डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई ने पैसों के लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। ऐसा ही एक मामला झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आया, जहां बचत खाते से आधी रात में ₹48,765 का कथित अनधिकृत यूपीआई ट्रांजेक्शन हो गया। शिकायतकर्ता धनेश कुमार के अनुसार, उन्होंने यह भुगतान नहीं किया था। मामला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तक पहुंचा, जहां बैंक को सेवा में कमी का जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला दिया गया।
आधी रात में हुआ ₹48,765 का UPI ट्रांजेक्शन ?
मामला कैनरा बैंक की जैन मार्केट शाखा, चाईबासा से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, बैंक खाते से रात के समय यूपीआई के माध्यम से ₹48,765 की राशि निकाल ली गई। खाताधारक का कहना था कि उन्होंने इस लेन-देन को अधिकृत नहीं किया था। अनधिकृत ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलने के बाद ग्राहक ने बैंक से संपर्क कर राशि वापस करने की मांग की। हालांकि, शिकायतकर्ता को अपेक्षित राहत नहीं मिलने के बाद मामला उपभोक्ता आयोग के सामने पहुंचा। यहां आयोग ने मामले से जुड़े तथ्यों और शिकायतकर्ता की दलीलों पर विचार किया। सुनवाई के बाद आयोग ने बैंक को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना।
आयोग ने बैंक को दिया राशि वापस करने का आदेश ?
पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिकायतकर्ता धनेश कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग के आदेश के अनुसार, कैनरा बैंक को खाते से निकाली गई विवादित ₹48,765 की रकम दोबारा ग्राहक के खाते में क्रेडिट करनी होगी। इसके अलावा आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। ग्राहक को मुकदमे पर हुए खर्च के लिए भी ₹10,000 देने का आदेश दिया गया है। इस तरह मूल विवादित रकम और अन्य राहतों को जोड़ने पर बैंक की ओर से दी जाने वाली कुल आर्थिक राहत ₹73,765 होगी।
ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह मामला उन बैंक ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके खाते से उनकी जानकारी या अनुमति के बिना डिजिटल ट्रांजेक्शन हो जाता है। यूपीआई फ्रॉड की स्थिति में ग्राहक के लिए तुरंत बैंक को सूचना देना बेहद जरूरी है। देरी होने पर मामले की जांच और रकम की रिकवरी मुश्किल हो सकती है। ग्राहकों को किसी संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चलते ही बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन या संबंधित बैंकिंग चैनल के जरिए शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही ट्रांजेक्शन की तारीख, समय, राशि और उपलब्ध संदर्भ संख्या जैसे विवरण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।
बैंकिंग सुरक्षा में लापरवाही पर उठे सवाल ?
डिजिटल लेन-देन में सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल ग्राहक की नहीं होती। बैंकिंग सिस्टम में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, शिकायतों का उचित निपटारा और ग्राहक की समस्या पर समय से कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है। इस मामले में आयोग का आदेश इसी व्यापक उपभोक्ता अधिकार के संदर्भ में देखा जा सकता है। फैसला यह संदेश भी देता है कि यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसके खाते से अनधिकृत तरीके से रकम निकाली गई है और उसकी शिकायत का उचित समाधान नहीं हुआ, तो वह उपलब्ध कानूनी और उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था का सहारा ले सकता है। किसी भी UPI फ्रॉड की स्थिति में ग्राहक को तुरंत बैंक को सूचित करने के साथ साइबर अपराध की आधिकारिक शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। बैंकिंग खाते, UPI PIN, OTP या कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।






