back to top

गांधी जयंती के दिन अमित शाह की दिल्ली पुलिस का सबसे ज़्यादा अभद्र और अशोभनीय काम- योगेंद्र यादव, संजय सिंह और नेहा वोरा सहित कई महिला आंदोलनकारियों  को घसीटते हुए हिरासत में लिया

Must Read

श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली/छाया -आशीष कर/आर बी यादव

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े को लेकर पूरे देश ख़ास कर दिल्ली और मुंबई में ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ।राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर एक तरह से जहाँ पुलिस की बदतमीजी और ज़्यादतियों को सहते हुए आंदोलन की अगुवाई देश की बेटियां कर रही थीं वहीं दूसरी तरफ़ मुंबई में काकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में जोरदार प्रदर्शन हुआ।आज गांधी जयंती के दिन जो सबसे ज़्यादा अभद्र और अशोभनीय काम अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने किया वह यह कि आंदोलनकारियों योगेंद्र यादव,  आप के संजय सिंह और नेहा बोरा सहित कई महिला आंदोलनकारियों को घसीटते हुए हिरासत में लिया गया। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि गांधी जयंती पर हज़ारों नौजवान लड़के लड़कियां वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं। मोदी-शाह सरकार में उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा है।’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में आंदोलन करने वालों को हिरासत में लेने और उन्हें सड़क पर घसीटने की खबरों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध कर रहे लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा कि उनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल उठाया। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, ‘ज्ञानेश कुमार जाएंगे और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।’

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की नेहा वोरा सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जिस तरह की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं उससे साफ़ ज़ाहिर है कि  पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटते हुए हिरासत में लिया। यूथ कांग्रेस के नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। प्राप्त खबरों के मुताबिक, दिल्ली में 1100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में गांधी जयंती और प्रदर्शन के दिन को जोड़ते हुए कहा कि हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ शांतिपूर्वक और बिना हिंसा के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, ‘आज गांधी जयंती है। और आज ही, हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं- शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए। उनकी मांग साफ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। लोकतंत्र बचाओ। और मोदी-शाह सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा। बापू ने यही सिखाया था- सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज्यादा डराता है। क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।’

राहुल गांधी का यह बयान तब आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर  को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समूहों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना शामिल है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को घसीटकर ले जाने की खबरों ने पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

राजनीतिक दल और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और अन्य छात्र संगठनों के सदस्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि स्थल पर किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

पुलिस ने कहा कि उसने आप नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह को नॉर्थ एवेन्यू में रोक दिया, जिससे वह प्रदर्शन स्थल की ओर नहीं बढ़ सके। भारद्वाज ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उन्हें और झा को हिरासत में लिया गया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आंदोलन जारी रखने और जंतर-मंतर पहुंचने का आग्रह किया।

पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि एसएफआई के करीब 700 कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की और उन्हें अशोका रोड गोलचक्कर पर रोक दिया गया, जिनमें से कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आप नेताओं, आइसा, एसएफआई और अन्य छात्र संगठनों सहित लगभग 700 प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर और उसके आसपास से हिरासत में लिया गया। पहले एक अन्य अधिकारी ने बताया था कि करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों को स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर बैरिकेड लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के जवान भी बार-बार सार्वजनिक घोषणा कर रहे थे और लोगों से जंतर-मंतर पर इकट्ठा न होने के लिए कह रहे थे क्योंकि विरोध स्थल पर किसी भी सभा की अनुमति नहीं दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, आतिशी और संजय सिंह के साथ-साथ कुछ छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं सहित 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

एसएफआई की महासचिव आइशी घोष ने कहा कि डीवाईएफआई और एसएफआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। घोष ने कहा कि दिल्ली पुलिस राजधानी में अपराधों को रोकने में सक्षम नहीं है, लेकिन जब ज्ञानेश कुमार जैसे किसी व्यक्ति की सुरक्षा की बात आती है, तो वे सड़कों पर उतर आते हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र नहीं है। अगर पुलिस को लगता है कि वे हमें हिरासत में लेकर आंदोलन को रोक सकते हैं, तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।

आइसा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हिरासत के दौरान महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया। जंतर-मंतर के पास हिरासत में लिए जाने के दौरान संगठन के एक सदस्य ने कहा कि चाहे आप कितनी भी लाठियां बरसाओ या हममें से कितने लोगों को जेल में डाल दो, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत कई कार्यकर्ताओं को भी मौके से हिरासत में लिया गया। जाखड़ को संगठन के कार्यालय से जंतर-मंतर की ओर पैदल मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में, आरोप लगाया कि एनएसयूआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई की गई थी। जाखड़ ने कहा कि लोगों के वोटों की आवाज को किसी भी ताकत से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि संगठन का लोकतंत्र के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन स्थल से एनएसयूआई के भी कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों को फिरोजशाह रोड पर बैरिकेड लांघते हुए भी देखा गया। एक वीडियो संदेश में भारद्वाज ने कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है तो लोकतंत्र में प्रदर्शन करने के लिए अनुमति की क्या आवश्यकता है।

युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं ने ‘सीईसी इस्तीफा दो’, ‘निर्वाचन आयोग जवाब दो’ और ‘लोकतंत्र बचाओ’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेस कार्यालय से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, तभी दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया और हिरासत में ले लिया। चिब ने कहा, निर्वाचन आयोग हर वोट की शुचिता की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार है। जब मतदाता सूची से संबंधित फैसलों पर आयोग के भीतर ही सवाल उठाए जा रहे हैं, तो देश जवाब और जवाबदेही का हकदार है। पुलिस ने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और जंतर-मंतर व उसके आसपास अतिरिक्त कर्मियों और बैरिकेड लगाए गए थे। फिरोजशाह रोड पर जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की तो उन्हें बैरिकेड को पार करने का प्रयास करते हुए देखा गया।

दिल्ली पुलिस के जवान भी बार-बार सार्वजनिक घोषणा कर रहे थे और लोगों से जंतर-मंतर पर इकट्ठा न होने के लिए कह रहे थे। पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों को स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर बैरिकेड लगाए गए हैं। भारद्वाज ने एक वीडियो संदेश में कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है तो लोकतंत्र में प्रदर्शन करने के लिए अनुमति की क्या आवश्यकता है।

वहीं दूसरी तरफ़  मुंबई में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस दौरान सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने कहा कि यह आंदोलन जारी रहेगा और प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोट चुराने और लोगों के अधिकारों पर हमला करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन में शामिल होंगे और पुलिस की बैरिकेडिंग उन्हें रोक नहीं पाएगी। उन्होंने आंदोलन के लंबे चलने का संकेत देते हुए कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में बोरियत से बचने के लिए मजे-मस्ती के पल भी शामिल होंगे, लेकिन इससे आंदोलन की मांगों और उसके जारी रहने के संकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिपके के बयान से आंदोलन के आयोजकों की रणनीति का संकेत मिलता है कि वे इसे एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहते।

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देने वाले डीसीपी सचिन शर्मा के बयान को लेकर भी अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी। दिपके ने दावा किया कि कुछ पुलिस अधिकारी उन्हें बता रहे थे कि सचिन शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारों वाले हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पसंदीदा हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। दिपके ने पुलिस अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर तुम संघी हो तो खाकी शॉर्ट्स पहनो, पुलिस की वर्दी मत पहनो!’

मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी  के प्रदर्शन को लेकर तनाव और राजनीतिक हलचल बढ़ गई थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी जयंती के दिन प्रदर्शन का आह्वान किया था। मुंबई में सीजेपी के मंच पर कई फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं, जिसमें नसीरुद्दीन शाह, शाबाना आज़मी, विशाल डडलानी, तुषार गांधी आदि हैं। मुंबई के प्रदर्शन की खास बात यह है कि यह प्रदर्शन सिर्फ शिवाजी पार्क इलाके तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के तमाम उपनगरों में भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।

मुंबई में आयोजित सभा को अभिनेत्री शबाना आजमी ने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की बुनियादी ताकत बताते हुए कहा कि वोट डालना हर व्यक्ति का अधिकार और उसकी आवाज है। शबाना आजमी ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से काट दिया जाए तो वह क्या करेगा? उन्होंने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा, ‘हम विरोध करेंगे! यह हमारा अधिकार है।’ उन्होंने सभा में मौजूद लोगों की भागीदारी को लोकतंत्र की जीत बताया। शबाना आजमी ने कहा कि लोगों ने अपनी ताकत पहचान ली है और अन्याय को बर्दाश्त न करने का संकल्प लिया है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि मतदान का अधिकार नागरिकों को मिला हुआ हक है। उनके मुताबिक, संविधान ने इस अधिकार की गारंटी दी है और किसी व्यक्ति के वोट देने के अधिकार पर सवाल उठने पर विरोध करना भी लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है।

मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस की ओर से इसके पीछे शिवाजी पार्क में सभाओं को लेकर लागू प्रतिबंध, आवश्यक नागरिक अनुमति का अभाव और यातायात तथा आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पर संभावित असर जैसे कारण बताए गए। इसके बावजूद प्रदर्शन के लिए लोग शिवाजी पार्क पहुंचते रहे। जब प्रदर्शनस्थल पर लोगों को जाने नहीं दिया गया तो लोग शिवाजी पार्क के गेट पर बैठ गये। उनके हाथो में तिरंगा झंडा है। प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए शिवाजी पार्क और दादर इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर बैरिकेड लगाए गए और पुलिस, रेलवे तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। दादर स्टेशन पर भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। शिवाजी पार्क के सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन दादर पर पश्चिमी और मध्य रेलवे ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की। रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने अतिरिक्त कर्मचारियों और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया था। इसका उद्देश्य प्रदर्शन के लिए आने वाली संभावित भीड़ के कारण स्टेशन पर कानून-व्यवस्था और यात्री प्रबंधन बनाए रखना था।

दीपके ने कहा कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। दीपके ने गांधी जयंती को लोकतंत्र बचाने के संकल्प से जोड़ते हुए समर्थकों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इस बीच मुंबई में प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय निवासियों की आपत्ति और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी ने शिवाजी पार्क को शुक्रवार को राजनीतिक गतिविधि का प्रमुख केंद्र बना दिया।

लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने शिवाजी पार्क के कुछ निवासियों की आपत्ति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे इस बात से खुश हैं कि कुछ निवासी ध्वनि प्रदूषण को लेकर संवेदनशील हुए हैं और उन्होंने CJP के प्रदर्शन को रद्द कराने के लिए प्रशासन से संपर्क किया है। हालांकि, अख्तर ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यही निवासी महाराष्ट्र में किसी राजनीतिक दल की ओर से शिवाजी पार्क में सभा किए जाने पर भी इसी तरह की आपत्ति उठाएंगे।

दीपके ने कहा कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। दीपके ने गांधी जयंती को लोकतंत्र बचाने के संकल्प से जोड़ते हुए समर्थकों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इस बीच मुंबई में प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय निवासियों की आपत्ति और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी ने शिवाजी पार्क को शुक्रवार को राजनीतिक गतिविधि का प्रमुख केंद्र बना दिया।

- Advertisement -spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_img
Latest News

₹8,699 में लॉन्च हुआ 6000mAh बैटरी वाला itel A300C 4G, 90Hz डिस्प्ले समेत मिलेंगे ये फीचर्स !

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026। बजट स्मार्टफोन सेगमेंट में itel ने अपने लोकप्रिय A300C 4G का नया और ज्यादा...
- Advertisement -spot_imgspot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_imgspot_img