नई दिल्ली। भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही Ultraviolette Automotive अगले साल अपने बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक स्कूटर Tesseract को बाजार में उतार सकती है। कंपनी के मुताबिक स्कूटर को 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च करने की योजना है और मांग बढ़ने के साथ इसका उत्पादन करीब 10,000 यूनिट प्रति माह तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
Tesseract का शुरुआती उत्पादन कंपनी के मौजूदा कर्नाटक स्थित विनिर्माण संयंत्र में किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि लॉन्च के शुरुआती चरण में आने वाली मांग को मौजूदा प्लांट की क्षमता से पूरा किया जा सकता है।
इसके बाद तमिलनाडु के होसुर में तैयार किए जा रहे नए BIGGA (Big Global Ambition) Factory के चालू होने पर Tesseract का उत्पादन वहां स्थानांतरित किया जाएगा। कंपनी का नया संयंत्र अगले 6 से 8 महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। Ultraviolette ने होसुर में नए विनिर्माण संयंत्र के लिए लगभग ₹779 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इस फैक्ट्री की शुरुआती वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 2.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन होगी। मांग बढ़ने पर इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 5 लाख वाहन सालाना तक किया जा सकता है। कंपनी की योजना अगले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल दोनों सेगमेंट में अपनी बिक्री बढ़ाने की है। बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद कंपनी को उम्मीद है कि उसके कुल वॉल्यूम में स्कूटर और मोटरसाइकिल की हिस्सेदारी लगभग 50-50 प्रतिशत हो सकती है।
Tesseract की मांग को लेकर कंपनी उत्साहित ?
कंपनी के अनुसार Tesseract की संभावित मांग कम से कम 10,000 यूनिट प्रति माह तक पहुंच सकती है। कंपनी ने बताया है कि स्कूटर सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ने की गति मोटरसाइकिलों की तुलना में तेज रहने की उम्मीद है।
Tesseract को कंपनी ने अपने प्रीमियम मोटरसाइकिल कारोबार से आगे बढ़कर अधिक बड़े बाजार को लक्ष्य करने वाली रणनीति के तहत तैयार किया है। कंपनी पहले F77 और X47 जैसी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों के जरिए प्रदर्शन-केंद्रित सेगमेंट में अपनी पहचान बना चुकी है। अब Tesseract के जरिए बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश है। Tesseract को पहले की समयसीमा के मुकाबले आगे बढ़ाया गया है। मई 2026 में कंपनी ने लॉन्च को जनवरी 2027 तक टालने की जानकारी दी थी और इसके इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर में बदलाव की बात कही थी। अब कंपनी इसे 2027 की पहली तिमाही में बाजार में लाने की तैयारी कर रही है। भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। Tesseract के बाजार में आने के बाद Ultraviolette की सीधी प्रतिस्पर्धा बड़े इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माताओं से बढ़ सकती है। कंपनी का नया होसुर प्लांट भी इसी विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नई फैक्ट्री में Tesseract के अलावा भविष्य में आने वाले अन्य इलेक्ट्रिक वाहन भी बनाए जा सकेंगे। कंपनी उत्पादन क्षमता को मांग के अनुसार चरणों में बढ़ाने की योजना बना रही है। Ultraviolette घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार की योजना बना रही है। कंपनी के मुताबिक फिलहाल उसके कुल वॉल्यूम में निर्यात की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है, जिसे अगले कुछ वर्षों में बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों पर कंपनी का विशेष ध्यान है। Tesseract Ultraviolette के लिए सिर्फ एक नया इलेक्ट्रिक स्कूटर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर बाजार में प्रवेश करने की रणनीति का अहम हिस्सा है। अगर कंपनी लॉन्च के बाद 10,000 यूनिट मासिक उत्पादन और बिक्री के लक्ष्य के करीब पहुंचती है, तो भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।






