों के समूह (IGoM) की बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट कहा कि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद हैं और लोगों को किसी भी प्रकार की घबराहट में खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और कई देशों ने अपने ऊर्जा सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत भी दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है, इसलिए इस स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारत ने बढ़ाए वैकल्पिक सप्लायर ?
सरकार ने संकट की आशंका को देखते हुए तेल आयात के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने कई देशों के साथ अतिरिक्त तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत तेज कर दी है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, अमेरिका, अफ्रीकी देशों और दक्षिण अमेरिकी बाजारों से आयात बढ़ाकर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई चेन मजबूत बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बंदरगाहों, रिफाइनरियों और परिवहन नेटवर्क की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
राजनाथ सिंह ने बैठक के दौरान साफ शब्दों में कहा कि अफवाहों से बचना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने से बचें क्योंकि इससे बाजार में अनावश्यक दबाव बन सकता है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित नहीं होगी और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में काफी काम किया है। यही वजह है कि मौजूदा संकट के बावजूद देश की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक आयात नीति भारत को अचानक आने वाले वैश्विक संकटों से निपटने में मदद कर रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि हर परिस्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो भारत अतिरिक्त कदम उठाने के लिए भी तैयार है। फिलहाल सरकार का संदेश साफ है कि देश में तेल और जरूरी वस्तुओं की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को शांत रहकर सामान्य तरीके से खरीदारी करनी चाहिए।






