श्याम लाल शर्मा/ चौथा अक्षर/नई दिल्ली /छायाकार – आशीष कार, आर बी यादव
इस सरकार के कार्यकाल में आज पहली बार लाखों छात्रों और नवजवान बेरोजगार युवकों -युवतियों ने इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर संसद मार्ग को घेर लिया और मोदी सरकार की नींव हिला दी। इन छात्र-छात्राओं बेरोजगार युवाओं ने पुलिस की बैरिकेटिंग तोड़ी, लाठियां खाई, सिर फूटे, खून बहा लेकिन ये हिंसक होने के बजाय खड़े रहे और कहते रहे “मारिए सर और मारिए” और मार खाते खाते भारी नारे बाजी के बीच संसद की देहरी तक पहुँच गए . दिल्ली पुलिस की घेराबंदी धरी की धरी रह गई! देश के सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों के छात्र एकजुट एक स्वर में प्रधानमंत्री मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं। वांगचुंग को जबरन भूख हड़ताल से हटाकर मोदी सरकार ने भारी आफत मोल ले ली! सरकार दहशत में आ गई यहाँ तक की प्रधानमंत्री को संसद से लेकर बाहर निकल गई और संसद भवन के मुख्य दरवाजे बंद करने पड़े.
उल्लेखनीय है कि काकरोच जानता पार्टी पिछले तकरीबन महीने भर से जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को धरने पर बैठी थी और 22 दिनों से ज़्यादा समय से सोनम वांगचुक और एसएफआई की नेहा बोरा और उनके 2 साथी आमरण अनशन पर थे इन सबकी हालत लगातार ख़राब होती जा रही थी. सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आवाहन कर रखा था कि अचानक शनिवार की सुबह सुबह सादी वर्दी में हाथों में सफेद कपड़ा लिए पुलिस वाले आए और सोनम वांगचुक को जबरदस्ती उठा कर लेकर चले गए और उन्हें सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया. आइसा के अनशनकारियों को भी पुलिस ने जबरन उठाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारियों के घेरे के चलते वे इसमें कामयाब नहीं हो सके। इस बात को लेकर छात्र और युवा भड़क गए और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के लिए जंतर मंतर पर पहुँचना शुरू हो गए.


यूँ तो दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए जगह जगह बैरिकेटिंग लगा रखी थी बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान तैनात कर रखे थे. विजय चौक, पटेल चौक, जंतर मंतर, और केंद्रीय टर्मिनल मैट्रो स्टेशनों के दरवाज़े बंद कर दिए गए थे, यहाँ तक कि अन्य राज्यों और दूर दराज से आने वाली ट्रेनों के रास्ते बदल दिए गए थे ताकि उससे आने वाले छात्र युवा समय पर ना पहुँच सकें. पुलिस का कहना था कि मार्च के लिए परमिशन नहीं दी गई है। उधर, काकरोच जानता पार्टी सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि हमें कोई नहीं रोक सकता है, संसद मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उधर, पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने की 3 शर्तें रखी थीं पहली- सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी ले। दूसरी- सीजेपी प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने दिया जाए और सांसद मुद्दा उठाने का भरोसा दें। तीसरा- स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न हो तो सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर यही आश्वासन दें। लेकिन सरकार की तरफ़ से ऐसा कुछ नहीं हुआ, वह मुग़ालते में थी और उसे अपने नए पुलिस मुखिया अनुराग कुमार पर पूरा भरोसा था. लेकिन पुलिस की सारी व्यवस्था धरी की धरी रह गई.

जंतर मंतर पर आर-पार की जंग… आमने-सामने पुलिस और प्रदर्शनकारी!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर संसद कूच को लेकर माहौल बेकाबू हो चुका है। पुलिस बैरिकेट्स के पास दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की जिद पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस बल बैरिकेड्स थामकर उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश कर रहा है। जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा , सारी पाबंदियों सारे आदेशों को धता बताते हुए आए नौजवानों ने जता दिया कि एक परीक्षा तक सही ढंग से न करा पाने वाली सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। मौके पर बेहद तनावपूर्ण स्थिति बन गई . छात्रों युवाओं के सैलाब ने पुलिस की तमाम बैरिकेटिंग को तोड़ते हुए, लाठियाँ डंडे खाते हुए, अपने हाथ, पैर, सिर तुड़वाते हुए आँसू गैस के गोले सहते हुए संसद भवन को चारों तरफ़ से घेर लिया और आख़िरकार संसद भवन की दहलीज पर पहुँच गए. मोदी सरकार की नींव हिला दी। दिल्ली पुलिस की घेराबंदी धरी की धरी रह गई! अब देश के सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों के छात्र एकजुट एक स्वर में प्रधानमंत्री मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं। वांगचुंग को जबरन भूख हड़ताल से हटाकर मोदी सरकार ने भारी आफत मोल ले ली!

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जम कर लाठियाँ भांजी इससे कई लोगों को चोटें आई हैं और कई लोगों के सिर भी फूट गए हैं। इन युवाओं में डर नाम की चीज खत्म हो गई है जब पुलिस के जवान ने ललकारते हुए एक युवा ने कहा- ‘मारो सर, मारो’. और उस लड़के पर पुलिस वालों ने लाठी चला दी ,उस लड़के में थोड़ा सा गांधी खिल उठा था.दो बार और प्रहार हुआ. ‘मारो सर..और मारो ‘लाठियां भांजते पुलिस वाले रुक गए. शायद उन्हें भी लड़के में गांधी दिखने लगा. और बापू पर प्रहार करने की हिम्मत शायद उनमें नहीं थी. फिर एक महिला पुलिस कर्मी आई, और लड़के को धक्का देते हुए दूर ले गई. कल योगेंद्र यादव जंतर मंतर पर जमा नौजवानों को अपने छात्र जीवन का नारा याद दिला रहे थे : चाहे हमला कैसा भी हो, हाथ हमारा नहीं उठेगा. हालांकि, पुलिस ने इससे इनकार किया है।

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा, “आज लोकतंत्र के इतिहास में ये काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पुलिस के आंखों में भी शर्मिंदगी दिख रही थी… कुछ पुलिसकर्मी गुंडे बने हुए थे। कुछ पुलिसवाले बिना वर्दी के आए और बच्चों को मारा है। बच्चों को करंट दिया। जहां नियम होता है कि आपको पैरों पर मारना है वहां बच्चों के सीने पर मारा है, ये आघात भारत माता के सीने पर किया है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री को हटाएं, सरकार जिम्मेदारी ले…इतनी अहंकारी कठोर और निर्दयी सरकार शायद ही देश के इतिहास ने देखी हो।”

डिंपल यादव ने कहा, “ये हमारे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण दिन रहा है। आज छात्र निहत्थे आए थे, उनके हाथ में कुछ नहीं था। वे खाली अपना बैग लेकर चल पड़े। वे अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाह रहे थे। NEET परीक्षा जो लीक हुई और छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। वे अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आए थे। आज भाजपा ने पूरे देश को शर्मसार करने का काम किया है।“









