श्याम लाल शर्मा/नई दिल्ली
कोई माने या न माने, राहुल गांधी ने पूरी मोदी सरकार और भाजपा को परेशान करके रख दिया है।अमित शाह को सड़कों पर ला दिया।अमित शाह ख़ुद सड़कों पर मार्च करने को मजबूर हो गए हैं, यह काम जहाँ छोटे मोटे नेता करते थे ये सब अब पीएम उम्मीदवार ख़ुद झंडा लेकर घूम रहा है ।उससे बड़ी बात यह कि 1 नवम्बर को रामलीला मैदान में हुई अपार जनसमूह की रैली से भाजपा और उसकी पूरी मंडली उबर भी नहीं पाई थी कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुले मंच पर बहस करने की चुनौती दे दी।कहा -हिम्मत है तो सामने आइए, मंच आप तय कीजिये, वक्त आप तय कीजिये, मैं हर मुद्दे पर आपसे आमने – सामने बहस के लिये तैयार हूँ !
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न केवल खुली चुनौती दी बल्कि 24 घंटे बाद चैलेंज की याद भी दिलाई और कहा 24 घंटे हो गए, आप आरोप लगाते हैं ना मेरे ऊपर, आ जाइए, सब साफ हो जाएगा,आ जाइए, डरिए मत ,दूध का दूध, पानी का पानी कीजिए। चुनौती देते वक्त राहुल गांधी के चेहरे का आत्मविश्वास और हाथ का लाल गुलाब से साफ पता चल रहा है कि राहुल गांधी ने मोदी सरकार की सबसे कमजोर नस पकड़ ली है और ढेर सारे राज अब उनके पास हैं।यहाँ तक कि जब वो जज के रूप में मोहन भागवत को भी स्वीकारने को तैयार हैं तो इसका मतलब सारे सुबूत ठोस हैं, अकाट्य हैं। वो सीधे मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दे रहे हैं। भाजपा और पूरी सरकार में सन्नाटा पसरा हुआ है।मोदी जी अगर सच में विदेशी ताकतों के हाथ में नहीं खेल रहे अगर अमेरिका, ऐपस्टिन का दबाव नहीं है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी की यह चुनौती स्वीकार कर लेनी चाहिए और खुद जगह चुनकर खुली बहस की चुनौती को स्वीकार करना चाहिए। सभी नेशनल टीवी पर इसके लाइव टेलीकास्ट की इजाजत देनी चाहिए। कम से कम मानहानि का मुकदमा तो तुरंत करना चाहिए।
आप कहते हैं कि opposition देशद्रोही है। किसी भी स्टेज पे आप जगह चुनिए, डिबेट कीजिए मेरे साथ।
राहुल गांधी ने कहा—देशद्रोही कौन है? विदेशी फोर्सेस का कनेक्शन किसका है? और किस प्रकार का कनेक्शन है? जल्दी से जल्दी कीजिए, डरिए मत। दोनों मिलेंगे, मीडिया होगी, देश के युवा होंगे, टेबल होगी, एक साइड आप बैठेंगे, एक साइड मैं बैठूंगा। जिसको आप जज बनाना चाहते हैं, बना दो। मोहन भागवत जी को बिठा दो, चलो। और फिर डिबेट करते हैं। सवाल उठेंगे फाइनेंशियल सिस्टम पर, फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर, US डील कैसे हुई, क्यों हुई, इतनी जल्दी क्यों हुई, सिर्फ आपने क्यों की, कैबिनेट को क्यों नहीं बताया, अडानी का केस बंद क्यों हुआ, एपस्टीन फ़ाइल क्या है, ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिसपे खुलकर डिस्कशन होगा।
बाकी चीजों पर आपने मानहानि का केस लगा रखा है, शायद 45 मानहानि के केस मेरे ऊपर हैं। मगर इस डिबेट के मामले में, विदेशी कनेक्शन पर आप मानहानि का केस नहीं लगा रहे हैं। लगाइए ना, वहाँ भी डिस्कस करेंगे, खुल के। ये सब डिस्कस करते हैं, आइए।
हैप्पी दिवाली, मोदी जी।






