नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। अचानक आई बाढ़ और नदियों के उफान ने कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं और प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ के कारण कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, वहीं अनेक लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
भोटेकोशी नदी के उफान ने मचाई भारी तबाही ?
रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई। तेज बहाव ने नदी के आसपास मौजूद बस्तियों और अन्य स्थानों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी के साथ आए मलबे और तेज धार ने घरों, सड़कों तथा अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत टीमों को भी घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस आपदा की भयावहता का अंदाजा उन लोगों की आपबीती से लगाया जा सकता है, जिन्होंने खुद मौत को बेहद करीब से देखा। स्थानीय निवासी केशव प्रसाद बराल ने बताया कि बाढ़ का पानी उनके घर की ऊपरी मंजिल तक पहुंच गया था। हालात इतने खराब हो गए थे कि घर में मौजूद लोगों के लिए सुरक्षित रहना भी मुश्किल हो गया।
पांच घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच फंसे रहे केशव ?
केशव प्रसाद बराल की कहानी इस त्रासदी की गंभीरता को सामने लाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ और मलबे के बीच उनकी पत्नी दब गई थीं। वहीं केशव खुद भी कई घंटों तक फंसे रहे। बताया गया है कि करीब पांच घंटे बाद उन्हें बचाया जा सका। किसी तरह जिंदगी बचने के बावजूद अपनों को खोने का दर्द उनके लिए बेहद भारी है। ऐसी कई कहानियां इस आपदा के बाद सामने आ रही हैं। कहीं परिवार अपने सदस्यों की तलाश कर रहे हैं तो कहीं लोग अपने घर और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खो चुके हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के सामने भोजन, पानी और सुरक्षित आश्रय की समस्या भी पैदा हो सकती है।
सैकड़ों पर्यटकों के लापता होने से बढ़ी चिंता ?
नेपाल दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। बाढ़ के बाद सैकड़ों पर्यटकों के लापता होने की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त रास्तों और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लापता लोगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाने, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने की है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश में भारी बारिश के दौरान अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने पर नदी किनारे बसे इलाकों में स्थिति कुछ ही समय में खतरनाक हो सकती है। मौजूदा त्रासदी ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को उजागर किया है।
160 लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रभावित परिवार इस समय अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। आने वाले दिनों में राहत और बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ नुकसान और लापता लोगों से जुड़ी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता, सुरक्षित आश्रय और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की है।






