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E20 के साथ फिर मिल सकता है E10 पेट्रोल, BPCL ने बताया मौजूदा नेटवर्क से ही होगी सप्लाई ?

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भारत में पेट्रोल के एथेनॉल मिश्रण को लेकर एक अहम बदलाव की संभावना सामने आई है। E20 पेट्रोल के साथ अब E10 पेट्रोल को भी दोबारा उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में वाहन चालकों को अपनी जरूरत और वाहन की अनुकूलता के हिसाब से अलग-अलग एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, इस संबंध में सरकार और तेल विपणन कंपनियों की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

E10 पेट्रोल की वापसी पर क्यों हो रहा विचार?

भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की खपत बढ़ाना और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करना है। इसी दिशा में E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल वाले ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। हालांकि, सभी पुराने वाहनों के लिए ज्यादा एथेनॉल मिश्रण समान रूप से उपयुक्त नहीं माना जाता। इसी वजह से कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर चर्चा समय-समय पर सामने आती रही है। E10 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत तक होती है, जिससे पुराने या कम एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन किए गए वाहनों के मालिकों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना के अनुसार, तेल विपणन कंपनियां मौजूदा वितरण व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए 10 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति करने की स्थिति में हैं। यानी यदि सरकार E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने का फैसला करती है, तो इसके लिए बड़े पैमाने पर नया वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा ऑक्टेन-95 नेटवर्क के जरिए इस तरह के पेट्रोल की सप्लाई किए जाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स और वितरण व्यवस्था को अपेक्षाकृत सरल बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

वाहन मालिकों को क्या फायदा होगा?

अगर E10 और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा अलग-अलग पीढ़ी के वाहनों के मालिकों को मिल सकता है। नए वाहन E20 ईंधन के लिए तैयार किए जा रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में पुराने वाहन ऐसे हैं जिनके लिए कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल अधिक उपयुक्त हो सकता है।

E10 की उपलब्धता से वाहन मालिकों को अपने वाहन के निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा मिल सकती है। इससे उन लोगों की चिंता भी कम हो सकती है जो अपने पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल को लेकर आशंकित हैं हालांकि E10 पेट्रोल की संभावित वापसी की खबर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे अभी अंतिम सरकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। तेल कंपनियां इसके लिए तैयार होने की बात कह रही हैं, मगर पेट्रोल की कीमत, वितरण व्यवस्था, एथेनॉल की उपलब्धता और नीति से जुड़े अन्य पहलुओं पर फैसला होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। यदि E10 को दोबारा बाजार में जगह मिलती है, तो भारत के पेट्रोलियम क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल देखने को मिल सकता है जिसमें E20 को बढ़ावा देने के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक कम एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन भी उपलब्ध रहे। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और अलग-अलग वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ईंधन व्यवस्था को अधिक लचीला बनाया जा सकेगा।

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