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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने  वांगचुक को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल खत्म कराई

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चौथा अक्षर संवाददाता/नई दिल्ली 

26 दिनों तक अनशन करने के बाद सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अन्न को स्वीकार कर लिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के निजी अस्पताल में वांगचुक को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल खत्म कराई। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे वाली मांग पहले ही छोड़ चुके वांगचुक की तीन और शर्तों को सरकार ने मान लिया है। इसमें सबसे बड़ी शर्त कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों को कानूनी ऐक्शन से बचाने की थी, जिसे सरकार ने मान तो लिया है, लेकिन इसमें इस्तेमाल किए गए एक शब्द नेलक्ष्मण रेखाखींच दी है। इससे साफ हो गया है कि हिंसा करने वालों को किसी तरह बख्शा नहीं जाएगा।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के बाद एक वीडियो शेयर करके बताया कि उनके और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच दो दिन तककठिन मोलभावहुआ है। वांगचुक ने सरकार के सामने तीन शर्तें रखी थीं, उनमें से दो पर सरकार विचार करने को तैयार हो गई थी। सोनम की ये दो मांगें थींनीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा और संसद में चर्चा के साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार। इसके साथ ही उन्होंने तीसरी मांग में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के लिए ढाल मांगी।

वांगचुक ने क्या मांग रखी थी

सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई को जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के नाम जो लेटर अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया था, उसमें उन्होंने मांग की थी कि, ‘सरकार यह भरोसा दे कि किसी भी युवा प्रदर्शनकारी पर दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। उनका एक मात्रदोषअच्छे और जवाबदेह एजुकेशन सिस्टम के लिए आवाज उठाना है।

सरकार ने क्या ऐसा शब्द जोड़ा

सरकार की ओर से जारी बयान में वांगचुक को बताया गया कि किसी भी ऐसे प्रदर्शनकारी पर केस नहीं दर्ज किया जाएगा जोशांतिपूर्वकइस आंदोलन में शामिल था। नड्डा ने सरकार का बयान वांगचुक के सामने पढ़ते हुए कहा, ‘सरकार उन लोगों के खिलाफ केस नहीं दर्ज करने को लेकर सकारात्मक है जिन्होंने दिल्ली में जंतरमंतर पर प्रदर्शन, 20 जुलाई को संसद मार्च में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया।

सरकार की बात के क्या मायने

सरकार ने अपने इस बयान से यह साफ कर दिया है कि जिन लोगों ने दिल्ली में कानून को हाथ में लिया, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जंतरमंतर, कनॉट प्लेस, रेल भवन जैसे स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर पथराव करने वाले प्रदर्शनकारियों पर कानूनी ऐक्शन जारी रहेगा। पुलिस हिंसा के मामले में करीब एक दर्जन एफआईआर अलगअलग थानों में दर्ज कर चुकी है और हिंसा करने वालों की पहचान भी की जा रही है। एक दिन पहले यह खबर भी आई कि हिंसक गतिविधियों में शामिल प्रदर्शनकारियों का पासपोर्ट तक रद्द किया जा सकता है। माना जा रहा है कि एक बार आंदोलन खत्म होने के बाद उन लोगों के खिलाफ ऐक्शन ते तेज हो सकता है, जो हिंसा करते हुए कैमरों में कैद हुए हैं।

योगेंद्र यादव बोलेफिर इस शर्त का क्या मतलब

वांगचुक को जंतरमंतर से हटाए जाने के बाद मंच पर कई बार दिख चुके योगेंद्र यादव ने सरकार के बयान में जोड़े गएशांतिपूर्वकशब्द पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, ‘सरकार तय कर चुकी है कि कौन शांतिपूर्वक भाग ले रहे हैं और कौन नहीं? तो फिर इस वादे का क्या मतलब? शांतिपूर्ण विरोध में किसी के खिलाफ कोई केस नहीं होना चाहिए। उन 11 एफआईआर का क्या जो पहले ही दर्ज की जा चुकी है? उनकीवापसीका कोई जिक्र नहीं है।

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