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यह आंदोलन तब तक नहीं थमेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते-‘कॉकरोच जनता पार्टी’

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चौथा अक्षर संवाददाता/नई दिल्ली

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहा धरना आज  चौथे दिन मंगलवार को भी जारी रहा. आज इस धरने का  देश के शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों  और किसानो ने पहुंचकर अपना समर्थन दिया. शिक्षाविद अनीता रामपाल ने आंदोलन में शामिल छात्रों और अभिभावकों की सराहना करते हुए कहा कि वे उन छात्रों के साथ खड़े हैं जो परीक्षा व्यवस्था की खामियों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं इसे पेपर लीक नहीं कहती, मैं इसे पेपर लूट कहती हूं. छात्रों और उनके परिवारों से जबरन पैसा वसूला जा रहा है और लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है.”

अनीता रामपाल ने कोचिंग संस्कृति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लाखों परिवार कर्ज लेकर बच्चों को कोचिंग दिलाते हैं, जबकि सफलता की संभावना बहुत कम होती है. उन्होंने कहा कि “हम नहीं चाहते कि लाखों छात्र कई-कई साल सिर्फ एक परीक्षा के लिए बर्बाद कर दें, घर की जमीन बिक जाए और परिवार कर्ज में डूब जाए.” उन्होंने छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के दिनों में कई छात्रों ने परीक्षा के दबाव में अपनी जान गंवाई है, जो पूरे शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है. उन्होंने कहा, “हम शिक्षक हैं चाहे छात्र कहीं का भी हों, वह हमारा छात्र है. उसकी सुरक्षा और भविष्य हमारी जिम्मेदारी है.”

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) के सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि शिक्षकों ने कई साल पहले ही इस परीक्षा व्यवस्था के दुष्परिणामों को लेकर चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा, “जब यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों पर थोपी जा रही थी तब JNU के 27 शिक्षक इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट गए थे. लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई. आज वही समस्याएं पूरे देश के सामने हैं.”

अविनाश कुमार ने कहा कि वस्तुनिष्ठ (Objective) और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, वंचित समुदायों, महिलाओं और छोटे शहरों से आने वाले छात्रों को हुआ है. उन्होंने कहा, “आज आप सड़कों पर हैं क्योंकि इस व्यवस्था ने वंचित वर्गों के साथ अन्याय किया है. अगर शिक्षकों ने सात-आठ साल पहले चेतावनी दी थी तो हमें गर्व है कि हमने यह खतरा पहले ही देख लिया था.”

अविनाश कुमार ने कहा कि आंदोलन की मांग केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “प्रधान जाएंगे तो कोई और आ जाएगा. असली जरूरत शिक्षा व्यवस्था में मूल सुधार की है. हमारी मांग है कि NTA को समाप्त किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को छात्रों के हित में दोबारा तैयार किया जाए.” उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को ऐसे समय लागू किया गया जब देश कोविड महामारी से जूझ रहा था और इस पर पर्याप्त लोकतांत्रिक चर्चा नहीं हुई.

देशभर में चल रहे शिक्षा व्यवस्था के संकट, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और तनावग्रस्त होकर छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मुद्दे ने एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध का केंद्र बना दिया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में चल रहा यह धरना आज तीसरे  दिन भी उसी तेवर और जोश के साथ जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा है  कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह आंदोलन नहीं थमेगा।

हालांकि, निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बाद दिल्ली पुलिस का रुख कड़ा हो गया है। पुलिस ने धरने को अवैध घोषित करते हुए प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करने की लगातार चेतावनी दी,

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