चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
एक शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार क्या क्या नहीं कर रही है, मैट्रो, इंटरनेट और रास्ते बंद करके जंतर मंतर को बैरीकेट्स लगाकर बड़ी जेल बना दिया, 18 मैट्रो स्टेशन बंद कर दिए, कनाट प्लेस की दुकानें बंद करा दीं फिर भी जंतर मंतर पर छात्रों का हुजूम थमने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं सरकार की तरफ से सीजेपी की मांगों को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. काकरोच जानता पार्टी (सीजेपी) और सरकार के बीच आज शनिवार 3.30 बजे तीसरे दौर की बातचीत होने जा रही है, मोदी सरकार दबाव में है और सबकी निगाहें आज के वार्तालाप पर टिकी हैं. सोनम वांगचुक ने 26 दिन के आमरण अनशन के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है. लेकिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यह प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही समाप्त होगा.
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह मामला अब केवल एक संगठन का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।रांका ने कहा कि सरकार जितनी देर करेगी, जनता का असंतोष उतना ही बढ़ेगा। उनके अनुसार, यह ऐसा विषय है जिसे लंबे समय तक टालना संभव नहीं है क्योंकि विभिन्न राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
सीजेपी ने एक बार फिर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती। उन्होंने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगें हैं पहला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दूसरा परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और तीसरा आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।उन्होंने दावा किया कि सरकार के साथ हुई पिछली बैठकों में दूसरी और तीसरी मांग पर सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।इस मामले में सरकार का रूख आज पता चलेगा. सीजेपी प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि संगठन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों ने यह भरोसा दिया है कि इस मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा जाएगा, लेकिन जब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही पर चर्चा तभी सार्थक होगी, जब इस पूरे विवाद की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की बातचीत को लेकर सभी की निगाहें टिकी हैं। संगठन का कहना है कि यदि वार्ता में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नई रणनीति की घोषणा की जाएगी। उधर, केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई और छात्रों की चिंताओं पर संवाद के लिए तैयार है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आज तीसरे दौर की बातचीत से पहले संगठन ने केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन की दिशा को लेकर कठोर फैसला लिया जाएगा।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ आज शाम 3:30 से 4 बजे के बीच बैठक होनी है, हालांकि जगह अभी तय नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जिन दो मांगों पर सहमति बनी है, उन पर लिखित आश्वासन चाहिए. साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार से साफ तौर पर ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब मांगा गया है.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर को चारों ओर से बैरीकेट्स लगाकर घेर दिया गया है और 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को क्यों बचाया जा रहा है. दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि उनकी मांग सिर्फ पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की है.
उधर बताया जा रहा है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए ) ने पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा कदम उठाते हुए 47 अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है. बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी. यह कार्रवाई एनटीए में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए किए जा रहे बड़े सुधारों का हिस्सा मानी जा रही है. केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐसे मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि नए कानून का मकसद पेपर लीक पर रोक लगाना, दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करना और भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना है. लेकिन छात्रों को मोदी सरकार पर भरोसा नहीं है.






